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प्रधानमंत्री से मिले छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, इन मुद्दों को सुलझाने की अपील की
Sat, 15 Jun 2019 06:51 PM IST
अमर शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Sat, 15 Jun 2019 06:51 PM IST
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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की
- फोटो : Twitter
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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शनिवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और उनसे छत्तीसगढ़ के 70 लाख आदिवासियों और 58 लाख गरीब परिवारों से जुड़े लंबित विषयों के जल्द से जल्द समाधान की अपील की।
मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने किसानों के हितों को ध्यान रखते हुए छत्तीसगढ़ शासन ने किसानों से 2500 रू प्रति क्विटंल समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी की हैं, जिसके कारण छत्तीसगढ़ में धान की खरीद बढ़ी है।
उन्होंने पीएम मोदी से किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की जरूरत के अलावा, चावल को केंद्रीय पूल में लेने की स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया।
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उन्होंने प्रधानमंत्री से राज्य में प्रत्येक घर में नल कनेक्शन के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराने की योजना के लिए 100 फीसदी अनुदान देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि जिस तरह सौ-फीसदी विद्युतीकरण को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर कोशिशें हुई हैं, उसी प्रकार हर घर में पेयजल की व्यवस्था के लिए भी कोशिश की जाने की जरूरत है।
वन अधिकारों की मान्यता का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से कहा कि भारतीय वन अधिनियम, 1927 में प्रस्तावित संशोधनों में अनेक खामियां हैं, जिससे वन क्षेत्रों में रहनेवाले आदिवासियों के हितों की रक्षा नहीं किया गया है। बघेल ने इसमें संशोधन पर जोर दिया है।
बघेल ने कहा कि केंद्र सरकार ने देश के लघु एवं सीमांत किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना शुरू की है। लेकिन इस योजना में अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 के तहत वन अधिकार प्राप्त किसानों को शामिल नहीं किया गया है।
बघेल ने मांग की कि इस योजना के तहत वन अधिकार प्राप्त इन किसानों को शामिल कर इन्हें 12,000 रुपये हर साल सम्मान निधि दी जाए।
बैठक में उज्जवला योजना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना के तहत रिफिल कराए गए सिलेंडर की संख्या कम हैं।
उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों के पास सिलेंडर रिफिल कराने के लिए इतना पैसा नहीं होता। साथ ही दूरदराज के इलाकों में एलपीजी वितरकों की संख्या कम है। इस वजह से रिफिल कम हो पाती है।
उन्होंने कहा कि गरीबी की रेखा से नीचे आने वाले परिवारों को खाना पकाने के लिए ईधन के रूप में केरोसिन की जरूरत होती है। इसलिए राज्य हित में केरोसिन का कोटा 1.15 लाख किलो लीटर से बढ़ाकर 1.58 लाख किलो लीटर किया जाना चाहिए।
बघेल ने कहा कि राज्य में उज्जवला योजना के अंतर्गत जारी गैस कनेक्शन का सालाना रिफिल प्रतिशत औसतन 1.7 है, जो कि बेहद कम है। इसलिए 5 किलो वाले गैस सिलेंडर की आपूर्ति ऑयल कंपनियों द्वारा प्रदेश के सभी जिलों में आपूर्ति की जानी चाहिए ताकि बीपीएल परिवार की क्रय क्षमता के अंतर्गत एलपीजी का उपयोग सुनिश्चित हो सके।
मुख्यमंत्री बघेल ने प्रधानमंत्री मोदी से फसल बीमा योजना में सुधार लाने, फूड सब्सिडी, महात्मा गांधी नरेगा में आवटंन की समस्या, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), गोबर-धन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), स्टैंड-अप इंडिया योजना, पर भी अपनी बात कही। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव गौरव द्विवेदी भी मौजूद थे।
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मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने किसानों के हितों को ध्यान रखते हुए छत्तीसगढ़ शासन ने किसानों से 2500 रू प्रति क्विटंल समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी की हैं, जिसके कारण छत्तीसगढ़ में धान की खरीद बढ़ी है।
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उन्होंने पीएम मोदी से किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की जरूरत के अलावा, चावल को केंद्रीय पूल में लेने की स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया।
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उन्होंने प्रधानमंत्री से राज्य में प्रत्येक घर में नल कनेक्शन के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराने की योजना के लिए 100 फीसदी अनुदान देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि जिस तरह सौ-फीसदी विद्युतीकरण को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर कोशिशें हुई हैं, उसी प्रकार हर घर में पेयजल की व्यवस्था के लिए भी कोशिश की जाने की जरूरत है।
वन अधिकारों की मान्यता का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से कहा कि भारतीय वन अधिनियम, 1927 में प्रस्तावित संशोधनों में अनेक खामियां हैं, जिससे वन क्षेत्रों में रहनेवाले आदिवासियों के हितों की रक्षा नहीं किया गया है। बघेल ने इसमें संशोधन पर जोर दिया है।
बघेल ने कहा कि केंद्र सरकार ने देश के लघु एवं सीमांत किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना शुरू की है। लेकिन इस योजना में अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 के तहत वन अधिकार प्राप्त किसानों को शामिल नहीं किया गया है।
बघेल ने मांग की कि इस योजना के तहत वन अधिकार प्राप्त इन किसानों को शामिल कर इन्हें 12,000 रुपये हर साल सम्मान निधि दी जाए।
बैठक में उज्जवला योजना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना के तहत रिफिल कराए गए सिलेंडर की संख्या कम हैं।
उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों के पास सिलेंडर रिफिल कराने के लिए इतना पैसा नहीं होता। साथ ही दूरदराज के इलाकों में एलपीजी वितरकों की संख्या कम है। इस वजह से रिफिल कम हो पाती है।
उन्होंने कहा कि गरीबी की रेखा से नीचे आने वाले परिवारों को खाना पकाने के लिए ईधन के रूप में केरोसिन की जरूरत होती है। इसलिए राज्य हित में केरोसिन का कोटा 1.15 लाख किलो लीटर से बढ़ाकर 1.58 लाख किलो लीटर किया जाना चाहिए।
बघेल ने कहा कि राज्य में उज्जवला योजना के अंतर्गत जारी गैस कनेक्शन का सालाना रिफिल प्रतिशत औसतन 1.7 है, जो कि बेहद कम है। इसलिए 5 किलो वाले गैस सिलेंडर की आपूर्ति ऑयल कंपनियों द्वारा प्रदेश के सभी जिलों में आपूर्ति की जानी चाहिए ताकि बीपीएल परिवार की क्रय क्षमता के अंतर्गत एलपीजी का उपयोग सुनिश्चित हो सके।
मुख्यमंत्री बघेल ने प्रधानमंत्री मोदी से फसल बीमा योजना में सुधार लाने, फूड सब्सिडी, महात्मा गांधी नरेगा में आवटंन की समस्या, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), गोबर-धन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), स्टैंड-अप इंडिया योजना, पर भी अपनी बात कही। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव गौरव द्विवेदी भी मौजूद थे।