फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chhattisgarh ›   cg medical scam: additional director Nirmal Verma suspended, corruption medicine irregularities purchase

CG Medical Scam: कोरोना काल में दवा और उपकरण खरीदी में 2.65 करोड़ का घपला, तत्कालीन एडिशनल डायरेक्टर सस्पेंड

Tue, 06 Aug 2024 03:41 PM IST
ललित कुमार सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर
अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर Published by: ललित कुमार सिंह Updated Tue, 06 Aug 2024 03:41 PM IST
सार

CG Medical Scam: छत्तीसगढ़ राज्य शासन ने साल 2020 में दवा, लैब सामग्री और उपकरण खरीदी में 2 करोड़ 65 लाख 29 हजार 296 रुपए की अनियमितता के मामले में बड़ी कार्रवाई की है।

विज्ञापन
cg medical scam: additional director Nirmal Verma suspended, corruption medicine irregularities purchase
मेकाहारा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

CG Medical Scam: छत्तीसगढ़ राज्य शासन ने साल 2020 में दवा, लैब सामग्री और उपकरण खरीदी में 2 करोड़ 65 लाख 29 हजार 296 रुपए की अनियमितता के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। शासन ने कोरोना काल के दौरान साल 2020 में दवा और उपकरणों की खरीदी में करोड़ों के घोटाले के मामले में तत्कालीन एडिशनल डायरेक्टर डॉ. निर्मल वर्मा को सस्पेंड कर दिया है। मामले की दो साल से जांच चल रही थी। उन्हें इस केस में दोषी पाया गया था। फिलहाल वर्मा पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में पीएसएम विभाग के एचओडी हैं। निलंबन के दौरान उन्हें मेडिकल कॉलेज कांकेर में अटैच किया गया है।
विज्ञापन


कोरोना खत्म होने के बाद इस मामले की शिकायत की गई थी। जांच समिति की रिपोर्ट में बताया गया कि इन खरीदारियों में करीब 2.65 करोड़ रुपये की अनियमितताएं पाई गईं है। चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से गठित जांच समिति इस मामले की गहन जांच कर रही थी और पाया कि उस दौरान चिकित्सा शिक्षा संचालक के रूप में संविदा पर कार्यरत डॉ. एसएल आदिले और वित्तीय अधिकार रखने वाले डॉ. निर्मल वर्मा ने नियमों का घोर उल्लंघन किया। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में उन्हें दोषी माना था, जिसके आधार पर कार्यवाही की अनुशंसा की गई थी। हालांकि उस दौरान मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। कुछ समय पहले यह मामला दोबारा चर्चा में आया और शासन ने डा. वर्मा को निलंबित कर दिया है।
विज्ञापन


जांच कमेटी ने माना था घोर वित्तीय उल्लंघन 
शासन के नियमानुसार एक लाख की ज्यादा से खरीदी टेंडर से की जाती है, लेकिन डॉ. वर्मा तब डीडीओ भी थे। उन्होंने 2 करोड़ 65 लाख 29 हजार 296 रुपए के क्रय आदेश कोटेशन के आधार पर किया। जांच कमेटी ने इसे घोर वित्तीय उल्लंघन माना था। सस्पेंशन आर्डर में भी खरीदी में घोर वित्तीय अनियमितताएं का उल्लेख है। डॉ. सुमित त्रिपाठी की अध्यक्षता में कमेटी ने वित्तीय अनियमितता की जांच की थी और अगस्त 2022 में अपनी रिपोर्ट में चिकित्सा शिक्षा विभाग को सौंपी थी। इसके आधार पर कार्रवाई की गई है। कोरोना काल के दौरान की गई वित्तीय अनियमितता की शिकायत बीजेपी आरटीआई प्रकोष्ठ के संयोजक विजय शंकर मिश्रा ने की थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


पहले भी कर चुके हैं गड़बड़ी
डॉ. वर्मा के खिलाफ इससे पहले भी गड़बड़ी के कुछ और मामले सामने आ चुके हैं। छत्तीसगढ़ नर्सेस काउंसलिंग में किसी प्रकार के खरीदी के लिए वित्तीय शक्तियां चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर प्रदान नहीं किए जाने के बाद भी डॉक्टर वर्मा ने  7 लाख 30 हजार 179 रुपए के फर्नीचर और कंप्यूटर आदि सामग्रियों की खरीदी कर डाली। इसके अलावा भारतीय कॉलेज दुर्ग में बीएससी नर्सिंग के 40 सीटें देने के अनुशंसा की गई तब अस्पताल कुछ हिस्सों का मेंटेनेंस किया जा रहा था। यहां तक अस्पताल को चालू हालत में भी नहीं था। इतना ही नहीं लीगल प्रकरण के प्रभारी अधिकारी के रूप में फोटो कॉपी बिल में गड़बड़ी शिकायत से पाई गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed