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Political Analysis: कोटा में पहली बार जूदेव खिलाएंगे कमल या बरकरार रहेगा रेणु जोगी का जादू?, जानें सियासी गणित

Thu, 16 Nov 2023 11:28 AM IST
Lalit Kumar Singh ललित कुमार सिंह
Updated Thu, 16 Nov 2023 11:28 AM IST
सार

CG Election 2023: political analysis of kota assembly elections 2023; बिलासपुर जिले की कोटा विधानसभा सीट छत्तीसगढ़ के सियासी इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। हर बार की तरह इस बार भी यह सीट वीआईपी हाई प्रोफाइल बनी हुई है।

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Cg election 2023: political analysis of kota assembly elections 2023, Renu Jogi, Prabal Pratap Singh Judev, At
कोटा से जेसीसीजे प्रत्याशी रेणु जोगी, बीजेपी प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, कांग्रेस से अटल श्रीवास्तव - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

CG Election 2023: political analysis of kota assembly elections 2023; बिलासपुर जिले की कोटा विधानसभा सीट छत्तीसगढ़ के सियासी इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। हर बार की तरह इस बार भी यह सीट वीआईपी हाई प्रोफाइल बनी हुई है। साल 2023 के चुनाव में कोटा से भाजपा प्रत्याशी प्रबल प्रताप सिंह जूदेव के सामने कांग्रेस प्रत्याशी अटल श्रीवास्तव हैं। यही से वर्तमान विधायक और जेसीसीजे के संस्थापक अजीत जोगी की पत्नी रेणु जोगी भी चुनाव मैदान में हैं। प्रबल प्रताप सिंह जूदेव बीजेपी के दिग्गज नेता रहे दिलीप सिंह जुदेव के बेटे हैं। इस वजह से कोटा में इस बार चुनावी घमासान है। यहां पर त्रिकोणीय मुकाबला है। कोटा सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती है। बीजेपी यहां से कमल खिलाने के लिए जद्दोजहद कर रही है। प्रबल प्रताप सिंह के सामने कोटा से कमल खिलाने की चुनौती है, तो रेणु जोगी के सामने चौथी बार इस सीट को बचाए रखने की जद्दोजहद है। वहीं अटल श्रीवास्तव की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। 

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कोटा विधानसभा क्षेत्र की स्थापना 1965 को हुई थी। इस सीट से कांग्रेस जीतती आ रही है। यह छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी की पत्नी डॉ. रेणु जोगी की सीट हैं। आजादी के बाद जब से कोटा विधानसभा अस्तित्व में आया तब से यहां कांग्रेस का ही कब्जा रहा है। इस रिकॉर्ड को पहली बार पिछले विधानसभा चुनाव कांग्रेस पार्टी से निकलीं रेणु जोगी ने तोड़ा और कोटा विधानसभा पर पहली बार किसी अन्य दल ने कब्जा किया। 
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बीजेपी की इतिहास बदलने की जंग
बीजेपी ने इस बार कोटा से प्रबल प्रताप सिंह जूदेव को मौका दिया है ताकि चुनावी मुकाबला जोगी बनाम जूदेव रहे। हालांकि यहां पर त्रिकोणीय मुकाबला रहेगा, लेकिन बीजेपी दो ध्रुवीय मुकाबले में कांग्रेस डैमेज करना चाहती है पर कांग्रेस की ताकत उसका इतिहास और उनके कैडर वोटर्स हैं।
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विधानसभा चुनाव 2018 का परिणाम
विधानसभा चुनाव 2018 के परिणाम की बात करें, तो पिछली बार जेसीसीजे प्रत्याशी रेणु जोगी को सर्वाधिक 48,800 वोट मिले थे। वोटों का प्रतिशत 32.77 रहा। 45,774 वोट के साथ दूसरे नंबर पर बीजेपी के काशीराम साहू को संतोष करना पड़ा। कांग्रेस से 30,803 मतों के साथ विभोर सिंह तीसरे नंबर पर थे। 

कोटा विधानसभा - फैक्ट फाइल
कुल मतदाता- 218113
पुरुष मतदाता- 108446
महिला मतदात- 109664

विधानसभा चुनाव 2003 का परिणाम
प्रत्याशी                     पार्टी                                     वोट
राजेंद्र प्रसाद शुक्ला     कांग्रेस                                  39546
भूपेंद्र सिंह                 बीजेपी                                  37866 

2006 में उपचुनाव
रेणु जोगी                   कांग्रेस                                   59465 
 भूपेंद्र सिंह                 बीजेपी                                  35995 

विधानसभा चुनाव 2008 का परिणाम
रेणु जोगी                    कांग्रेस                                   55317
मूलचंद्र खंडेलवाल        बीजेपी                                  45506 

विधानसभा चुनाव 2013 का परिणाम
रेणु जोगी                       कांग्रेस                                58390  
काशीराम साहू               बीजेपी                                 53301 



जातीय समीकरण
कोटा विधानसभा सीट पर कुल 2 लाख 11 हजार 166 वोटर्स हैं, जिनमें 1 लाख 5 हजार 281 पुरुष और 1 लाख 5 हजार 885 महिला मतदाता शामिल हैं। यह सीट आदिवासी बहुल्य है। 1 लाख 92 हजार 323 मतदाताओं में 65 फीसदी आबादी इसी वर्ग का है। इसके अलावा 25 फीसदी ईसाई मतदाता भी हैं। शहरी इलाकों में मुस्लिम, ब्राह्मण और दूसरी स्वर्ण जातियां भी चुनाव नतीजों को प्रभावित करती हैं। यहां ब्राह्मण, मुस्लिम, ईसाई और साहू जातियों की संख्या शहरी क्षेत्रों में ज्यादा है। चुनाव में यही जाति हार-जीत तय करते हैं। इसलिए चाहे बीजेपी हो या कांग्रेस या जेसीसीजे सभी यहां पर इन्हीं वर्ग पर फोकस रखकर विधानसभा में उतरते हैं। 

कोटा विधानसभा सीट का इतिहास
कोटा विधानसभा सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती है। वर्ष 2018 का चुनाव छोड़ दें तो यहां पर ज्यादातर कांग्रेस जीतती रही है। बीजेपी यहां पर कमल खिलाने के लिए सियासी जंग लड़ रही है। साल 1952 से लेकर अब तक कोटा विधानसभा सीट पर 14 बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। काशीराम तिवारी यहां पहले विधायक निर्वाचित हुए थे। उनके बाद मथुरा प्रसाद दुबे 4 बार और राजेंद्र शुक्ला 5 बार विधायक बने। शुक्ला के निधन के बाद साल 2006 में हुए उपचुनाव में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की पत्नी रेणु जोगी कांग्रेस से चुनाव जीतीं थी और तब से लगातार 2018 को छोड़कर कांग्रेस पार्टी ही यहां जीतती रही है। साल 2018 कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने पर जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जोगी से रेणु जोगी चुनाव लड़ीं और विधायक बनीं। वह पहली महिला विधायक हैं जो पिछले तीन बार से जनप्रतिनिधि हैं।
यहां की सियासी तासिर देखें तो रेणु जोगी को अगर छोड़ दें तो ज्यादातर यहां से ब्राह्मण प्रत्याशी ही चुनाव जीतते रहे हैं। 

स्थानीय मुद्दे
कोटा विधानसभा क्षेत्र में विकास की दर बहुत धीमी रही है। पुरानी विधानसभा सीट होने के बावजूद इस क्षेत्र में विकास नहीं हुआ है। इस क्षेत्र में निजी विश्वविद्यालय के अलावा कई स्कूल और कॉलेज हैं। क्षेत्र के ज्यादातर लोग कृषि पर निर्भर हैं, जो कि 80 फीसदी आबादी की आय का मुख्य स्रोत है। क्षेत्र में कोयला खदान, पॉवर प्लांट और चावल मिल जैसे उद्योगों की मौजूदगी ने रोजगार के नए अवसर बनाएं है। इस क्षेत्र में अरपा भैंसाझार प्रोजेक्ट को सबसे पहले 6 जून 2012 को मंजूरी मिली थी, जो अभी तक पूरा नहीं हो सका। उस वक्त इसकी लागत लगभग 606 करोड़ थी, चार साल बाद जिसकी लागत लगभग 1,141 करोड़ हो गई। इस प्रोजेक्ट से लगभग एक लाख किसानों को पानी देने का दावा किया गया था। किसानों को यहां मिलने वाले मुआवजे और भूमि अधिग्रहण के मुद्दों को लेकर सरकार से बहस होती रहती है। 

  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा
  • पेयजल
  • सिंचाई
  • कृषि
  • रोजगार
  • ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं का आभाव



पहले चरण में हुआ था 78 प्रतिशत मतदान
पहले चरण में 7 नवंबर को 20 विधानसभा सीटों पर चुनाव संपन्न हुए थे। इसके तहत छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित संभाग बस्तर की 12 सीटें और दुर्ग संभाग के नक्सल प्रभावित जिले राजनांदगांव, कवर्धा और खैरागढ़ की 8 विधानसभा सीटों पर चुनाव हुए थे। पहले चरण में कुल 78 प्रतिशत मतदान हुआ था। बस्तर की सभी 12 सहित कुल 16 सीटों पर पिछले चुनावें की तुलना में इस बार अधिक वोटिंग हुई है। वहीं 2018 की तुलना में 4 सीटों पर कम मतदान हुआ है। इन 4 सीटों में कबीरधाम जिला की दोनों सीट पंडरिया और कवर्धा के साथ खैरागढ़- छुईखदान जिला की खैरागढ़ सीट और राजनांदगांव जिला की खुज्जी सीट शामिल है। बस्तर संभाग की सभी 12 सीटों पर इस बार रिकार्ड तोड़ वोटिंग हुई है।



70 विधानसभा सीटों पर 17 नवंबर को चुनाव 
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 को लेकर दूसरे चरण में 70 विधानसभा सीटों पर 17 नवंबर को चुनाव कराए जाएंगे। इनमें 34 सीटें वीआईपी हैं। पहले चरण में 7 नवंबर को 20 विधानसभा सीटों पर हुए चुनाव में से 10 सीटें वीआईपी थीं। कुल मिलाकर प्रदेश में 44 सीटें हाई प्रोफाइल हैं। इन सीटों पर बीजेपी, कांग्रेस और जेसीसीजे के दिग्गज नेताओं के बीच मुकाबला होगा। भाजपा, कांग्रेस और जेसीसीजे के प्रत्याशी एक दूसरे को कड़ी टक्कर देंगे।

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