रेप पीड़िता बोली, 'मैं मर गई तो कोई मुझे वेश्या नहीं कहेगा'
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(पीड़िता का कमरा, फोटो साभार The Indian Express )
'अगर मैं मर जाउंगी तो कोई भी वेश्या नहीं कह सकेगा'। यह बात उस महिला की सुसाइड नोट में लिखी है जिसने बीते गुरूवार छत्तीसगढ़ के भिलाई में आत्महत्या कर ली।
इस महिला ने आरोप लगाया था कि उसके साथ 2 पुलिसकर्मी और एक डॉक्टर ने दुष्कर्म किया था जब वो लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में अपने चेहरे के इलाज के लिए भर्ती थी।
उसने अपने सुसाइड नोट में कई ऐसी बाते लिखी हैं जिसे जानकर न्याय व्यवस्था से विश्वास भी उठ सकता है। उसने लिखा है कि 'जब भी मुझे अदालत में मामले की सुनवाई के लिए बुलाया जाता था और मैं जब जाती थी तो अदालत में जज मौजूद नहीं होते थे।'
पीड़िता से लिए पैसे और धमकाया
बता दें कि अदालत में उसकी अगली सुनवाई 2 फरवरी को थी। पीड़िता के पिता नागपुर स्थित एक इंजनियरिंग कॉलेज में रिटायर्ड गार्ड थे। सुसाइड नोट में उसने लिखा है कि उसे अपनी इज्जत का डर था।
6 महीनों तक उसे पुलिस कर्मियों और डॉक्टर ने घर वालों से छिपा कर रखा था। वो अपने पिता की चौथी बच्ची थी। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार उसके भाई ने कहा कि 'डॉक्टर गौतम पंडित ने उसकी बहन को बताया कि उस जॉंडिस है और उसे अस्पताल में तीन दिन के लिए रखा। उन्होंने उसे दवाई दी और पुलिस कॉंस्टेबल सौरभ भक्त और चंद्र प्रकाश पांडेय ने उसके साथ बलात्कार किया। उन्होंने 6 महीने से ज्यादा दिन तक उसे धमकाया कि उन्होंने वीडियो बना लिया है और बहन से दो बार पैसे भी लिए।'
वकील भी नहीं दे रही थी साथ
जनवरी 2015 में उसने अपने परिवार को इस घिनौनी घटना के बारे में बताया
जिसके बाद तीनों गिरफ्तार किए गए। पीड़िता के भाई के अनुसार 'पुलिस भी
शुरूआती समय में एफआईआर दर्ज करने में अनइच्छुक थे। लेकिन अतंतः वो तीनों
गिरफ्तार किए गए। जिसके बाद मुझे और मेरी बहन को धमकी भरे फोन आने लगा और
इस बात का दबाव भी बनाया जाने लगा कि हम इस मामले से अपने कदम पीछे खींच
लें। कई बार मेरी बहन को जेल परिसर से भी फोन आते थे।'
पीड़िता के पिता का
दावा है कि प्रतिवादी पक्ष के वकील इस बात की धमकी देते थे वो इस मामले
में उसके परिवार का नाम भी शामिल कर देंगे। उन्होंने कहा कि उसने इस मामले
की रिपोर्ट नहीं कि क्योंकि उसनें अपने वकील को सब कुछ बता दिया था।
उसकी
वकील भी उसके लिए लड़ना नहीं चाहती थी और उससे कहती थी कि वो यह मामला छोड़
दे।
'मम्मी, पापा मुझे भूल जाइए'
अपने सुसाइड लेटर में उसने लिखा है कि 'मम्मी, पापा मुझे भूल जाइए। न
तो मुझे न्याय मिलेगा और न मैं इस जीवन में आगे बढ़ पाउंगी।'
उसने यह भी
लिखा है कि उसकी वकील कल्पना देशमुख ने भी उसे बताया कि इस मामले में न्याय
की उम्मीद बहुत कम है। उसे अदालत के कई चक्कर लगाने पड़ेगे।'
इतना ही नहीं
गुरूवार को देखमुख का फोन बंद रहा। पीड़िता के परिवारीजनों को यह उम्मीद
नहीं थी कि वह फांसी जैसा बड़ा कदम उठा सकती है।
ये है मामला
वहीं इस मामले में मुख्यमंत्री रमन सिंह का कहना है कि 'पीड़िता के दिमाग में कुछ भावनात्मक चल रहा था। सभी अभियुक्त गिरफ्तार कर लिए गए हैं और मामला कोर्ट के पास है।' भिलाई के एएसपी राजेश अग्रवाल ने कहा कि पुलिस हम इस मामले की तह तक जाएंगे।
बता दें कि बीते साल जनवरी 2015 में डॉक्टर गौतम पंडित और दो कांस्टेबल सौरभ भक्त और चंद्र प्रकाश पांडेय पर महिला से कथित तौर पर रेप करने का एक मामला दर्ज किया गया था।
पुलिस ने मामले को बलात्कार की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज कर लिया जिसके बाद दोनों पुलिस कर्मियों को गिरफ्तार कर लिया गया और डॉक्टर ने आत्मसमर्पण कर दिया। फिलहाल तीनों आरोपी जेल में बंद हैं।