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CG: सोनपैरी में हिन्दू संगम; भागवत बोले- ये बंटने का नहीं संगठित होने का समय, सभी पंथ का मूल है हिन्दू धर्म

Wed, 31 Dec 2025 07:50 PM IST
ललित कुमार सिंह अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: ललित कुमार सिंह Updated Wed, 31 Dec 2025 07:50 PM IST
सार

Mohan Bhagwat, Hindu Sangam Sonpari Abhanpur: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ स्थापना के शताब्दी वर्ष पर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के अभनपुर के सोनपैरी में असंग देव कबीर आश्रम में बुधवार को विशाल हिन्दू सम्मेलन आयोजित किया गया।

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CG: Hindu gathering in Sonpari; mohan Bhagwat said - now is time to unite, not to divide
सर संघचालक डॉ. मोहन भागवत - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

विस्तार

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Mohan Bhagwat, Hindu Sangam Sonpari Abhanpur: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ स्थापना के शताब्दी वर्ष पर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के अभनपुर के सोनपैरी में असंग देव कबीर आश्रम में बुधवार को विशाल हिन्दू सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें सर संघचालक डॉ.  मोहन भागवत ने कहा कि संघ के सौ वर्ष पूर्ण होने पर देशभर में हिन्दू सम्मेलन आयोजित हो रहे हैं। मंडल स्तर पर यह आयोजन हो रहे हैं। संघ की स्थापना का शताब्दी वर्ष उत्सव नहीं बल्कि राष्ट्र और समाज कार्य को और गति देने का अवसर है। इस अवसर पर स्वयंसेवक पंच परिवर्तन का विषय लेकर समाज में जा रहे हैं।


 

हम केवल संकट पर ही चर्चा नहीं करते हैं बल्कि समाधान पर भी अपनी बात रखते हैं क्योंकि यदि हम ठीक रहेंगे तो किसी संकट का असर नहीं होगा। आज बांग्लादेश समेत विश्व में जिस प्रकार चुनौती हैं। ऐसे में बंटने नहीं संगठित होने का समय है। उन्होंने कहा कि देश में जब भी कोई आपदा आ जाए तो सबसे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का स्वयंसेवक खड़ा मिलेगा। वह बिना प्रचार के कार्य करता है।

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लोग पांच बातों पर फोकस करें
उन्होंने कहा कि लोगों को पांच बातें व्यवहार में लानी होगी। संघ के शताब्दी वर्ष में स्वयंसेवक यही पांच बातें लेकर समाज में पहुंच रहे हैं। स्वयंसेवकों ने इन विषयों को पहले स्वयं भी अपनाया है। इन पांच बातों पंच परिवर्तन को अपना कर हम राष्ट्र और समाज की उन्नति में सहभागी हो सकते हैं।

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पहला: भेद को खत्म करना होगा। समाज के हर वर्ग में हमारा उठना, बैठना, सुख-दुःख में सहभागिता हो। सबको मैं अपना मित्र बनाऊंगा, यही सामाजिक समरसता है। पानी का साधन जो भी हो वह सबके लिए हो।

दूसरा: अपने घर में सप्ताह में एक दिन तय करके सब एक साथ भजन करें, साथ में घर पर बना भोजन करें। आपस के सुख दुःख की चर्चा करें। हम कौन हैं, देश की स्थिति परिस्थिति पर चर्चा करें। महान आदर्शो पर चर्चा करना, उन्हें जीवन में कैसे अपनाएं इस पर चर्चा कर प्रेरित करना।

तीसरा: आज ग्लोबल वार्मिंग की चुनौती है, पर्यावरण संरक्षण के लिए मैं व्यक्तिगत स्तर पर क्या कर सकता हूं। सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग कैसे कम हो सकता है। पेड़ लगाओ, वाटर हार्वेस्टिंग कर सकते हैं।

चौथा: स्व के मार्ग पर चलना। घर, परिवार, समाज में स्व भाषा बोलूंगा। यदि दूसरे प्रान्त में रहता हूं तो वहां की भाषा भी सीख लूंगा। अपना वेश पहनना, हर दिन नहीं पहन सकता, लेकिन पूजा में तो पहन सकता हूं। अपनी वेशभूषा पहनना ही नहीं आता यह ठीक नहीं। स्वदेशी वस्तु का उपयोग अधिक करें।

पांचवा: धर्म सम्मत आचरण कैसे करें, इसके लिए नागरिक कर्तव्य का पालन करना चाहिए। संविधान हमारे पुरखों ने हमें प्रदान किया है, उसमें हमारे मूल्य व संस्कृति के दर्शन की अभिव्यक्ति होती है। उन्हें पालन करना चाहिए। कुछ बातें कानून में नहीं हैं। माता-पिता बड़ों के चरण स्पर्श करना, इससे विनम्रता आती है। बच्चों को संस्कार दें, घर में बच्चों से दान दिलवाने की परंपरा रही है, जिससे उनमें दायित्व का बोध आए।





खरगोश का सुनाया प्रेरक प्रसंग
उन्होंने एक प्रेरक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि एक खरगोश सोया था। अचानक पत्ता गिरा तो वह डर गया। उसने भगवान से मांगा, भगवान मुझे छोटा क्यों बनाया, कुछ हाथी जैसा बना देते। भगवान ने उसे तथास्तु कह दिया। अब वह तालाब में नहाने गया, तो वहां मेढकों ने कहा, वहाँ मगरमच्छ है मत जाओ। खरगोश ने कहा हे भगवान मगरमच्छ जैसी मोटी खाल दे देते,भगवान ने कहा तथास्तु। अगले दिन वन में वह कहीं जा रहा था, तो जानवरों ने कहा, भागो जंगली भैंसों का झुण्ड आ रहा है। कोई मोटी खाल काम नहीं आएगी। इस पर खरगोश ने पुनः भगवान को याद किया। भगवान ने कहा, अलग-अलग रूप क्षमता मांगने के बजाय भय खत्म करने का ही वरदान मांग लेते।


मातृत्व स्नेह का अद्भुत दृश्य
हिन्दू संगम में जैसे ही मंच पर मुख्य वक्ता मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि को आमंत्रित किया गया। मंच पर उस समय मातृत्व स्नेह एवं मातृशक्ति के प्रति आदर का सुंदर दृश्य देखने को मिला जब पूजनीय सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत गायत्री परिवार की वरिष्ठ समाज सेवी उर्मिला नेताम जी जिन्हें आयु के कारण चलने में असुविधा हो रही थी, ऐसे में पूजनीय सरसंघचालक जी ने उनको सहारा देते हुए उन्हें भारत माता के चित्र में पुष्प अर्पित करने में सहयोग किया। यह अत्यंत प्रेरक दृश्य था।

 

मुख्य अतिथि राष्ट्रीय संत असंग देव ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक हमें और आपको स्वयं सेवा करना सिखाता है। मधुमक्खी में संगठन होता है तो हाथी भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता। आपका धन खो जाए पुनः मिल जाएगा, मित्र पुनः वापस आ जाएंगे, लेकिन एक बार मनुष्य का शरीर व्यर्थ में छूट जाए तो उसके पुण्य को पुनः अर्जित नहीं किया जा सकता। देवताओं से भी श्रेष्ठ मनुष्य का जीवन होता है लेकिन उसके लिए संस्कार आवश्यक है, बिना संस्कार मनुष्य दानव बन जाता है।

 

उन्होंने कहा, हिन्दू धर्म सभी पंथों की जड़ है, यह हमारा सौभाग्य है कि भारत जैसी पुण्य भूमि में जन्म हुआ जहां भगवान राम एवं कृष्ण जी का जन्म हुआ। आज बांग्लादेश समेत विश्व में जिस प्रकार चुनौती हैं। ऐसे में बंटने नहीं संगठित होने का समय है। उन्होंने कहा, देश में जब भी कोई आपदा आ जाए तो सबसे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का स्वयंसेवक खड़ा मिलेगा, वह बिना प्रचार के कार्य करता है।

 

गायत्री परिवार की समाजसेवी उर्मिला नेताम ने कहा कि आज समाज को संगठन की सर्वाधिक आवश्यकता है। आज परिवार बिखर रहे हैं। संस्कार देकर भारतीय संस्कृति को बचाया जा सकता है। आज विदेशी संस्कृति के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है, ऐसे में मातृ शक्ति का जागरण सबसे अधिक आवश्यकता है।

 

कलाकारों ने दी सांस्कृतिक प्रस्तुति
हिन्दू सम्मेलन के दौरान छत्तीसगढ़ी लोक कलाकार और गायिका आरु साहू और उनकी टीम ने भजन एवं लोकगीत की सुंदर प्रस्तुति दी। उनके भजन से पूरा वातावरण धार्मिक हो गया।



 


कोविदार पौधा लगाकर प्रकृति संरक्षण का संदेश
हिन्दू संगम कार्यक्रम के बाद सरसंघचालक ने सोनपैरी गांव में कोविदार पौधा लगाकर लोगों को पर्यावरण के प्रति दायित्व का संदेश दिया।
 

ये रहे मौजूद
इस दौरान मुख्य अतिथि गुरुदेव राष्ट्रीय संत असंग देव, विशिष्ट अतिथि गायत्री परिवार की समाजसेवी उर्मिला नेताम मौजूद रहीं।

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