सीबीआई ने छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ IAS अधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज किया
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सीबीआई ने छत्तीसगढ़ के एक आईएएस अधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। साथ ही दो और लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। सीबीआई ने बताया कि इन पर निजी व्यक्तियों को लोक सेवक द्वारा लगभग 1.5 करोड़ रुपये के भुगतान का आरोप है, जिसकी जांच सीबीआई को सौपीं गई है।
बताया जा रहा है कि सीबीआई ने 1988 बैच के आईऐएस अधिकारी, उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में रहने वाले भगवान सिंह, हैदराबाद के रहने वाले सैयद बुरहानउद्दीन उर्फ ओपी शर्मा और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
इन लोगों पर आईपीसी की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश की सजा) और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम, 1988 की धारा 8 के मामले में एफआईआर दर्ज की गई है।
एक और चौंकाने वाला मामला इनके खिलाफ सामने आया है। बताया जा रहा है कि रिसीवर पैसे की जगह सोने से भी भुगतान स्वीकार करता था। आईऐएस अधिकारी की पत्नी के भाई ने 2 किलो सोने के भुगतान के लिए एक निजी व्यक्ति से संपर्क किया था, जो हैदराबाद निवासी है।
एजेंसियों ने ये साफ किया है कि जांच के दौरान ग्रेटर नोएडा, हैदराबाद और रायपुर के हवाला डीलर और अन्य आरोपियों के घर से 2 किलो सोना और 20 लाख कैश बरामद किया गया है। हालांकि जांच अभी चल रही है। वहीं इस मामले के तार 2010 के एक केस से जुड़ते दिखाई दे रहे हैं। बता दें कि 2010 में उस समय कार्यरत प्रदेश के स्वास्थ्य सचिव अग्रवाल के खिलाफ भी दो मामले दर्ज किये गए थे।
सीबीआई प्रवक्ता ने बताया कि इन दो मामलों में से एक आरोप पत्र भिलाई मामला एसीबी / सीबीआई जांच में दायर किया गया था जबकि दिल्ली के मामले में सीबीआई की जांच चल रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अग्रवाल ने सीबीआई से उनके मामले में राहत प्राप्त करने के लिए और ग्रेटर नोएडा निवासी भगवान सिंह से संपर्क किया था।
वहीं सूत्रों से ये भी पता चला है कि भगवान को बुरहानुद्दीन के मामलों के बारे में भी अवगत करा दिया गया है। बताया जा रहा है कि भगवान, अग्रवाल और बुरहानुद्दीन के बीच एक बैठक के दौरान मामले में राहत पाने के लिए और सीबीआई के समक्ष ना जाकर राज्य स्तर पर मामला खत्म करने को लिए अधिकारी ने किश्तों में 1.5 करोड़ रुपये के भुगतान पर सहमति जताई थी।
उल्लेखनीय है कि 2010 में आयकर विभाग द्वारा निवास परिसर में छापा मारे जाने का बाद और ईओडब्ल्यू को मामला सौंपे जाने के बाद सरकार ने अग्रवाल को निलंबित कर दिया था। हालांकि, उनके निलंबन बाद में रद्द कर दिया गया था।