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CG: 'गवाह की गवाही सुसंगत और विश्वसनीय है...', बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में की टिप्पणी
Fri, 21 Mar 2025 10:59 PM IST
श्याम जी.
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
Published by: श्याम जी.
Updated Fri, 21 Mar 2025 10:59 PM IST
सार
बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि गवाह की गवाही सुसंगत और विश्वसनीय है तो उसे केवल पीड़ित से रिश्तेदारी या संबंध के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता।
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बिलासपुर हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि प्रकरण के गवाह की गवाही सुसंगत और विश्वसनीय है तो उसे केवल पीड़ित से रिश्तेदारी या संबंध के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने बेमेतरा जिले के गांव रनबोद में हुए तिहरे हत्याकांड में दोषी ठहराए गए चार अभियुक्तों की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा।
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प्रकरण 29 जनवरी 2020 को भूमि विवाद के कारण हुए एक निर्मम हत्याकांड से जुड़ा है। अभियुक्त केजूराम साहू (72), जोहान साहू (35), मोहन साहू (37) और विशाल साहू (36) को तीन पारिवारिक सदस्यों संतु साहू, निर्मला साहू और खुबन साहू की हत्या के लिए दोषी ठहराया गया था। सत्र न्यायालय, बेमेतरा ने 24 फरवरी 2024 को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 सहपठित धारा 34 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके अलावा, धारा 307 के तहत कोमल साहू की हत्या के प्रयास के लिए उन्हें 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा भी दी गई थी।
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हाईकोर्ट में यह तर्क देते हुए चुनौती दी कि प्रकरण के मुख्य गवाह मृतकों के परिजन थे, इसलिए उनकी गवाही पक्षपाती थी। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि हत्या का कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं था। बचाव पक्ष का तर्क था कि अभियोजन पक्ष के प्रमुख गवाह कुंती बाई, भूनश्वरी साहू और कोमल साहू सभी पीड़ितों के परिजन थे, अतः उनकी गवाही को विश्वसनीय नहीं मानना चाहिए। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि यह हत्या अचानक झगड़े का परिणाम थी, और इसे आईपीसी की धारा 300 के अपवाद 4 के तहत हत्या न मानते हुए ‘गैर-इरादतन हत्या’ की श्रेणी में रखा जाना चाहिए।
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राज्य की ओर से तर्क दिया गया कि अभियुक्तों ने कुल्हाड़ी और डंडों जैसे हथियारों से जानबूझकर हमला किया। इससे यह स्पष्ट होता है कि हत्या पूर्व नियोजित थी। उन्होंने यह भी बताया कि सीसीटीवी फुटेज, फोरेंसिक साक्ष्य और स्वतंत्र गवाहों की गवाही अभियोजन पक्ष के बयान का समर्थन करती है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा, जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने मामले के सभी साक्ष्यों की गहन समीक्षा की।
कोर्ट ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डॉक्टर की गवाही के आधार पर भी हत्या का निष्कर्ष निकाला। कोर्ट ने टिप्पणी की, 'यदि कोई ‘संबंधित’ गवाह अपराध स्थल पर स्वाभाविक रूप से उपस्थित था, तो केवल पीड़ित से उसके संबंध के आधार पर उसकी गवाही को अस्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत को उसकी गवाही की विश्वसनीयता, सुसंगतता और तार्किकता का मूल्यांकन करना चाहिए, न कि उसे अविश्वसनीय मान लेना चाहिए।'