50 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण: 14 माओवादियों पर था 68 लाख रुपये का इनाम, गृह मंत्री शाह ने कही ये बात
गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि बहुत हर्ष का विषय है कि बीजापुर (छत्तीसगढ़) में 50 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया। हिंसा और हथियार छोड़कर विकास की मुख्यधारा में शामिल होने वालों का मैं स्वागत करता हूँ।
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गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि बहुत हर्ष का विषय है कि बीजापुर (छत्तीसगढ़) में 50 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया। हिंसा और हथियार छोड़कर विकास की मुख्यधारा में शामिल होने वालों का मैं स्वागत करता हूँ। आगे कहा कि पीएम मोदी की नीति स्पष्ट है कि जो भी नक्सली हथियार छोड़कर विकास का मार्ग अपनाएँगे, उनका पुनर्वास कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा। बाकी लोगों से भी मैं पुनः अपील करता हूँ कि वे हथियार त्याग कर मुख्यधारा में आएँ। 31 मार्च 2026 के बाद देश में नक्सलवाद केवल इतिहास बनकर रह जाएगा, यह हमारा संकल्प है।
दरअसल बीजापुर जिले में रविवार को 50 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया, जिनमें से 14 पर कुल 68 लाख रुपये का इनाम था। एक अधिकारी ने बताया कि उन्होंने राज्य पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने हथियार डाल दिए।
बीजापुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि उन्होंने माओवादी विचारधारा की खोखली और अमानवीयता, प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं द्वारा आदिवासियों के शोषण और आंदोलन के भीतर पनप रहे मतभेदों का हवाला देते हुए आत्मसमर्पण किया। वे सुरक्षा बलों द्वारा शिविर लगाने और 'निया नेल्लनार' (आपका अच्छा गांव) योजना से भी प्रभावित हैं, जिसके तहत बल और प्रशासन दूरदराज के इलाकों में बुनियादी सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं।
कुल 68 लाख रुपये का था इनाम
आत्मसमर्पण करने वाले 50 लोगों में से छह पर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम है, तीन पर पांच-पांच लाख रुपये का इनाम है। पांच पर एक-एक लाख रुपये का इनाम है। जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी), बस्तर फाइटर्स, स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ), सीआरपीएफ और इसकी विशिष्ट इकाई कोबरा (कमांडो बटालियन फॉर रेसोल्यूट एक्शन) ने उनके आत्मसमर्पण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सीएम साय ने सुरक्षाबलों को दी बधाई
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बीजापुर जिले में एक साथ 50 नक्सलियों के आत्मसमर्पण पर सुरक्षाबलों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की नई आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति– 2025 के सकारात्मक परिणाम अब ज़मीन पर स्पष्ट दिखने लगे हैं।
सीएम विष्णुदेव साय ने कहा कि नक्सलवाद के कुचक्र में फंसे लोग अब बंदूक छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं, यह परिवर्तन स्वागतयोग्य है। हमारी सरकार हर उस व्यक्ति के पुनरुत्थान के लिए तत्पर है, जो लाल आतंक छोड़ शांति का रास्ता चुनता है। मुख्यमंत्री साय ने यह भी दोहराया कि यह सफलता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2026 तक वामपंथी उग्रवाद के समूल उन्मूलन के संकल्प का ही परिणाम है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नियद नेल्ला नार योजना के तहत सुदूर अंचलों में सड़कों का निर्माण, स्कूलों और अस्पतालों की स्थापना ने बस्तर क्षेत्र में सरकार के प्रति विश्वास और उम्मीद की लौ जगाई है।मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह केवल आत्मसमर्पण नहीं, यह भरोसे की वापसी है। जो कल भय का प्रतीक थे, वे आज भविष्य की उम्मीद बन रहे हैं। छत्तीसगढ़ अब शांति, विकास और नवचेतना के पथ पर आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संकल्प के अनुरूप मार्च 2026 तक वामपंथी उग्रवाद का खात्मा तय है। इसके तहत डबल इंजन की सरकार में प्रदेश में अब तक 2200 से ज्यादा नक्सलियों की गिरफ्तारी हुई है और आत्मसमर्पण किया है, साथ ही अब तक 350 से अधिक नक्सली मारे जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर संभाग के सुदूर अंचलों में हमारी सरकार द्वारा लगातार नए सुरक्षा कैंप स्थापित करने, नियद नेल्ला नार योजना से सड़क निर्माण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से लोगों का सरकार के प्रति विश्वास बढ़ा है। हमारी सरकार, लाल आतंक का दामन छोड़ शांति के रास्ते पर लौटने वाले इन लोगों के पुनरुत्थान के लिए तत्पर है।