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Balod: शारदीय नवरात्र पर गंगा मैया मंदिर में भक्तों का तांता, दर्शन के लिए देश-विदेश से आते हैं मां के भक्त

Tue, 17 Oct 2023 04:15 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बालोद
अमर उजाला नेटवर्क, बालोद Published by: Digvijay Singh Updated Tue, 17 Oct 2023 04:15 PM IST
सार

यहां आस-पास के साथ ही विदेशों से भी भक्त आते हैं। पूरे छत्तीसगढ़ के लिए यह मां शक्ति की उपासना का प्रमुख केन्द्र है। मां गंगा मईया की कहानी अंग्रेजी शासन काल के समय से जुड़ी हुई है और मां की मूर्ति एक तालाब से निकली थी। 

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Shardiya Navratri there is an influx of devotees in Ganga Maiya temple
मां गंगा मइया पवन धाम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बालोद जिले के ग्राम झलमला स्थित मां गंगा मैया मंदिर में शारदीय नवरात्रि का पर्व बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस नवरात्रि 901 आस्था के ज्योत मां गंगा मईया मंदिर में प्रज्वलित किए गए हैं। यहां आस-पास के साथ ही विदेशों से भी भक्त आते हैं। पूरे छत्तीसगढ़ के लिए यह मां शक्ति की उपासना का प्रमुख केन्द्र है। मां गंगा मईया की कहानी अंग्रेजी शासन काल के समय से जुड़ी हुई है और मां की मूर्ति एक तालाब से निकली थी जिसे बांधा तालाब कहा जाता है। इस वर्ष रियायती दर पर पूड़ी सब्जी की महाप्रसादी सेवा दी जा रही है। 

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134 साल पुरानी है झलमला में नहर किनारे अवतरण की कथा

लगभग 134 साल पहले जिले की जीवन दायिनी तांदुला नदी पर नहर का निर्माण चल रहा था। उस दौरान झलमला की आबादी मात्र 100 थी। सोमवार को वहां बड़ा साप्ताहिक बाजार लगता था। बाजार में दूर-दराज से पशुओं के झुंड के साथ बंजारे आया करते थे। उस दौरान पशुओं की संख्या अधिक होने के कारण पानी की कमी महसूस की जाती थी। पानी की कमी को दूर करने के लिए बांधा तालाब की खुदाई कराई गई। गंगा मैय्या के प्रादुर्भाव की कहानी इसी तालाब से शुरू होती है।

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बार-बार जाल में फंसती रही मूर्ति

मंदिर के व्यवस्थापक सोहन लाल टावरी ने बताया कि एक दिन ग्राम सिवनी का एक केवट मछली पकडऩे के लिए इस तालाब में गया। जाल में मछली की जगह एक पत्थर की प्रतिमा फंस गई। केंवट ने अज्ञानतावश उसे साधारण पत्थर समझ कर फिर से तालाब में डाल दिया। इस प्रक्रिया के कई बार पुनरावृत्ति से परेशान होकर केवट जाल लेकर अपने घर चला गया।

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स्वप्न के बाद प्रतिमा को निकाला बाहर

देवी ने गांव के गोंड़ जाति के बैगा को स्वप्न में आकर कहा कि मैं जल के अंदर पड़ी हूं। मुझे जल से निकालकर मेरी प्राण-प्रतिष्ठा करवाओ। स्वप्न की सत्यता को जानने के लिए तत्कालीन मालगुजार छवि प्रसाद तिवारी, केवट और गांव के अन्य प्रमुखों को साथ लेकर बैगा तालाब पहुंचा। केंवट द्वारा जाल फेंके जाने पर वही प्रतिमा फिर जाल में फंस गई। फिर प्रतिमा को बाहर निकाला गया, उसके बाद देवी के आदेशानुसार छवि प्रसाद ने अपने संरक्षण में प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा करवाई। जल से प्रतिमा निकली होने के कारण गंगा मैय्या के नाम से विख्यात हुई।


अंग्रेजों ने प्रतिमा को हटाने का बहुत प्रयास किया

बताया जाता है कि तांदुला नहर निर्माण के दौरान गंगा मैया की प्रतिमा को वहां से हटाने बहुत प्रयास किए। ऐसी मान्यता है कि इसके बाद अंग्रेज एडम स्मिथ सहित और अन्य अंग्रेज साथियों की मौत हो गई थी।


विदेशों में भी देवी के भक्त

ग्रामीण पालक ठाकुर ने बताया कि गंगा मैया के भक्त ना सिर्फ देश में बल्कि विदेशों में भी है। राज्य एवं देश के लोग जो विदेशों में जा बसे हैं वे भी मंदिर में नवरात्रि पर मनोकामना ज्योति कलश प्रज्ज्वलित करवाते हैं। 

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