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Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ को मखाना बोर्ड में मिली जगह, किसानों के लिए खुले नई खेती और आय के रास्ते

Sat, 13 Dec 2025 04:04 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Sat, 13 Dec 2025 04:04 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ में मखाना उत्पादन को प्रोत्साहन देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर राज्य को मखाना बोर्ड में शामिल किया गया है। 

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Chhattisgarh gets a place in the Makhana Board, opening up new avenues for farming and income for farmers
छत्तीसगढ़ को मखाना बोर्ड में मिली जगह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ में मखाना उत्पादन को प्रोत्साहन देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर राज्य को मखाना बोर्ड में शामिल किया गया है। इस निर्णय से प्रदेश के किसानों को मखाना की वैज्ञानिक खेती, प्रसंस्करण और बाजार तक बेहतर पहुंच मिल सकेगी। हाल ही में धमतरी जिले में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ में हो रहे मखाना उत्पादन की सराहना करते हुए मखाना बोर्ड के गठन की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि बोर्ड के माध्यम से किसानों को जल प्रबंधन, आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और विपणन में सहयोग दिया जाएगा।
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इसी क्रम में मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर के तहत राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जानकारी दी गई कि केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 से “सेंट्रल सेक्टर स्कीम फॉर डेवलपमेंट ऑफ मखाना” की शुरुआत की जा रही है, जिसमें शत-प्रतिशत केंद्रीय अनुदान का प्रावधान है। योजना के लिए शुरुआती चार महीनों हेतु 1.80 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
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खेती और तालाब निर्माण पर अनुदान
योजना के तहत तालाब में मखाना की खेती करने वाले किसानों को 1.79 लाख रुपये की इकाई लागत पर 40 प्रतिशत यानी 72 हजार रुपये का अनुदान मिलेगा। वहीं खेत में मखाना उत्पादन करने वाले किसानों को 1.32 लाख रुपये की लागत पर 40 प्रतिशत, यानी 53 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी। नए तालाब निर्माण पर 7 लाख रुपये की लागत के मुकाबले 2.80 लाख रुपये का अनुदान भी तय किया गया है।
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प्रसंस्करण इकाइयों पर भी विशेष सहायता
मखाना के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए माइक्रो लेवल प्रसंस्करण इकाई पर 10 लाख रुपये की लागत के विरुद्ध 35 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। एफपीओ के लिए स्मॉल लेवल यूनिट पर 39 लाख रुपये की लागत पर 50 प्रतिशत सहायता का प्रावधान है, जबकि निजी क्षेत्र को इसी लागत पर 35 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। बड़े स्तर की प्रसंस्करण इकाइयों के लिए 7 करोड़ रुपये की लागत पर 35 प्रतिशत अनुदान निर्धारित किया गया है।


प्रशिक्षण और प्रदर्शन पर जोर
मखाना खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रशिक्षण और एक्सपोजर विजिट कराई जा रही है। साथ ही इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय और महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय द्वारा मखाना की उन्नत खेती का प्रदर्शन भी किया जा रहा है।
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