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बिलासपुर: तलाक के बाद पुराने नाम से डिग्री पाने का अधिकार, हाईकोर्ट ने कॉलेज को दिया छह सप्ताह का समय

Fri, 30 Oct 2026 09:24 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिलासपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिलासपुर Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 30 Oct 2026 09:24 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने तलाक के बाद शैक्षणिक दस्तावेजों में मूल नाम दोबारा दर्ज कराने की मांग पर अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने बिलासा कन्या महाविद्यालय को आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर छह सप्ताह के भीतर संशोधित डिग्रियां जारी करने का निर्देश दिया है।

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Significant High Court ruling: In the event of a divorce, one’s original name can be restored; the right to co
हाईकोर्ट का अहम आदेश - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने तलाक के बाद शैक्षणिक दस्तावेजों में अपना मूल नाम दोबारा दर्ज कराने की मांग को लेकर अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि वैवाहिक स्थिति बदलने के बाद कोई महिला अपने शैक्षणिक दस्तावेजों में मूल नाम दर्ज कराना चाहती है, तो शैक्षणिक संस्थान केवल नियमों का हवाला देकर उसका आवेदन खारिज नहीं कर सकते। जस्टिस एके प्रसाद की एकल पीठ ने बिलासपुर के शासकीय बिलासा कन्या महाविद्यालय के उस फैसले को निरस्त कर दिया, जिसमें छात्रा के नाम में संशोधन की मांग ठुकरा दी गई थी।
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शादी के बाद बदला नाम, तलाक के बाद फिर पुराने नाम की मांग
यह मामला बिलासपुर निवासी सुरभि यादव से जुड़ा है। उन्होंने स्कूली शिक्षा अपने मूल नाम सुरभि यादव से पूरी की थी। वर्ष 2012 में राजिक अहमद अंसारी से विवाह के बाद उनका नाम बदलकर सुहाना अंसारी हो गया। इसके बाद उन्होंने शासकीय बिलासा कन्या महाविद्यालय से बीएससी, एमएससी और अन्य डिप्लोमा की पढ़ाई इसी नाम से पूरी की। उनकी शैक्षणिक डिग्रियां भी सुहाना अंसारी के नाम से जारी हुईं।
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वर्ष 2022 में फैमिली कोर्ट ने उनकी शादी को कानूनी रूप से निरस्त कर दिया। इसके बाद सुरभि ने आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र और जाति प्रमाण पत्र सहित अन्य सरकारी दस्तावेजों में अपना मूल नाम दोबारा दर्ज करा लिया। हालांकि, कॉलेज की डिग्रियों में नाम बदलवाने के लिए उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा।
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सरकारी नौकरी के आवेदन में आ रही थी परेशानी
शैक्षणिक दस्तावेजों और अन्य सरकारी पहचान पत्रों में अलग-अलग नाम होने के कारण सुरभि को सरकारी नौकरियों के आवेदन भरने में दिक्कत हो रही थी। कई जगह उनकी उम्मीदवारी भी प्रभावित होने की आशंका थी। उन्होंने कॉलेज प्रबंधन और विश्वविद्यालय से डिग्रियों में मूल नाम दर्ज करने की मांग की, लेकिन आवेदन खारिज कर दिया गया। बताया गया कि हाईकोर्ट की एकल पीठ के पहले हस्तक्षेप के बाद भी कॉलेज की शासी निकाय ने नाम संशोधन का आवेदन निरस्त कर दिया था। इसके बाद सुरभि को दोबारा हाईकोर्ट का रुख करना पड़ा।

हाईकोर्ट ने कहा- केवल नियमों का हवाला देकर आवेदन खारिज करना गलत
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस एके प्रसाद की एकल पीठ ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी अपने रिकॉर्ड की प्रमाणिकता बनाए रखना है, लेकिन किसी व्यक्ति की कानूनी स्थिति में बदलाव होने पर रिकॉर्ड में संशोधन की गुंजाइश भी होनी चाहिए। केवल इस आधार पर आवेदन खारिज नहीं किया जा सकता कि परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद नाम संशोधन के लिए स्पष्ट नियम उपलब्ध नहीं हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नाम में बदलाव से छात्रा की शैक्षणिक योग्यता, श्रेणी, अंक या पढ़ाई के वर्ष पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है।


6 सप्ताह में जारी करनी होंगी संशोधित डिग्रियां
हाईकोर्ट ने बिलासा कन्या महाविद्यालय प्रबंधन को निर्देश दिया है कि आवश्यक शपथ पत्र, निर्धारित शुल्क और राजपत्र प्रकाशन जैसी औपचारिकताएं पूरी कराकर सुरभि यादव के मूल नाम से संशोधित डिग्रियां जारी की जाएं। अटल विश्वविद्यालय को भी इस प्रक्रिया में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने पूरी कार्रवाई आदेश की प्रति प्राप्त होने के छह सप्ताह के भीतर पूरी करने की समयसीमा तय की है।
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