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छत्तीसगढ़: उत्तरपुस्तिका से पन्ने गायब होने पर सीजीपीएससी पर 50 हजार का जुर्माना
Tue, 27 Oct 2026 07:31 PM IST
अमन कोशले
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिलासपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिलासपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Tue, 27 Oct 2026 07:31 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की लापरवाही पर बिलासपुर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। एक अभ्यर्थी की उत्तरपुस्तिका से चार पन्ने गायब मिलने और उनमें करीब 30 अंकों के उत्तर लिखे होने का मामला सामने आया।
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बिलासपुर उच्च न्यायालय ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) की गंभीर लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही अदालत ने आयोग को आदेश दिया है कि वह संबंधित अभ्यर्थी को भी 50 हजार रुपये का मुआवजा प्रदान करे। परीक्षा में शामिल हुए अभ्यर्थी की उत्तरपुस्तिका से चार पन्ने गायब मिलने के गंभीर मामले पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने यह फैसला सुनाया।
यह पूरा मामला तब सामने आया जब अभ्यर्थी ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत अपनी उत्तरपुस्तिका से संबंधित जानकारी मांगी थी। अभ्यर्थी को जब उत्तरपुस्तिका के दस्तावेज मिले तो जांच के दौरान उसमें चार पन्ने मौजूद नहीं थे। पड़ताल करने पर यह तथ्य सामने आया कि गायब हुए इन पन्नों में लगभग 30 अंकों के प्रश्नों के उत्तर लिखे हुए थे।
आरटीआई से सामने आई गड़बड़ी
उत्तरपुस्तिका से पन्ने गायब होने और मूल्यांकन प्रभावित होने पर अभ्यर्थी ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के दौरान आयोग द्वारा की जा रही कार्रवाई और जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे। उच्च न्यायालय ने आयोग द्वारा मामले की जांच समय पर पूरी न करने को लेकर अपनी सख्त नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने आयोग की कार्यप्रणाली में बड़ी लापरवाही पाते हुए उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया।
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तीन महीने में देना होगा मुआवजा
इस मामले की विस्तृत सुनवाई जस्टिस पीपी साहू की सिंगल बेंच (एकल पीठ) ने की। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आयोग अभ्यर्थी को 50 हजार रुपये का मुआवजा तीन महीने के भीतर उपलब्ध कराए। प्रतियोगी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और अभ्यर्थियों के अधिकारों की रक्षा करने के लिहाज से उच्च न्यायालय के इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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यह पूरा मामला तब सामने आया जब अभ्यर्थी ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत अपनी उत्तरपुस्तिका से संबंधित जानकारी मांगी थी। अभ्यर्थी को जब उत्तरपुस्तिका के दस्तावेज मिले तो जांच के दौरान उसमें चार पन्ने मौजूद नहीं थे। पड़ताल करने पर यह तथ्य सामने आया कि गायब हुए इन पन्नों में लगभग 30 अंकों के प्रश्नों के उत्तर लिखे हुए थे।
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आरटीआई से सामने आई गड़बड़ी
उत्तरपुस्तिका से पन्ने गायब होने और मूल्यांकन प्रभावित होने पर अभ्यर्थी ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के दौरान आयोग द्वारा की जा रही कार्रवाई और जांच प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे। उच्च न्यायालय ने आयोग द्वारा मामले की जांच समय पर पूरी न करने को लेकर अपनी सख्त नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने आयोग की कार्यप्रणाली में बड़ी लापरवाही पाते हुए उस पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया।
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तीन महीने में देना होगा मुआवजा
इस मामले की विस्तृत सुनवाई जस्टिस पीपी साहू की सिंगल बेंच (एकल पीठ) ने की। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आयोग अभ्यर्थी को 50 हजार रुपये का मुआवजा तीन महीने के भीतर उपलब्ध कराए। प्रतियोगी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने और अभ्यर्थियों के अधिकारों की रक्षा करने के लिहाज से उच्च न्यायालय के इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।