फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chhattisgarh ›   chattisgarh_myanh_save_campagin

जगदलपुर के पिंजरे की वो अकेली मैना!

Mon, 07 Jul 2014 11:58 AM IST
Updated Mon, 07 Jul 2014 11:58 AM IST
विज्ञापन
chattisgarh_myanh_save_campagin
पिछले 20 सालों में करोड़ों रुपये ख़र्च होने के बाद भी छत्तीसगढ़ के राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना के प्रजनन में कोई सफलता नहीं मिली है।
विज्ञापन


जगदलपुर के पहाड़ी मैना संवर्धन केंद्र में अब केवल एक मैना बची है और ज़ाहिर है अकेली मैना के सहारे प्रजनन होने से रहा।

स्थानीय लोगों की मानें तो बस्तर के कुछ ख़ास इलाके में रहने वाली पहाड़ी मैना भी अब कम ही नज़र आती है।

छत्तीसगढ़ के प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यप्राणी रामप्रकाश कहते हैं, “अब हमारे पास पिंजरे में केवल एक मैना बची है। लेकिन हमने उसे प्रजनन के लिए नहीं रखा है। वह तो इसलिए है कि लोग जान सकें कि पहाड़ी मैना कैसी दिखती है।"

सरकार की कोशिश

chattisgarh_myanh_save_campagin

रामप्रकाश का दावा है कि पहाड़ी मैना इन दिनों प्रवास के लिए ओडिशा के मलकानगिरी इलाके़ में चली जाती है, इसलिए संभव है कि छत्तीसगढ़ के जिन इलाक़ों में पहले पहाड़ी मैना नज़र आती थी, वहां अब नज़र नहीं आ रही होगी।

बस्तर की पहाड़ी मैना को मनुष्य के आवाज़ की हुबहू नक़ल के लिए जाना जाता है। जिस अंदाज़ में आप बोलेंगे, यह पहाड़ी मैना उसी अंदाज़ में उस वाक्य को दुहरा देगी।

90 के दशक में इस मैना के संवर्धन के लिये सरकार ने कोशिश की और जगदलपुर में विशाल पिंजरा बना कर इसके प्रजनन की दिशा में प्रयास शुरु हुए। लेकिन आज तक राज्य सरकार ने इस राजकीय पक्षी पर एक भी वैज्ञानिक अध्ययन नहीं करवाया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

'गंभीर प्रयास नहीं'

chattisgarh_myanh_save_campagin

हालत ये है कि हर साल अलग-अलग मद से करोड़ों रुपये ख़र्च करने के बाद भी सरकार यह भी नहीं जान पाई कि पिंजरे में क़ैद मैना में से कितने नर और कितने मादा थे। अधिकारियों और मंत्रियों ने मैना की कैप्टिव ब्रीडिंग के लिए इनके डीएनए जांच की घोषणा की लेकिन उस पर अमल नहीं हो सका।

वन जीव संरक्षण के लिए काम कर रही नेहा सेमुअल सरकारी प्रयासों को गंभीर नहीं मानतीं।

वहीं कंज़र्वेशन कोर सोसायटी की वन्य जीव विशेषज्ञ मीतू गुप्ता कहती हैं, “पहाड़ी मैना का संरक्षण खुले जंगल में ही संभव है और सरकार को उनके रहवास के विकास की दिशा में काम करना चाहिए। उन्हें पिंजरे में रख कर विकास महज़ धन और समय की बर्बादी है।”

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed