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Chhattisgarh: बिलासपुर उपभोक्ता आयोग का LIC को बड़ा झटका, मृतक के परिजनों को भुगतान का आदेश
Sat, 16 May 2026 05:17 PM IST
अनुज कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
Published by: अनुज कुमार
Updated Sat, 16 May 2026 05:17 PM IST
सार
बिलासपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एलआईसी को मृत बीमाधारक के परिजनों को बीमा राशि और अन्य लाभ देने का आदेश दिए है, इसे सेवा में कमी माना गया।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
विस्तार
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को एक मृत बीमाधारक के परिजनों को बीमा राशि और अन्य लाभ देने का निर्देश दिया है।
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आयोग ने एलआईसी द्वारा दावा निरस्त करने को सेवा में कमी माना है। एलआईसी को 45 दिनों के भीतर कुल छह लाख रुपये की बीमा राशि, ब्याज और क्षतिपूर्ति का भुगतान करने को कहा गया है।
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यह मामला बिलासपुर जिले के रतनपुर थाना क्षेत्र के मदनपुर निवासी दिवंगत संत कुमार वैष्णव से जुड़ा है। उनके भाई प्रदीप कुमार वैष्णव ने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। संत कुमार वैष्णव ने एलआईसी की जीवन लक्ष्य पॉलिसी ली थी।
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इस पॉलिसी में तीन लाख रुपये का मूल बीमा कवर था। इसमें दुर्घटना मृत्यु एवं विकलांगता लाभ (ADDB Rider) और अन्य राइडर भी शामिल थे। 27 जनवरी 2025 को संत कुमार वैष्णव की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी।
मृत्यु के बाद, परिजनों ने बीमा दावा प्रस्तुत किया। हालांकि, एलआईसी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि दिसंबर 2024 की तिमाही प्रीमियम राशि समय पर जमा नहीं की गई थी। एलआईसी का तर्क था कि ग्रेस पीरियड समाप्त होने के कारण पॉलिसी लैप्स हो चुकी थी। इस कारण बीमाधारक के परिवार को बीमा लाभ से वंचित कर दिया गया था। यह एलआईसी के दावा निरस्त करने का आधार था।
मामले की सुनवाई के दौरान, आयोग ने पॉलिसी की शर्तों, ग्रेस पीरियड और संबंधित कानूनों का परीक्षण किया। आयोग ने पाया कि 30 दिनों का ग्रेस पीरियड प्रीमियम देय तिथि के अगले दिन से गिना जाता है। इस आधार पर, 27 जनवरी 2025 की रात तक पॉलिसी प्रभावी थी और बीमाधारक की मृत्यु ग्रेस पीरियड के दौरान हुई थी।
इसलिए, आयोग ने बीमा दावा को वैध माना और एलआईसी के दावे को सेवा में कमी बताया। आयोग ने एलआईसी को मूल बीमा राशि तीन लाख रुपये, ADDB Rider के तीन लाख रुपये और अन्य राइडर लाभ की राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है।
इसके अलावा, दावा प्रस्तुत करने की तारीख 17 नवंबर 2025 से भुगतान तक नौ फीसदी वार्षिक ब्याज भी देना होगा। आयोग ने मानसिक एवं शारीरिक कष्ट के लिए 25 हजार रुपये और वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये देने के निर्देश भी दिए हैं।