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डॉक्टर कैसे पहुंचे बच्चों के पास: राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के लिए आई गाड़ी, अफसर ढो रहे सामान
Wed, 07 Jun 2023 05:13 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालोद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालोद
Published by: मोहनीश श्रीवास्तव
Updated Wed, 07 Jun 2023 05:13 PM IST
सार
बीएमओ जितेंद्र सिंह ने कहा कि, वे मामला देखने के बाद ही कुछ कह पाएंगे। फील्ड में रहने तक की जानकारी सिर्फ उन्हें रहती है। अगर दुरुपयोग हुआ है, तो जांच होगी।
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राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के वाहन निजी काम के लिए चला रहे कर्मचारी।
- फोटो : संवाद
विस्तार
छत्तीसगढ़ के बालोद में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य विभाग में लगाए गए वाहनों को अफसर अपने निजी काम में इस्तेमाल कर रहे हैं। उससे परिवार को स्टेशन छोड़ा जा रहा है, कहीं सामान ढो रहे हैं। जबकि ये गाड़ियों डॉक्टरों के लिए दी गईं हैं। जिसमें वह आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर बच्चों के स्वास्थ्य का परीक्षण कर सकें। बताया जा रहा है कि दौरे पर जाने की बात कहकर गाड़ी स्वीकृत कराई गई थी, लेकिन उसमें परिवार के लोग दुर्ग जाने की तैयारी कर रहे थे। मीडिया की नजर पड़ी तो गाड़ी लौटा दी गई।
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पूरा मामला स्वास्थ्य विभाग का है। यहां कार्यरत एकाउंटेंट हैं शहर के मरार पारा निवासी रोहित शर्मा। आरोप है कि, उन्होंने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के लिए किराये पर आए वाहन को मंगलवार शाम करीब 6 बजे कार्यालय से बुलाया। बताया कि उन्हें दौरे पर जाना है। गाड़ी घर के सामने खड़ी हुई तो उसमें सामान भरा जाने लगा। बताया जा रहा है कि इस वाहन से उनका परिवार दुर्ग रेलवे स्टेशन जा रहा था। जिस गाड़ी पर सामान लोड हो रहा था, वो सीजी 08 एआर 8890 है और उस पर छत्तीसगढ़ शासन लिखा हुआ है।
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बालोद शहर के मरार पारा में यह गाड़ी लग गई थी। सामान भी भरा जा चुका था। लेखापाल रोहित शर्मा का परिवार उसमे सवार होने वाला था, लेकिन जब तस्वीरें ली जाने लगी तो वाहन से सभी सामान को उतार लिया गया। साथ ही वाहन को वापस भेज दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, बुधवार को भी एक अन्य गाड़ी निजी काम से धमतरी के लिए निकलने वाली थी, लेकिन यह मामला सामने आने के बाद वो निजी दौरा भी रदद कर दिया गया है। फिलहाल बात अफसरों तक पहुंच गई हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के लेखा अधिकारी नीलम सोनवानी ने बताया कि, उन्हें कॉल आया था। बताया गया कि विकासखंड का चिकित्साकर्मी बोल रहा हूं। दौरे पर जाने के लिए गाड़ी मंगवाई थी। बताया कि, गाड़ियां बालोद ब्लाक में चलती हैं, लेकिन इसका भुगतान जिले से होता है। दो टीम हैं, दोनों राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत कार्य करती हैं। बीएमओ जितेंद्र सिंह ने कहा कि, वे मामला देखने के बाद ही कुछ कह पाएंगे। फील्ड में रहने तक की जानकारी सिर्फ उन्हें रहती है। अगर दुरुपयोग हुआ है, तो जांच होगी।