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CG: रामविचार नेताम बोले- केंद्र सरकार और BJP के दबाव में झुकी भूपेश सरकार, आरक्षण पर बदलना पड़ा पुराना रवैया

Mon, 07 Aug 2023 11:33 PM IST
ललित कुमार सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर
अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर Published by: ललित कुमार सिंह Updated Mon, 07 Aug 2023 11:33 PM IST
सार

सीएम भूपेश बघेल के कैबिनेट बैठक को लेकर छत्तीसगढ़ बीजेपी ने निशाना साधा है। बीजेपी ने कहा कि कैबिनेट बैठक में आदिवासी आरक्षण पर पूर्ववत नियम लागू करने का फैसला लिया गया है।

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chhattisgarh Bjp leader Ramvichar Netam taunt on Bhupesh government for reservation
रामविचार नेताम, पूर्व गृहमंत्री, सीएम भूपेश बघेल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

सीएम भूपेश बघेल के कैबिनेट बैठक को लेकर छत्तीसगढ़ बीजेपी ने निशाना साधा है। बीजेपी ने कहा कि कैबिनेट बैठक में आदिवासी आरक्षण पर पूर्ववत नियम लागू करने का फैसला लिया गया है। यह आदिवासियों के हक की जीत है। पूर्व गृहमंत्री एवं राज्यसभा सांसद रामविचार नेताम ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि आदिवासी आरक्षण पर ढुलमुल रवैये से बाज आते हुए भूपेश सरकार ने आखिरकार बीजेपी के विरोध के कारण ये निर्णय लेने के लिए विवश होना पड़ा। केंद्र सरकार और बीजेपी के दवाब में भूपेश सरकार को अपना पुराना रवैया बदलना पड़ा।

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उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थाओं में एडमिशन के लिए 58 प्रतिशत आरक्षण ही लागू रहेंगे। अब राज्य में मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की कुल 973 सीटो में से अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्रों को 32% के हिसाब से पूरे 300 सीटें मिलेंगी।  रामविचार नेताम ने कहा है कि इससे पूर्व भूपेश सरकार ने आदिवासी छात्रों को महज190 सीटें देकर आदिवासी बहुल्य राज्य के युवाओं के साथ  धोखा कर रही थी। हमने केंद्रीय स्वास्थ मंत्री मनसुख मांडविया के सामने भी आदिवासी युवाओं के साथ हो रहे इस छल की शिकायत की  थी। उसके बाद केंद्र सरकार और भाजपा के दवाब में भूपेश सरकार को अपना रवैया बदलना पड़ा।
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आदिवासियों के साथ धोखेबाजी बर्दाश्त नहीं: रामविचार नेताम 
उन्होंने कहा कि भाजपा आदिवासियों के साथ किसी भी प्रकार की धोखेबाजी बर्दाश्त नहीं करेगी। वैसे भी राज्य की आदिवासी जनता इस सरकार और कांग्रेस पार्टी को आगामी चुनाव में सत्ता से बाहर का रास्ता दिखलाने ही वाली है। मेडिकल सीटों पर आदिवासियों के लिए आरक्षण के मामले को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि कैसे आरक्षण को लेकर उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई में राज्य सरकार छत्तीसगढ़ के आदिवासियों का पक्ष सही ढंग से नहीं रख रही थी। आदिवासी हित के प्रति लचर रवैया अपना रही थी। कांग्रेस सरकार व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में आदिवासी आरक्षण के विषय को टालती रही है। यह सरकार चुनाव आचार संहिता लागू होने तक इस पर कुछ भी नहीं करना चाहती थी। सरकार के लचर रवैया के कारण चिकित्सा शिक्षा विभाग अपनी तय समय सारणी से हट गया और MBBS की पहली अलॉटमेंट लिस्ट जारी नहीं हुई। 
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'अंतरिम राहत को टालने की हो रही थी कोशिश' 
MBBS में अवैध 16-20-14 आरक्षण रोस्टर का विरोध किया जा रहा था।  हाईकोर्ट के 19 सितंबर 2022 के गुरु घासीदास अकादमी फैसले के बाद सात महीनों तक भूपेश बघेल सरकार ने आदिवासी हित में अंतरिम राहत का सवाल भरसक टालने की कोशिश की थी। 

1 मई को सुप्रीम कोर्ट से सिर्फ लोक सेवा में 12-32-14 आरक्षण रोस्टर से भर्तियां करने की अंतरिम राहत मिली थी। यह राहत इस निवेद्न पर दी गई थी कि आरक्षण पूरी तरह शून्य हो गया है और प्रशासन के लिए मानव संसाधन की कमी हो रही है। 9 मई को सामान्य प्रशासन विभाग ने अपने सर्कुलर में मान लिया था कि शिक्षा में फिलहाल एससी-एसटी-ओबीसी का कोई आरक्षण नहीं है। तब से अब तक सामान्य प्रशासन विभाग ने स्थिति में बदलाव होने का कोई सर्कुलर जारी नहीं किया है। तब फिर किस अधिकार से चिकित्सा शिक्षा एवं अन्य विभाग 16-20-14 आरक्षण रोस्टर का प्रयोग कर रहे हैं। सत्र 2022 में भी भूपेश बघेल सरकार ने आदिवासी युवाओं के विरोध को नजर अंदाज करते हुए अवैध 16-20-14 आरक्षण रोस्टर से ही MBBS में प्रवेश दिया था?  पिछले हफ़्ते ही प्रवेश प्रक्रिया के बीच स्वास्थ्य मंत्रालय ने अचानक आयुक्त चिकित्सा शिक्षा राजीव अहिरे को हटा कर पुष्पा साहू को नियुक्त कर दिया। यह सारी प्रक्रिया राज्य सरकार की नियत को उजागर करती है।

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