छत्तीसगढ़ में जीत के लिए ये है बीजेपी का प्लान
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छत्तीसगढ़ में बीजेपी अगर पूरी 11 लोकसभा सीटें जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही है तो यह बहुत महत्वाकांक्षी लक्ष्य नहीं कहा जा सकता। कांग्रेस की कमजोर स्थिति को देखते हुए बीजेपी यह करिश्मा कर सकती है, लेकिन इसके लिए उसे कई मौजूदा सांसदों को बदलना पड़ सकता है।
विधानसभा चुनावों में यह साफ देखा गया है कि बीजेपी के विधायक बड़ी संख्या में चुनाव हार गए। वह सत्ता में आ सकी तो नए चेहरों के कारण। कांग्रेस तीन जमीनी नेताओं टीएस सिंहदेव, चरणदास महंत और अजीत जोगी को टिकट देकर तीन सीटें जीतने की उम्मीद कर सकती है। बीजेपी कम से कम सात सीटों पर नए चेहरों को मौका दे सकती है।
विधानसभा चुनाव 2013 में बीजेपी ने 90 में से 49 सीटें जीती हैं, लेकिन बीजेपी के मतों में केवल 0.77 फीसदी इजाफा हुआ। छत्तीसगढ़ में हिंदुत्व की कोई लहर दिखाई नहीं देती। कांग्रेस-विरोधी माहौल और मुख्यमंत्री रमनसिंह का राजनीतिक कौशल मिलकर छत्तीसगढ़ में बीजेपी को क्लीन स्वीप के करीब पहुंचा सकते हैं।
वैसे उसके पास अभी 11 में से 10 सीटें थीं। कांग्रेस के चरणदास महंत ही कोरबा से अकेले सांसद थे। इस बार कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व का सफाया जीरम घाटी के नक्सली हमले में हो चुका है। दूसरी तरफ खेमेबाजी के कारण कांग्रेस कार्यकर्ता का मनोबल कमजोर है।
बीजेपी की रणनीति
बीजेपी लोगों का ध्यान बंटाने के लिए केंद्र सरकार के कामकाज पर रखेगी ताकि उसे स्थानीय मुद्दों पर नाराजगी का सामना नहीं करना पड़े। साथ ही वह कम से कम सात सीटों पर उम्मीदवारों के नाम बदल सकती है, जिनमें सोहन पोटई आदि के नाम प्रमुख हैं।
नरेंद्र मोदी के नाम का उपयोग करीब सात सीटों पर बीजेपी को अतिरिक्त लाभ दिला सकता है, लेकिन छत्तीसगढ़ में मोदी की लहर जैसा कुछ नहीं है। मोदी के बारे में कहा जा रहा है कि उनका कोई असर है तो शहरी क्षेत्रों में है। बस्तर और सरगुजा के आदिवासी क्षेत्रों में मोदी का प्रभाव कम है।
कांग्रेस की संभावनाएं
अजीत जोगी कोरबा से टिकट मांग रहे हैं, जहां से अभी चरणदास महंत सांसद हैं। चरणदास महंत का टिकट कोरबा से काटना संभव नहीं है। लेकिन मोदी के सहयोग के बिना महंत का चुनाव जीतना भी बड़ा मुश्किल होगा। मरवाही और तनाखार की दो विधानसभाएं जोगी के प्रभाववाली हैं। इसलिए जोगी को अंत में कांकेर से टिकट दिया जा सकता है।
टीएस सिंहदेव ने विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के लिए सरगुजा क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन किया है। उन्हें सरगुजा से टिकट दिया जाए तो वह भी जीतने वाले उम्मीदवार साबित हो सकते हैं। इन तीन मैदानी नेताओं पर ही कांग्रेस की संभावनाएं टिकी हैं।
बीजेपी की ताकत और कमजोरी
1. कांग्रेस विरोधी माहौल, डॉ. रमनसिंह का राजनीतिक कौशल और नरेंद्र मोदी का शहरों में करिश्मा
2. विधानसभा चुनाव-2013 में बीजेपी ने 90 में से 49 सीटें जीतीं
3. विपक्षी दल कांग्रेस की हालत खराब
बीजेपी की कमजोरी
1. आदिवासी इलाकों में नरेंद्र मोदी की कोई लहर नहीं
2. मौजूदा उम्मीदवारों के खिलाफ एंटी इनकमबेंसी का असर, क्योंकि पिछले दो चुनावों से बीजेपी ने 11 में से 10 सीटें जीती हैं
3. बीजेपी के वोट प्रतिशत में विधानसभा चुनावो में कोई बड़ा इजाफा नही
कांग्रेस की ताकत और कमजोरी
1. बस्तर, सरगुजा और राजनांदगांव के आदिवासी इलाकों में कांग्रेस का अच्छा प्रदर्शन
2. मतों के प्रतिशत के हिसाब से कांग्रेस छत्तीसगढ़ में ज्यादा पीछे नहीं
3. रमनसिंह सरकार और सांसदों के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी
कांग्रेस की कमजोरी
1. कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व का नक्सली हमले में सफाया
2. मौजूदा कांग्रेस नेताओं में मतभेद
3. अच्छे उम्मीदवारों की कमी
4. यूपीए सरकार के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी का बड़ा असर