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सैलानियों को लुभा रहा बारनवापारा: म्यूजियम, लाइब्रेरी और लग्जरी फैमिली कॉटेज खूबसूरती में लगाएंगे चार चांद

Mon, 05 Jun 2023 04:09 PM IST
ललित कुमार सिंह अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: ललित कुमार सिंह Updated Mon, 05 Jun 2023 04:09 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ प्रदेश के बलौदाबाजार जिले के वन्यजीव अभ्यारण्य बारनवापारा में सैलानियों की संख्या में लगातार बढ़ रही है। इससे बारनवापारा में सैलानियों के लिए शासन-प्रशासन की ओर से कई सुविधाएं विकसित की जा रही है।

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Barnavapara attracting tourists: add will  Museum, library and luxury family cottage
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

छत्तीसगढ़ प्रदेश के बलौदाबाजार जिले के वन्यजीव अभ्यारण्य बारनवापारा में सैलानियों की संख्या में लगातार बढ़ रही है। इससे बारनवापारा में सैलानियों के लिए शासन-प्रशासन की ओर से कई सुविधाएं विकसित की जा रही है। यहां म्यूजियम, लायब्रेरी और लग्जरी फैमिली कॉटेज बनाया जा रहा है। यहां बने तीन पुराने कॉटेज को रेनोवेट कर वर्ल्ड क्लास फैमिली कॉटेज बनाया जा रहा है। प्रत्येक कॉटेज में दो रुम, किचन, दो हेल्पर की रुकने की व्यवस्था है। वहीं दो बनकर तैयार हैं। तीसरे का काम जारी है। 
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म्यूजियम में बलौदाबाजार में मिलने वाले विभिन्न स्टोन, पशु-पक्षियों का जीवंत चित्रण और जानकारी उपलब्ध है। जो आने वाले बच्चों और सैलानियों के लिए आकर्षक और ज्ञानवर्धक भी है। मुख्य चौक में नए पर्यटक सुविधा केंद्र बनाया जा रहा है। यहां आने वाले पर्यटकों को जानकारियां मिलेंगी। यहां बन रहे  लायब्रेरी में सभी वर्ग और समूह के पाठकों के लिए पर्याप्त किताबे उपलब्ध होंगी। बलौदाबाजार जिले के कलेक्टर चंदन कुमार ने बारनवापारा पहुंचकर चल रहे कार्यों का जायजा लिया और समय सीमा में काम पूरा करने के निर्देश दिए। 
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दो वन्य गांव से मिलकर बना बारनवापारा
बारनवापारा को साल 1972 में वन्यजीव अभ्यारण्य घोषित किया गया। ये वन्यजीव अभ्यारण 245 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। बार और नवापारा गांव के नाम से मिलकर बारनवापारा बना है। वन्यजीव प्रेमियों और एडवेंचर के शौकिन लोगो के लिए यह सफारी बहुत ही मनमोहक है। हिंसक जानवरों से लेकर खरगोश तक देखने को मिलते हैं। बता दें कि विदेश से आने वाले पक्षियों का कुछ समय के लिए बसेरा भी रहता है। यहां ऊंचे-ऊंचे पेड़ से लेकर दो नदियां बालमदेही और जोंक नदियों का कल-कल भी सुनाई देगा। यह अभ्यारण्य मैदानी और छोटे-बड़े पठारी इलाकों से मिलकर बना है।  
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सभी प्रकार के वन्यजीव
इस अभ्यारण में तेंदुए, बाघ, गौर, भालू, चीतल, सांभर, नीलगाय, जंगली सुअर, कोटरी चौसिंगा, जंगली कुत्ता, लकड़बग्गा, लोमड़ी आदि देखने को मिलते हैं। यहां कोबरा, करैत, अजगर जैसे सर्पों की प्रजातियां भी हैं। यहां 150 से भी अधिक प्रजातियों के पक्षी हैं, जिनमें प्रवासी पक्षी भी शामिल हैं। प्रमुख पक्षियों में मोर, दूधराज, तोते, गोल्डन, अरियल, ड्रेंगो, रॉबिन, पाई, कठफोड़वा, बुलबुल, हुदहुद, बाझ, उल्लू शामिल हैं। 
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