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Balod: मां गंगा मइया मंदिर में जले आस्था के ज्योत, सुबह से लगी भक्तों की भीड़, जानें कैसे पड़ा नाम

Tue, 09 Apr 2024 03:08 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बालोद
अमर उजाला नेटवर्क, बालोद Published by: Digvijay Singh Updated Tue, 09 Apr 2024 03:08 PM IST
सार

बालोद जिले के प्रमुख आस्था के केंद्र मां गंगा मइया मन्दिर में आज से हिंदू नववर्ष एवं नवरात्र पर्व की शुरुआत हो चुकी है। विशेष पूजा अर्चना के साथ आज गंगा मइया मन्दिर में 900 और शीतला माता मंदिर में 100 आस्था के ज्योति कलश जलाए गए हैं। 

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Flames of faith lit in Maa Ganga Maiya temple crowd of devotees started since morning in Balod
मां गंगा मइया मंदिर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बालोद जिले के प्रमुख आस्था के केंद्र मां गंगा मइया मन्दिर में आज से हिंदू नववर्ष एवं नवरात्र पर्व की शुरुआत हो चुकी है। विशेष पूजा अर्चना के साथ आज गंगा मइया मन्दिर में 900 और शीतला माता मंदिर में 100 आस्था के ज्योति कलश जलाए गए हैं, सुबह से ही मंदिर में भक्तों की भीड़ लगी हुई है और देवी जस भजन का गायन भी किया गया। आपको बता दें मां गंगा मइया की स्थापना का इतिहास अंग्रेजी शासन काल से जुड़ा हुआ है यहां देश-विदेश से भक्त पहुंचते हैं।

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भक्तों की भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी तैनात है और पूड़ी सब्जी सेवा से लेकर निशुल्क स्टैंड व्यवस्था की गई है। आज आरती में सैकड़ों भक्त शामिल हुए और आज से ही ट्रस्ट द्वारा सभी सुविधाओं को शुरू कर दिया गया है।

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134 साल पुराना इतिहास

मंदिर का स्वरूप भी हर साल बदलता जा रहा है। लगभग 134 साल पहले जिले की जीवन दायिनी तांदुला नदी पर नहर का निर्माण चल रहा था। सोमवार को वहां बड़ा साप्ताहिक बाजार लगता था। बाजार में दूर-दराज से पशुओं के झुंड के साथ बंजारे आया करते थे। पशुओं की संख्या अधिक होने के कारण पानी की कमी महसूस की जाती थी। पानी की कमी को दूर करने के लिए बांधा तालाब की खुदाई कराई गई। गंगा मैया के प्रादुर्भाव की कहानी इसी तालाब से शुरू होती है। 


केवट के जाल में फंसी थी प्रतिमा 

मंदिर के व्यवस्थापक सोहन लाल टावरी ने बताया कि एक दिन ग्राम सिवनी का एक केवट मछली पकड़ने के लिए इस तालाब में गया। जाल में मछली की जगह एक पत्थर की प्रतिमा फंस गई, केवट ने अज्ञानतावश उसे साधारण पत्थर समझ कर फिर से तालाब में डाल दिया। इस प्रक्रिया के कई बार पुनरावृत्ति से परेशान होकर केवट जाल लेकर अपने घर चला गया। 


सपने में केवट को मां ने दिया संदेश  

देवी ने गांव के गोंड़ जाति के बैगा को स्वप्न में आकर कहा कि मैं जल के अंदर पड़ी हूं, मुझे जल से निकालकर मेरी प्राण-प्रतिष्ठा करवाओ। स्वप्न की सत्यता को जानने के लिए तत्कालीन मालगुजार छवि प्रसाद तिवारी, केवट और गांव के अन्य प्रमुखों को साथ लेकर बैगा तालाब पहुंचा। केवट ने फिर जाल फेंका जिसमें वही प्रतिमा फिर फंस गई। फिर प्रतिमा को बाहर निकाला गया, उसके बाद देवी के आदेशानुसार छवि प्रसाद ने अपने संरक्षण में प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा करवाई। जल से प्रतिमा निकली होने के कारण गंगा मैया के नाम से विख्यात हुई। 

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