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मांझी से कम नहीं है भिलाई का ट्री मैन, खुद ही पढ़ें कारनामा

Wed, 26 Aug 2015 04:47 PM IST
Updated Wed, 26 Aug 2015 04:47 PM IST
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Bhilai's Tree Man not less than mountain dasrath manjhi

पहाड़ का सीना चीर कर रास्ता बना देने वाले दशरथ मांझी की तरह ही दुर्ग के रहने वाले गेंदालाल देशमुख का कारनामा हर किसे के लिए प्रेरणा का सबब बन सकता है।

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दुर्ग तहसील के कोडिया गांव निवासी 82 साल के गेंदालाल देशमुख को उनके जज्बे और विलक्षण काम के लिए लोग ट्री मैन के नाम से जानते हैं। अपने हाथों से क्षेत्र में हजारों पेड़ लगाने वाले गेंदलाल जिदंगी के छह दशक इसी काम में लगा चुके हैं।
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टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार देशमुख इस बारे में बात करने पर कहते हैं मूले ब्रह्मा, त्वचा विष्णु, शाखा रुद्रा माहेश्वरा; पत्ती पत्ती देव नाम नमस्तुते नमस्तुते। अपनी उम्र्र के तीन चौथाई साल पेडों की सेवा में लगा देने वाले देशमुख यहां के क्षेत्रीय कुर्मी समाज से आते हैं।
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अपने परिवार के साथ एक छोटी सी झोपड़ी में रहने वाले गेंदलाल ने पर्यावरण प्रेमियों के सामने नायाब उदाहरण पेश किया है।

सड़कों के किनारों पर लगाए फलदार वृक्ष

Bhilai's Tree Man not less than mountain dasrath manjhi

बताते हैं कि जिदंगी के 62 साल गेंदलाल ने हजारों छायादार जिनमें फलों के भी काफी पेड़ को लगाने में खपा दिए। गेंदलाल ने अपने अथक परिश्रम से अकेले दम लगभग पांच एकड के बंजर मैदान को बियाबान जंगल में तब्दील कर दिया।

गेंदलाल ने कोडिया से भानपुरी जाने वाले 9 किलोमीटर लंबे रास्ते पर 350 से ज्यादा पेड़ जो अब शानदार छाया देते हैं खुद ही लगाए थे। हाल फिलहाल वे भानपुरी से अंदा गांव जाने वाले 6 किलोमीटर लंबे मार्ग पर अकेले ही वृक्षारोपण का बीड़ा उठाए हुए हैं।

आलम ये है कि उस पूरे क्षेत्र में जो अब ज्यादातर छायादार पेड़ दिखाई देते हैं उनमें से अधिकतर गेंदालाल के ही लगाए हुए होते हैं। इसके साथ गेंदलाल पिछले 20 सालों से औषधीय पौधों का उपयोग करके घायल और बीमार लोगों का पारंपरिक इलाज करने का काम भी करते हैं।

प्राइमरी स्कूल के बाद ही शिक्षा छोड़ देने वाले गेंदलाल देशमुख बढ़ने और बचाने के लिए पारंपरिक बुनियादी पद्धति का उपयोग करते हैं।

दस साल की उम्र में छोड़ी पढ़ाई लगाए पेड़

Bhilai's Tree Man not less than mountain dasrath manjhi

अपने जुनून के बारे में देशमुख ने बताया कि हमारे क्षेत्र में लगातार बारिश के कारण अक्सर जलभराव की स्थिति रहती थी जिसका इलाज ये था कि यहां ज्यादा से ज्यादा पौधे लगा दिए जाएं जिससे पेडों की जड़ें पानी को सौखती रहें।

देशमुख के इस जुनून की शुरूआत उस समय हुई थी जब मात्र दस साल की उम्र में उन्हें कक्षा चार के बाद पढ़ाई छोड़ने को मजबूर होना पड़ा था।

वो बताते हैं कि खेती से अलग मैंने शुरूआत में नीम, शिवा बाबुर, आम और पीपल के पेड़ अपने घर के आसपास लगाए थे। ये पेड़ जैसे जैसे बड़े होते रहे वो मुझे पैसे कमाने से ज्यादा तसल्ली देते थे।

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