{"_id":"68cd766bbb3dc46f5f09b2c8","slug":"chhattisgarh-hc-mpsrtc-bill-assistant-acquitted-due-to-lack-of-evidence-2025-09-19","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"39 साल में मिटा 100 रुपये की रिश्वत का दाग: सबूतों की कमी से MPSRTC कर्मी बरी, छत्तीगसगढ़ कोर्ट में दावा खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
39 साल में मिटा 100 रुपये की रिश्वत का दाग: सबूतों की कमी से MPSRTC कर्मी बरी, छत्तीगसगढ़ कोर्ट में दावा खारिज
Fri, 19 Sep 2025 08:58 PM IST
अनुज कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
Published by: अनुज कुमार
Updated Fri, 19 Sep 2025 08:58 PM IST
सार
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 1986 के भ्रष्टाचार मामले में बिल असिस्टेंट को बरी कर दिया है। 100 रुपये रिश्वत मांगने और स्वीकारने के आरोप में पुख्ता सबूत नहीं मिले और गवाहों के बयानों में विरोधाभास पाया गया।
विज्ञापन
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
- फोटो : highcourt.cg.gov.in
विस्तार
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 1986 के एक पुराने भ्रष्टाचार मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए एमपीएसआरटीसी के बिल असिस्टेंट रहे जागेश्वर प्रसाद अवस्थी को बरी कर दिया। ट्रायल कोर्ट ने 2004 में उन्हें एक साल की सजा और जुर्माने की सजा सुनाई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने सबूतों की कमी के चलते यह आदेश रद्द कर दिया।
विज्ञापन
दरअसल, आरोप था कि अवस्थी ने निगम के कर्मचारी अशोक कुमार वर्मा से बकाया वेतन का बिल पास करने के लिए 100 रुपए रिश्वत मांगी थी। इस शिकायत पर लोकायुक्त ने जाल बिछाया और उन्हें रंगे हाथ पकड़े जाने का दावा किया गया। ट्रायल कोर्ट ने इसी आधार पर दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने पूरे केस की सुनवाई के बाद पाया कि रिश्वत की मांग और स्वीकृति को लेकर पुख्ता सबूत मौजूद नहीं हैं। गवाहों के बयानों में विरोधाभास पाया गया। एक जगह 100 रुपए के एक नोट की बात आई तो दूसरी जगह दो पचास-पचास के नोट का जिक्र था। इसके अलावा ट्रैप टीम भी दूरी पर खड़ी थी और उन्होंने पूरी बातचीत या लेन-देन को सीधे तौर पर नहीं देखा।
विज्ञापन
अदालत ने आदेश में कहा कि केवल नोटों की बरामदगी से ही भ्रष्टाचार का अपराध साबित नहीं होता। जब तक मांग और स्वीकारोक्ति के पुख्ता सबूत न हों, तब तक दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने अवस्थी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। कोर्ट ने साफ किया कि सबूतों की कमी के कारण ट्रायल कोर्ट का फैसला टिक नहीं सकता।