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CG: बेल्जियम के पर्यटक हुए जनजातीय संस्कृति से प्रभावित, धनकुल एथनिक रिजॉर्ट में देखा परंपरा का अनोखा संगम
Sat, 08 Nov 2025 04:12 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Sat, 08 Nov 2025 04:12 PM IST
सार
बेल्जियम से आए पर्यटकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कोंडागांव जिले स्थित धनकुल एथनिक रिजॉर्ट का दौरा किया, जहां उन्होंने बस्तर की जनजातीय जीवनशैली, कला और परंपराओं को करीब से देखा।
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बेल्जियम के पर्यटक हुए जनजातीय संस्कृति से प्रभावित
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की जीवंत संस्कृति और परंपराओं ने विदेशी मेहमानों का दिल जीत लिया। बेल्जियम से आए पर्यटकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कोंडागांव जिले स्थित धनकुल एथनिक रिजॉर्ट का दौरा किया, जहां उन्होंने बस्तर की जनजातीय जीवनशैली, कला और परंपराओं को करीब से देखा।
रिजॉर्ट पहुंचने पर अतिथियों का पारंपरिक तरीके से गुड़हल के फूलों की चाय से स्वागत किया गया। इसके बाद उन्होंने ट्राइबल म्यूजियम का अवलोकन किया और वहां प्रदर्शित जनजातीय जीवन से जुड़े हस्तशिल्प, वस्त्र, उपकरण और कलाकृतियों को बड़ी रुचि से देखा।
प्रकृति और संस्कृति का अद्भुत संगम
पर्यटकों ने कहा कि बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा मेल देखकर वे अभिभूत हैं। उन्होंने कहा कि यह अनुभव हमारे जीवन का अविस्मरणीय हिस्सा रहेगा। दुनिया में बहुत कम जगहें हैं, जहां आधुनिकता और परंपरा इतनी सामंजस्यपूर्ण तरीके से साथ दिखाई देती हैं। बेल्जियम से आए इन पर्यटकों ने यह भी कहा कि वे आने वाले समय में बस्तर क्षेत्र को और गहराई से एक्सप्लोर करना चाहेंगे और दोबारा यहां लौटने की इच्छा रखते हैं।
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छत्तीसगढ़ की मेहमाननवाजी की तारीफ
विदेशी मेहमानों ने राज्य सरकार, पर्यटन विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से किए गए स्वागत और प्रबंध की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि बस्तर न केवल अपनी सुंदरता से बल्कि अपनी आत्मा और संस्कृति से भी पर्यटकों को जोड़ता है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की मेहमाननवाजी को गर्मजोशी और आत्मीयता से भरपूर अनुभव बताया और कहा कि धनकुल एथनिक रिजॉर्ट जैसी पहलें भारत की सांस्कृतिक विविधता को वैश्विक मंच पर और अधिक पहचान दिला रही हैं।
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रिजॉर्ट पहुंचने पर अतिथियों का पारंपरिक तरीके से गुड़हल के फूलों की चाय से स्वागत किया गया। इसके बाद उन्होंने ट्राइबल म्यूजियम का अवलोकन किया और वहां प्रदर्शित जनजातीय जीवन से जुड़े हस्तशिल्प, वस्त्र, उपकरण और कलाकृतियों को बड़ी रुचि से देखा।
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प्रकृति और संस्कृति का अद्भुत संगम
पर्यटकों ने कहा कि बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा मेल देखकर वे अभिभूत हैं। उन्होंने कहा कि यह अनुभव हमारे जीवन का अविस्मरणीय हिस्सा रहेगा। दुनिया में बहुत कम जगहें हैं, जहां आधुनिकता और परंपरा इतनी सामंजस्यपूर्ण तरीके से साथ दिखाई देती हैं। बेल्जियम से आए इन पर्यटकों ने यह भी कहा कि वे आने वाले समय में बस्तर क्षेत्र को और गहराई से एक्सप्लोर करना चाहेंगे और दोबारा यहां लौटने की इच्छा रखते हैं।
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छत्तीसगढ़ की मेहमाननवाजी की तारीफ
विदेशी मेहमानों ने राज्य सरकार, पर्यटन विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से किए गए स्वागत और प्रबंध की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि बस्तर न केवल अपनी सुंदरता से बल्कि अपनी आत्मा और संस्कृति से भी पर्यटकों को जोड़ता है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की मेहमाननवाजी को गर्मजोशी और आत्मीयता से भरपूर अनुभव बताया और कहा कि धनकुल एथनिक रिजॉर्ट जैसी पहलें भारत की सांस्कृतिक विविधता को वैश्विक मंच पर और अधिक पहचान दिला रही हैं।