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Balod News: फिर खुला स्कूल, बच्चों ने मनाया प्रवेशोत्सव; शिक्षक के ट्रांसफर से नाराज परिजनों ने जड़ा था ताला
Mon, 26 Jun 2023 05:05 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालोद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालोद
Published by: मोहनीश श्रीवास्तव
Updated Mon, 26 Jun 2023 05:05 PM IST
सार
विकासखंड शिक्षा अधिकारी ललित चंद्राकर ने कहा कि उनकी ड्यूटी दूसरी जगह लगी हुई है। उन्हें फोन से इसकी जानकारी मिली है। इस संबंध में परिजनों से बात करेंगे। साथ ही अफसरों को इसकी जानकारी दी जाएगी।
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स्कूल के गेट पर ताला लगाकर बाहर खड़े परिजन और बच्चे।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
छत्तीसगढ़ के स्कूलों में सोमवार यानी आज से शिक्षण सत्र की शुरुआत हो गई है। वहीं बालोद जिले के देवीकोट स्कूल के शिक्षक का ट्रांसफर होने से नाराज परिजनों ने गेट पर ताला लगा दिया था। कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद स्कूल फिर से खुल गया है। प्रवेशोत्सव भी मनाया जा रहा है। जिला शिक्षा अधिकारी मुकुल साव ने बताया कि, शिक्षक मोहन सिन्हा को जहां ट्रांसफर हुआ है, वहां स्कूल शिक्षक विहीन था। वहीं देवकोट विद्यालय में 43 बच्चों के पीछे दो शिक्षक पदस्थ हैं।
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दरअसल, गुरुर ब्लॉक के ग्राम देवकोट स्थित प्राथमिक स्कूल में पदस्थ शिक्षक मोहन सिन्हा का स्थानांतरण प्राथमिक शाला मासूल में किया गया है। इसका ग्रामीण काफी विरोध कर रहे थे। शाला प्रबंधन समिति अध्यक्ष राकेश साहू ने बताया कि शिक्षक का व्यवहार बहुत अच्छा है। पता नहीं यहां से क्यों स्थानांतरण किया गया है। वह बताते हैं कि, जनप्रतिनिधियों से लेकर प्रशासन तक अपनी बातों को रख चुके हैं, लेकिन किसी तरह का कोई निष्कर्ष नहीं आया। जिसके कारण हमे ऐसा कदम उठाना पड़ रहा है।
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कलेक्टर की सक्रियता से मामला हुआ शांत
कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने मामले को संज्ञान में लेते हुए तहसीलदार विकासखंड चिकित्सा अधिकारी और अन्य अधिकारियों को मौके पर भेजा। जिसके बाद ग्रामीणों से देर तक चर्चा के बाद मामला शांत हुआ। बच्चे स्कूल पहुंचे मध्यान्ह भोजन बनाया गया। बच्चों ने भोजन भी किया। दूसरी ओर ग्रामीणों के बात को प्रशासन ने शासन तक पहुंचाने की बात कही है। अफसरों का कहना है कि आदेश शासन से आया है और शासन स्तर का मामला है।
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शिक्षक की अनुशासनहीनता आई सामने
बालोद डीईओ और विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने बताया की पूरे मामले में शिक्षक की अनुशासनहीनता भी सामने आई है। शिक्षक सलग्न होने के बाद भी वो मूल शाला में जाने के बजाय देवकोट में ही रहता था। शासन का आदेश है इसमें स्थानीय लोग कुछ नहीं कर सकते। सभी को साथ लेकर चलना है। शिक्षक के ऊपर ग्रामीणों को भड़काने का भी आरोप सामने आया है। पूरा मामला जांच के बाद स्पष्ट हो पाएगा।