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CG Politics: 'केंद्र सरकार अडाणी की प्रवक्ता'; भूपेश ने साधा निशाना; बोले- धान खरीदी शुरू होते ही परेशानी
Fri, 22 Nov 2024 09:44 PM IST
ललित कुमार सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर
अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर
Published by: ललित कुमार सिंह
Updated Fri, 22 Nov 2024 09:44 PM IST
सार
CG Politics: अडाणी ग्रुप पर अमेरिका में हुए केस और छत्तीसगढ़ में निवेश को लेकर छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।
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भूपेश बघेल, पूर्व सीएम, छत्तीसगढ़
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
CG Politics: अडाणी ग्रुप पर अमेरिका में हुए केस और छत्तीसगढ़ में निवेश को लेकर छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने केंद्र सरकार को अडाणी का प्रवक्ता बताते हुए कहा कि बीजेपी नेता अडानी के प्रवक्ता की तरह काम कर रहे हैं। पूरी सरकार अडाणी की प्रवक्ता बन गयी है।
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पूर्व सीएम ने अपने सरकारी बंगले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस लेकर बीजेपी पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि अडानी को पिछले दिनों यूएसए कोर्ट से नोटिस मिला, तो केंद्र में बैठे मंत्री और बीजेपी प्रवक्ता ने उसका जवाब दिया। अडानी पर जो आरोप लगा वह सही है। पीएम मोदी और अडानी एक है। जैसे ही अडानी पर कोई बात आती है तो केंद्र सरकार और बीजेपी प्रवक्ता सक्रिय हो जाते हैं।
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कब होगी कार्रवाई
उन्होंने कहा कि भाजपा प्रवक्ता ने प्रदेश पर भी आरोप लगा दिया कि छत्तीसगढ़ में 25 हजार करोड़ का निवेश हुआ कि जितने में कोल खदान का ठेका अडानी को दिया वह केन्द्र की सरकार ने 2015 में दिया था। एसईसीएल जो भारत उपक्रम का है उस कोयला का ठेका भी अडानी को दे दिया गया। रमन शासन काल में एनएमडीसी के माध्यम से बैलाडीला का खदान भी अडानी को दिया गया। अडानी को 2000 करोड़ का नोटिस दिया गया। भाजपा के नेताओं ने स्वीकार कर लिया है। अब स्वीकार कर लिया है तो ईडी, सीबीआई को अडानी के खिलाफ कब कार्यवाही करेगी, ये भाजपा प्रवक्ता और मोदी को बताना चाहिये।
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'धान खरीदी शुरू होते ही किसान परेशान'
धान खरीदी में किसानों की परेशानी पर पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि किसानों को टोकन नहीं मिल रहा है। छोटे-छोटे किसान बोल रहे कि एक मिनट सर्वर खुलता है कुछ किसान ही रजिस्ट्रेशन करा पाते हैं फिर सर्वर बंद हो जाता है। अगर टोकन मिल गया तो फिर सर्वर डाउन हो जाता है। किसानों को घंटो खड़ा होना पड़ता है और बारदाने की कमी भी है। धान उठाने की नीति है उसमें बदलाव कर दिये हैं। अभी धान केंद्र में खरीदी होगी फिर संग्रहण केंद्र ले जाया जायेगा। उसके बाद उसको राइसमिलर्स को देंगे और अभी किसी राइसमिलर्स के साथ कोई एग्रीमेंट नहीं हुआ है। इसका मतलब है कि सरकार धान ही नहीं खरीदना चाहती और 21 क्विंटल का बोर्ड लगा दिया गया है पर कोई भी किसान 21 क्विंटल धान नहीं बेच पा रहा है। प्रति एकड़ किसानों को 8 हजार का नुकसान होगा। राज्य सरकार किसानों को ठग रही है।
प्रशासन में कोई पकड़ नहीं है: बघेल
बघेल ने कहा कि रबी फसल लेने से मना कर रहे और विष्णुदेव साय अपने टवीटर में कहते हैं कि किसानों का रबी फसल लेने में कोई रोक नहीं है दूसरी तरह उनके आदेश का अवहेलना हो रहा है। साय सरकार की प्रशासन में कोई पकड़ नहीं है और उनकी बात कोई नहीं सुनता है बोलते कुछ हैं और होता कुछ है। विभिन्न जगहों के कलेक्टर ने आदेश कर दिया कि रबी फसल का धान नहीं ले सकते। अगर धान लेंगे तो 50 हजार का फाइन लगेगा। यह सरकार किसान विरोधी सरकार है। पिछले साल 45 प्रतिशत चावल अभी तक जमा नहीं हो पाया है यह सरकार की नाकामी है। उसका खामियाजा गरीब किसान को उठाना पड़ेगा, क्योकि एंग्रीमेंट नहीं कर रहे तो धान उठाव नहीं होगा। धान खरीदी चालू हुये 1 हफ्ता हो गया कही भी परिवहन का साधन नहीं लगा है कि धान का उठाव करे, इसका मतलब कि धान संग्रहण केन्द्र पूरा धान के बोरे से पट जायेगा।