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बॉलीवुड सॉन्ग 'बरसात के मौसम में' का छत्तीसगढ़ी वर्जन 'दीवाना दारु के' ने मचाया धमाल, तेजी से हो रहा वायरल

Sat, 29 Jul 2023 10:36 PM IST
ललित कुमार सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर
अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर Published by: ललित कुमार सिंह Updated Sat, 29 Jul 2023 10:36 PM IST
सार

पहली बार छत्तीसगढ़ी में बॉलीवुड की तर्ज पर मंदिरा पर एक एलबम “दीवाना दारू के” बना है। यह सॉन्ग कहीं न कहीं एक्टर नसीरुद्दीन शाह की बॉलीवुड मूवी 'नजायज' के 'सॉन्ग बरसात के मौसम में'...के रिदम से मिलता-जुलता है।

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Bollywood song Barsaat Ke Mausam Mein Chhattisgarhi version 'Deewana Daru Ke' song viral singer anurag vivek
छत्तीसगढ़ी सिंगर विवेक शर्मा, अनुराग शर्मा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

बॉलीवुड में शराब पर जाम छलकाते हुए आपने कई सॉन्ग सुने होंगे। गाए भी होंगे। मदिरा पर बॉलीवुड में अनगिनत गाने बन चुके हैं। शराब के ऊपर अलग-अलग सिंगर, डायरेक्टर्स ने अपने अपने ढंग से गीत को पेश कर चुके हैं। पहली बार छत्तीसगढ़ी में बॉलीवुड की तर्ज पर मंदिरा पर एक एलबम “दीवाना दारू के” बना है। यह सॉन्ग कहीं न कहीं एक्टर नसीरुद्दीन शाह की बॉलीवुड मूवी 'नजायज' के 'सॉन्ग बरसात के मौसम में'...के रिदम से मिलता-जुलता है। कुछ उसी अंदाज में इस गाने का फिल्मांकन भी किया गया है। छत्तीसगढ़ी में उसका वर्जन भी कहा जा सकता है। यह सॉन्ग रिलीज होते ही यू-ट्यूब, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर धूम मचा रहा है। इस गीत को एआरएस स्टूडियोज के ऑफिशियल यू-ट्यूब चैनल पर देखा जा सकता है। 

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इस छत्तीसगढ़ी सॉन्ग की खासियत ये है कि शराब पर कुछ नई बात, नए ढंग से कहने की कोशिश की गई है। इस गीत को अपनी सुमधुर आवाज से सजाया है छत्तीसगढ़ के दो बड़े मशहूर सिंगर अनुराग शर्मा और विवेक शर्मा गुरुजी ने। ये दोनों सितारे किसी परिचय के मोहताज नहीं  है, जहां अनुराग शर्मा छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री में सात से अधिक बार बेस्ट सिंगर का खिताब अपने नाम कर चुके हैं। वहीं विवेक शर्मा सूफी गायन छत्तीसगढ़ी संगीत में छाए हुए हैं। 
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'सिर्फ अंतरा पब्लिश करना चाह रहे थे और बन गई पूरी गीत'
 इस गीत के बोल युवा गीतकार भरत द्विवेदी ने लिखे हैं। भरत ने बताया कि पहले वो इस गीत का सिर्फ एक अंतरा पब्लिश करना चाह रहे थे।  और इस उद्देश्य से अनुराग शर्मा से मिले पर अनुराग ने कहा कि कंटेंट और मैसेज बहुत ही शानदार है। यह गीत समाज में जाना चाहिए। इस गीत को पूरा लिखो। इसे वे खुद प्रोड्यूस करेंगे। साथ में बैठे विवेक शर्मा ने भी इस गीत को संगीतबद्ध करने का वादा किया। 

हरिवंश राय बच्चन की मधुशाला से प्रेरित है ये गीत
गीतकार भरत ने बताया कि जब उन्होंने हरिवंश राय बच्चन जी की काव्य “मधुशाला” पढ़ी तब, उन्हें लगा कि समाज की कितनी बातें बच्चन जी ने अपने काव्य में व्यंग्यात्मक शैली में बड़े सरल तरीके से कही है। मधुशाला पढ़ने के बाद ये विचार मन में था कि इस संदेश को अपनी छत्तीसगढ़ी भाषा में मनोरंजन के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए। लोग कैसे लोग नशे के दल-दल में समाते चले जाते हैं। चाहकर भी नहीं निकल पाते हैं। कैसे -कैसे उनके जीवन में बदलाव आता है। उनकी जीवन में कैसे-उतार चढ़ाव आते हैं। एक हंसती खेलती जिंदगी कैसे नशे के चक्कर में तबाह हो जाती है। नशे पर कुठाराघात करती ये गीत कुछ इसी अंदाज में श्रोताओं के सामने परोसा गया है। उम्मीद है समाज को सही दिशा देने में कामयाब होगी। 

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