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CG News: छत्तीसगढ़ में कम बारिश की आशंका के बीच साय सरकार अलर्ट, किसानों से कहा- धान की जगह अपनाएं ये फसलें
Wed, 24 Jun 2026 07:14 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Wed, 24 Jun 2026 07:14 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ में इस वर्ष एल-नीनो के प्रभाव के चलते सामान्य से कम बारिश की आशंका को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को मौसम आधारित खेती अपनाने की सलाह दी है।
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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छत्तीसगढ़ में इस वर्ष एल-नीनो के प्रभाव के चलते सामान्य से कम बारिश की आशंका को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को मौसम आधारित खेती अपनाने की सलाह दी है। विभाग ने विशेष रूप से अपलैंड और कम जलधारण क्षमता वाली जमीनों में धान की जगह दलहन और तिलहन फसलों की खेती को बढ़ावा देने का आह्वान किया है। इसके लिए किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी।
कृषि विभाग के मुताबिक, संभावित अल्पवर्षा की स्थिति में अरहर, मूंग, उड़द, कुल्थी, मूंगफली, तिल, रामतिल, कोदो, कुटकी और रागी जैसी फसलें किसानों के लिए अधिक लाभकारी साबित हो सकती हैं। इन फसलों को अपेक्षाकृत कम पानी की जरूरत होती है और प्रतिकूल मौसम में भी इनकी पैदावार बेहतर रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन वैकल्पिक फसलों से किसानों का जोखिम कम होगा और मौसम की अनिश्चितता का असर खेती पर सीमित रहेगा।
राज्य सरकार किसानों को धान के विकल्प के रूप में दलहन और तिलहन की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। अपलैंड क्षेत्रों में धान के स्थान पर इन फसलों की बुआई करने वाले किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इसके अलावा, इन फसलों की खरीदी प्रधानमंत्री आशा योजना के तहत समर्थन मूल्य पर की जाती है, जिससे किसानों को अपनी उपज का उचित दाम मिलने की गारंटी रहेगी।
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कृषि विशेषज्ञों के अनुसार दलहन और तिलहन फसलें केवल आर्थिक रूप से ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी लाभकारी हैं। दलहनी फसलें मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाती हैं, जिससे भूमि की उर्वरता बनी रहती है और आगामी फसलों की उत्पादकता में भी सुधार होता है। कम लागत में बेहतर उत्पादन और बाजार में अच्छे दाम मिलने की वजह से किसानों की आय बढ़ाने में भी ये फसलें अहम भूमिका निभा सकती हैं।
कृषि विभाग ने मध्यम भूमि वाले क्षेत्रों के किसानों को भी कम वर्षा की आशंका को ध्यान में रखते हुए कम समय में तैयार होने वाली धान की किस्मों का चयन करने की सलाह दी है। इससे पानी की उपलब्धता कम होने की स्थिति में भी उत्पादन जोखिम को कम किया जा सकेगा। विभाग ने किसानों से मौसम आधारित कृषि रणनीति अपनाने, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने और शासन की प्रोत्साहन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की है। विभाग का मानना है कि समय रहते सही फसल चयन कर किसान संभावित सूखे के प्रभाव को कम करने के साथ अपनी आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी कर सकते हैं।
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कृषि विभाग के मुताबिक, संभावित अल्पवर्षा की स्थिति में अरहर, मूंग, उड़द, कुल्थी, मूंगफली, तिल, रामतिल, कोदो, कुटकी और रागी जैसी फसलें किसानों के लिए अधिक लाभकारी साबित हो सकती हैं। इन फसलों को अपेक्षाकृत कम पानी की जरूरत होती है और प्रतिकूल मौसम में भी इनकी पैदावार बेहतर रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन वैकल्पिक फसलों से किसानों का जोखिम कम होगा और मौसम की अनिश्चितता का असर खेती पर सीमित रहेगा।
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राज्य सरकार किसानों को धान के विकल्प के रूप में दलहन और तिलहन की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। अपलैंड क्षेत्रों में धान के स्थान पर इन फसलों की बुआई करने वाले किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इसके अलावा, इन फसलों की खरीदी प्रधानमंत्री आशा योजना के तहत समर्थन मूल्य पर की जाती है, जिससे किसानों को अपनी उपज का उचित दाम मिलने की गारंटी रहेगी।
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कृषि विशेषज्ञों के अनुसार दलहन और तिलहन फसलें केवल आर्थिक रूप से ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी लाभकारी हैं। दलहनी फसलें मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाती हैं, जिससे भूमि की उर्वरता बनी रहती है और आगामी फसलों की उत्पादकता में भी सुधार होता है। कम लागत में बेहतर उत्पादन और बाजार में अच्छे दाम मिलने की वजह से किसानों की आय बढ़ाने में भी ये फसलें अहम भूमिका निभा सकती हैं।
कृषि विभाग ने मध्यम भूमि वाले क्षेत्रों के किसानों को भी कम वर्षा की आशंका को ध्यान में रखते हुए कम समय में तैयार होने वाली धान की किस्मों का चयन करने की सलाह दी है। इससे पानी की उपलब्धता कम होने की स्थिति में भी उत्पादन जोखिम को कम किया जा सकेगा। विभाग ने किसानों से मौसम आधारित कृषि रणनीति अपनाने, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने और शासन की प्रोत्साहन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की है। विभाग का मानना है कि समय रहते सही फसल चयन कर किसान संभावित सूखे के प्रभाव को कम करने के साथ अपनी आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी कर सकते हैं।