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CG liquor scam: शराब घोटाले के 'किंगपिन' हैं रिटायर्ड आईएएस ऑफिसर अनिल टुटेजा; ईडी की जांच में बड़ा खुलासा

Thu, 25 Apr 2024 08:16 PM IST
ललित कुमार सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर
अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर Published by: ललित कुमार सिंह Updated Thu, 25 Apr 2024 08:16 PM IST
सार

CG liquor scam: प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी गुरुवार को रिटायर्ड आईएएस ऑफिसर अनिल टुटेजा को लेकर बड़ा खुलासा किया है। ईडी ने कहा कि टुटेजा छत्तीसगढ़ में चल रहे शराब सिंडिकेट का "किंगपिन" हैं, जिससे 2100 करोड़ रुपये से अधिक की आपराधिक आय हुई है।

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CG liquor scam: Retired IAS officer Anil Tuteja is 'kingpin' of liquor scam case
साकेंतिक तस्वीर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

CG liquor scam: प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी गुरुवार को रिटायर्ड आईएएस ऑफिसर अनिल टुटेजा को लेकर बड़ा खुलासा किया है। ईडी ने कहा कि टुटेजा छत्तीसगढ़ में चल रहे शराब सिंडिकेट का "किंगपिन" है, जिससे 2100 करोड़ रुपये से अधिक की आपराधिक आय हुई है। ईडी ने जांच के बाद दावा किया कि 'सिंडिकेट सक्रिय संचालन के लिए राज्य प्रशासन के प्रबंधन में उनकी प्रत्यक्ष भागीदारी के साक्ष्य एकत्र किए गए हैं और उन्हें इस मामले में एक अन्य सह आरोपी अनवर ढेबर के साथ सक्रिय रूप से शामिल पाया गया है।'

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अनवर ढेबर रायपुर के मेयर और कांग्रेस नेता ऐजाज ढेबर के बड़े भाई हैं। साल 2003 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी टुटेजा को पिछले एक हफ्ते राज्य की राजधानी रायपुर में ईडी ने गिरफ्तार किया था और वर्तमान में वह पांच दिन के लिए ईडी की हिरासत में हैं। 29 अप्रैल को उन्हें दोबारा कोर्ट में पेश किया जायेगा। 
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एजेंसी का दावा है कि उसने सबूत जुटाए हैं कि टुटेजा "आधिकारिक तौर पर उत्पाद शुल्क विभाग का हिस्सा नहीं था, फिर भी वह इस विभाग के संचालन में सक्रिय रूप से शामिल था।" जांच के दौरान टुटेजा ने 14.41 करोड़ रुपये की प्राप्ति से संबंधित डिजिटल साक्ष्य भी पाए गए हैं। मामले में सह-अभियुक्त अरुणपति त्रिपाठी की छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक के रूप में नियुक्ति में भी उनकी भूमिका कथिततौर पर पाई गई है। टुटेजा की "मिलीभगत" कार्रवाइयों की वजह से राज्य के खजाने को "भारी नुकसान" हुआ  है और शराब सिंडिकेट के लाभार्थियों की जेबें 21 सौ करोड़ रुपये से अधिक की अवैध आय से गर्म हो गई है।
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सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में आयकर विभाग की शिकायत पर अपनी पिछली एफआईआर को रद्द करने के बाद ईडी ने कथित शराब घोटाला मामले में एक नया मनी लॉन्ड्रिंग केस दर्ज किया था। शीर्ष अदालत ने फैसला सुनाया कि कोई अनुसूचित अपराध नहीं है और इसलिए मनी लॉन्ड्रिंग का मामला नहीं बनता है। इस फैसले से ठीक पहले एजेंसी ने मामले में अपनी जांच की रिपोर्ट छत्तीसगढ़ ईओडब्ल्यू/एसीबी के साथ साझा किया था और एक आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की थी और एक बार जब उन्होंने एफआईआर दर्ज की, तो ईडी ने उस शिकायत का संज्ञान लेते हुए एक नया मनी लॉन्ड्रिंग मामला दर्ज किया। आईएएस अधिकारी पिछले साल छत्तीसगढ़ के उद्योग और वाणिज्य विभाग में संयुक्त सचिव के पद से रिटायर्ड हुए थे।


ईडी ने आरोप लगाया था कि छत्तीसगढ़ में बेची गई शराब की "हर" बोतल से "अवैध रूप से" पैसा इकट्ठा किया गया था और अनवर ढेबर के नेतृत्व वाले शराब सिंडिकेट ने दो हजार करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत सामने आए हैं। साल 2019 और 2022 के बीच चला कथित शराब घोटाला तीन बड़े पैमाने से किया गया था।

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