छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव: लोगों के लिए अहम मुद्दा है जंगली हाथी, अब 16 सीटों पर करेंगे फैसला
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छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव पास आते ही लोगों का सरकार के प्रति गुस्सा भी साफ जाहिर हो रहा है। अब बात है 16 सीटों की। हम बात कर रहे हैं उत्तरी छत्तीसगढ़ की। यहां चुनावों को महज 20 दिन रह गए हैं। यहां सरकार जंगली हाथियों को नियंत्रित करने में नाकाम रही है। राज्य के पांच सबसे प्रभावित इलाके सरगुजा, जशपुर, बलरामपुर, सूरजपुर और रायगढ़ के कुछ हिस्सों के लोग 90 में से 16 सीटों का फैसला करेंगे।
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छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव पास आते ही लोगों का सरकार के प्रति गुस्सा भी साफ जाहिर हो रहा है। अब बात है 16 सीटों की। हम बात कर रहे हैं उत्तरी छत्तीसगढ़ की। यहां चुनावों को महज 20 दिन रह गए हैं। यहां सरकार जंगली हाथियों को नियंत्रित करने में नाकाम रही है। राज्य के पांच सबसे प्रभावित इलाके सरगुजा, जशपुर, बलरामपुर, सूरजपुर और रायगढ़ के कुछ हिस्सों के लोग 90 में से 16 सीटों का फैसला करेंगे।
गृह मंत्री रामसेवक पैकरा प्रतापपुर से विधायक हैं। सरगुजा डिवीजन में यहीं से बीते साल भाजपा ने महज एक सीट जीती थी। विधानसभा में विपक्ष के नेता टीएम सिंहदेव सरगुजा जिले के अंबिकापुर से कांग्रेस के मौजूदा विधायक हैं।
साल की शुरूआत में विधायक विमल चोपड़ा ने राज्य के वन मंत्री महेश गगदा से विधानसभा में सवाल किया था कि राज्य में जंगली हाथियों ने कितना नुकसान किया है। तब बताया गया कि जंगली हाथियों के आतंक में 53 लोगों की मौत हुई है, 20,646 एकड़ खेत और 2,851 घर साल 2015-16 के बीच में तबाह हुए हैं। जबकि साल 2016-17 में 66 लोगों की मौत, 17,110 एकड़ खेत और 1863 घर तबाह हुए हैं। वन अधिकारियों का कहना है कि साल 2018 में भी ऐसे ही आंकड़े हैं।
मामले पर एनजीओ और पर्यावरण कार्यकर्ता लंबे समय से कहते आ रहे हैं कि मनुष्यों और हाथियों में संघर्ष का कारण है गैर-जिम्मेदार तरीके से खनन करना है। जिससे हाथियों को सुरक्षित स्थान नहीं मिल पा रहा।
लोगों का कहना है कि सरकार से शिकायत करने के अलावा लोगों ने स्थानीय विधायकों को भी शिकायत की है। वन विभाग भी कुछ नहीं करता। हाथियों की संख्या बढ़ती जा रही है और सरकार कुछ नहीं कर रही है।
टीएम सिंहदेव ने भी इस बात को स्वीकार किया कि हाथी यहां समस्या बने हुए हैं। उनकी संख्या बढ़ रही है। उन्हें उपलब्ध कराया जाने वाला चारा भी पूरा नहीं पड़ रहा है। जिस कारण वह लोगों के खेतों में चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि उनके लिए कॉरिडोर बनाके उन्हें रोका जा सकता है। लेकिन यहां रहने वाले लोगों को अब कोई उम्मीद नहीं है। वह बेहद कम समय सोते हैं। लोग कहते हैं कि चुनाव आने के बाद एक बड़ा बदलाव भी आएगा। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही विकास और भ्रष्टाचार की बात करते हैं, इस बार हम उनसे हाथियों की बात करेंगे।