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राजस्थान प्रकरण को लेकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र, भाजपा ने बताया हास्यास्पद
Tue, 28 Jul 2020 09:18 AM IST
देव कश्यप
पीटीआई, रायपुर
पीटीआई, रायपुर
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 28 Jul 2020 09:18 AM IST
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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम के नेतृत्व में अन्य वरिष्ठ नेताओं ने राज्यपाल को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा
- फोटो : Twitter
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छत्तीसगढ़ में सत्ताधारी दल कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी पर राजस्थान में संवैधानिक मूल्यों की हत्या करने का प्रयास करने का आरोप लगाया है तथा राष्ट्रपति से हस्तक्षेप करने की मांग की है।
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राज्य में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष शैलेष नितिन त्रिवेदी ने सोमवार को यहां बताया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम के नेतृत्व में अन्य वरिष्ठ नेताओं ने आज राज्यपाल अनुसुईया उइके को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।
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कांग्रेस ने राष्ट्रपति को भेजे ज्ञापन में कहा है कि राजस्थान में लोकतांत्रिक तरीके से निर्वाचित कांग्रेस के अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार को जिस तरह से गिराने का कुचक्र भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सहयोग से किया जा रहा है वह अलोकतांत्रिक है तथा संवैधानिक मूल्यों की हत्या करने के समान है। कांग्रेस ने कहा है कि देश में सत्ता के लिए जिस तरह की संस्कृति को जन्म दिया जा रहा है, वह अक्षम्य है। इसका कांग्रेस जन कड़ा विरोध करते हैं।
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उन्होंने कहा है कि देश के विभिन्न राज्यों मध्यप्रदेश, कर्नाटक, गोवा, मणिपुर, मेघालय के बाद राजस्थान में जिस तरह से भाजपा की रणनीति से विषम स्थिति उत्पन्न की जा रही है तथा लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों की हत्या कर भाजपा की सरकार बनाने का उपक्रम किया जा रहा है, वह देश, देशवासियों और प्रजातंत्र के लिए घातक है। इसकी जितनी निंदा की जाए कम है।
कांग्रेस ने राष्ट्रपति से निवेदन किया है कि देश के संवैधानिक और प्रजातांत्रिक ढांचों को बनाए रखते हुए राजस्थान में विधानसभा का विशेष सत्र तत्काल बुलाया जाए और अलोकतांत्रिक कृत्य पर रोक लगाते हुए इस प्रकरण में हस्तक्षेप करें। इधर राज्य के मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने कहा है कि जिनका संविधान और लोकतंत्र में विश्वास नहीं, जिन्होंने सबसे ज्यादा राष्ट्रपति शासन लगाया, उनसे संविधान और लोकतंत्र की बातें शोभा नहीं दे रही है।
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने कहा है कि जिस पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र दम तोड़ चुका है, जिस पार्टी ने अपने शासनकाल में संवैधानिक मूल्यों, संसदीय परंपराओं और लोकतंत्र का गला घोंटने में जरा भी हिचकिचाहट महसूस नहीं की, जो पार्टी संविधान और लोकतंत्र में विश्वास नहीं रखती, जिसके खाते में देश में सबसे ज्यादा बार राष्ट्रपति शासन लगाने का रिकॉर्ड है, आज उसी कांग्रेस से संविधान, संसदीय परंपरा और लोकतंत्र की बातें शोभा नहीं दे रही हैं।
श्रीवास्तव ने कहा है कि जिस कांग्रेस को न तो चुनाव आयोग पर विश्वास था, न ईवीएम पर विश्वास था और न ही जनमत पर विश्वास है, आंतरिक लोकतंत्र से विहीन वह कांग्रेस आज राजभवन जाकर इस तरह का प्रदर्शन कर और ज्ञापन देकर लोकतंत्र और संविधान की दुहाई दे रही है, इससे अधिक हास्यास्पद कुछ और नहीं हो सकता है।