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सीजी: 316 दिन से आमरण अनशन पर बैठे डीएड अभ्यर्थी; मंत्री-विधायक से लगाई गुहार, आखिर कब सुनोगे साय सरकार?
Sat, 31 Oct 2026 05:40 PM IST
Lalit Kumar Singh
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: Lalit Kumar Singh
Updated Sat, 31 Oct 2026 05:40 PM IST
सार
सहायक शिक्षक के 2316 पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ डीएड अभ्यर्थी 316 दिन से नवा रायपुर के तूता धरना स्थल में आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। मामले में सुप्रीम कोर्ट और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद अभी तक नियुक्ति नहीं हुई है।
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ग्रॉफिक्स: अमर उजाला डिजिटल
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
विस्तार
सहायक शिक्षक के 2316 पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ डीएड अभ्यर्थी 316 दिन से नवा रायपुर के तूता धरना स्थल में आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। मामले में सुप्रीम कोर्ट और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद अभी तक नियुक्ति नहीं हुई है। जबकि इन पदों के लिये काउंसिलिंग भी हो चुकी है। इसके बाद भी अभी तक इन पदों पर सहायक शिक्षकों को पदस्थ नहीं किया गया है।
अमर उजाला से खास चर्चा में इन अभ्यर्थियों ने कहा कि प्रदर्शन करते हुए दस महीने हो गये हैं। रायपुर में आत्मदाह के प्रयास के दौरान उन्हें 'शातिर' कैदियों के साथ चार दिनों तक रायपुर सेंट्रल जेल में रखा गया। इस पुलिसिया कार्रवाई से समाज के लोग तरह-तरह की बातें कर रहे हैं। कानाफूसी और तानों से जीना दूभर हो गया है। सामाजिक तानें-बानें सुनने पड़ रहे हैं। पड़ोसी चुटकी ले रहे हैं। टिका टिप्पणी कर रहे हैं। जेल में रहने की वजह से हमारी शादी नहीं हो पा रही है। लगन लगकर कट जा रहे हैं। शादी की उम्र हो गई पर शादी नहीं हो रही है। ये पीड़ा है छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर के तूता धरना स्थल में आमरण अनशन पर बैठे हुए डीएड अभ्यर्थियों का।
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रायपुर में प्रदर्शन के दौरान आत्मदाह की कोशिश के दौरान उन्हें उठाकर रायपुर सेंट्रल जेल में डाल दिया गया। सामजिक तानों की वजह से जहां उनकी शादी नहीं हो पा रही है। वहीं उनके परिजनों का मान-सम्मान भी खत्म होते जा रहा है। सामाजिक परिवेश में रहना दुश्वार हो गया है। इतना सब होने के बावजूद सरकार हाथ पर हाथ धरकर बैठे हुई है। यदि उनकी मांगें मान ली जाये, तो उनके भी हाथ पीले हो जायेंगे। घर में शहनाइयां गूजेंगी। चारों तरफ खुशियां होगी।
दस महीने, 216 दिन पूरे, फिर भी हाथ खाली
24 दिसंबर 2025 से शुरू हुए इस आंदोलन के दस महीने पूरे हो चुके हैं। इसके बावजूद इन अभ्यर्थियों के हाथ खाली हैं। खास और बड़ी बात ये है कि मामले में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की दखल के बावजूद अभी तक राज्य सरकार ने उनकी सुध नहीं ली है। सरकार के कानों पर जू तक नहीं रेग रहे हैं।
राष्ट्रपति, राज्यपाल, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री को खून से लिखा खत
इन अभ्यर्थियों ने अपने खून से राष्ट्रपति, राज्यपाल, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री सहित अन्य मंत्रियों को खत लिखकर न्याय की गुहार लगा चुके हैं पर अभी तक किसी ने भी उनकी फरियाद नहीं सुनी है। एक तरफ जहां छात्रों के विरोध प्रदर्शन से केंद्र सरकार हिल गई थी। वहीं राज्य की बीजेपी सरकार ने अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। ऐसे में न्याय की आस में बैठे इन अभ्यर्थियों की आंखें पथरा गई हैं। अभ्यर्थियों की शारीरिक और मानसिक स्थिति दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। लगातार स्वास्थ्य बिगड़ते जा रहे हैं पर राज्य सरकार मामले में मौन है।
पीड़ित अभ्यर्थी मूरली चंद्रवशी और फूल सीता का कहना है कि का कहना है कि सरकार के मंत्री नेता केवल मौखिक आदेश दे रहे हैं पर उनकी नियुक्ति को लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है। सरकार के खिलाफ करियर की लड़ाई में डीएड अभ्यर्थियों के सारे अरमानों की बलि चढ़ गई है। उनके शादी-विवाह नहीं हो रहे हैं। दरवाजे से रिश्ते आकर लौट जा रहे हैं। शादी नहीं हो रही है। यह आंदोलन अब केवल रोजगार की मांग नहीं, बल्कि न्याय, अधिकार और संवैधानिक सम्मान की लड़ाई बन चुकी है। आमरण अनशन के दौरान 300 से अधिक अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ चुकी है। सूचना देने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंचती है।
रक्षाबंधन पर भी जारी रहा आमरण अनशन
2316 रिक्त सहायक शिक्षक पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर डीएड अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन आमरण अनशन 248वें दिन रक्षाबंधन पर भी जारी रहा। रक्षाबंधन पर आंदोलनरत महिला डीएड अभ्यर्थियों ने कैबिनेट मंत्रियों को राखी बांधकर अपने भविष्य को संवारने की अपील की। जहां पूरे प्रदेश में लोग रक्षाबंधन मना रहे थे। वहीं इस दिन भी डीएड अभ्यर्थी भाई-बहन न्याय की आस में आमरण अनशन करते रहे। इस दौरान महिला अभ्यर्थियों ने कहा कि हमने राखी बांधी है, अब सरकार हमारे भविष्य की रक्षा करें। 2300 पदों पर नियुक्ति देकर उनके संघर्ष को न्यायपूर्ण अंत दिया जाए।
जानें क्या है मामला
साल 2023 में छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा हुई थी। इसमें 2611 पदों पर बीएड अभ्यर्थियों की भर्ती कर ली गई थी। जब विरोध हुआ तो उन्हें पदमुक्त कर दिया गया। इन पदों पर डीएड अभ्यर्थियों की नियुक्ति होनी थी। इसके लिए काउंसिलिंग की गई। चयन सूची भी जारी हुई थी। इसमें करीब 1300 पदों पर भर्ती की गई पर 1316 पदों पर अभी तक भर्ती नहीं हुई है। वहीं नये सेटअप में छह हजार शिक्षकों के पदों में से भी पांच हजार पदों पर भर्ती हुई है। इसमें भी 984 पदों पर भर्ती नहीं हुई है। इस तरह कुल 2316 पदों पर भर्ती की जानी है। इन्हीं पदों पर भर्ती को लेकर डीएड अभ्यर्थी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
डीएड अभ्यर्थियों की मांगें
अब तक इन तरीकों से किया प्रदर्शन
फैक्ट फाइल
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अमर उजाला से खास चर्चा में इन अभ्यर्थियों ने कहा कि प्रदर्शन करते हुए दस महीने हो गये हैं। रायपुर में आत्मदाह के प्रयास के दौरान उन्हें 'शातिर' कैदियों के साथ चार दिनों तक रायपुर सेंट्रल जेल में रखा गया। इस पुलिसिया कार्रवाई से समाज के लोग तरह-तरह की बातें कर रहे हैं। कानाफूसी और तानों से जीना दूभर हो गया है। सामाजिक तानें-बानें सुनने पड़ रहे हैं। पड़ोसी चुटकी ले रहे हैं। टिका टिप्पणी कर रहे हैं। जेल में रहने की वजह से हमारी शादी नहीं हो पा रही है। लगन लगकर कट जा रहे हैं। शादी की उम्र हो गई पर शादी नहीं हो रही है। ये पीड़ा है छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर के तूता धरना स्थल में आमरण अनशन पर बैठे हुए डीएड अभ्यर्थियों का।
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रायपुर में प्रदर्शन के दौरान आत्मदाह की कोशिश के दौरान उन्हें उठाकर रायपुर सेंट्रल जेल में डाल दिया गया। सामजिक तानों की वजह से जहां उनकी शादी नहीं हो पा रही है। वहीं उनके परिजनों का मान-सम्मान भी खत्म होते जा रहा है। सामाजिक परिवेश में रहना दुश्वार हो गया है। इतना सब होने के बावजूद सरकार हाथ पर हाथ धरकर बैठे हुई है। यदि उनकी मांगें मान ली जाये, तो उनके भी हाथ पीले हो जायेंगे। घर में शहनाइयां गूजेंगी। चारों तरफ खुशियां होगी।
दस महीने, 216 दिन पूरे, फिर भी हाथ खाली
24 दिसंबर 2025 से शुरू हुए इस आंदोलन के दस महीने पूरे हो चुके हैं। इसके बावजूद इन अभ्यर्थियों के हाथ खाली हैं। खास और बड़ी बात ये है कि मामले में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की दखल के बावजूद अभी तक राज्य सरकार ने उनकी सुध नहीं ली है। सरकार के कानों पर जू तक नहीं रेग रहे हैं।
राष्ट्रपति, राज्यपाल, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री को खून से लिखा खत
इन अभ्यर्थियों ने अपने खून से राष्ट्रपति, राज्यपाल, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री सहित अन्य मंत्रियों को खत लिखकर न्याय की गुहार लगा चुके हैं पर अभी तक किसी ने भी उनकी फरियाद नहीं सुनी है। एक तरफ जहां छात्रों के विरोध प्रदर्शन से केंद्र सरकार हिल गई थी। वहीं राज्य की बीजेपी सरकार ने अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। ऐसे में न्याय की आस में बैठे इन अभ्यर्थियों की आंखें पथरा गई हैं। अभ्यर्थियों की शारीरिक और मानसिक स्थिति दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। लगातार स्वास्थ्य बिगड़ते जा रहे हैं पर राज्य सरकार मामले में मौन है।
पीड़ित अभ्यर्थी मूरली चंद्रवशी और फूल सीता का कहना है कि का कहना है कि सरकार के मंत्री नेता केवल मौखिक आदेश दे रहे हैं पर उनकी नियुक्ति को लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है। सरकार के खिलाफ करियर की लड़ाई में डीएड अभ्यर्थियों के सारे अरमानों की बलि चढ़ गई है। उनके शादी-विवाह नहीं हो रहे हैं। दरवाजे से रिश्ते आकर लौट जा रहे हैं। शादी नहीं हो रही है। यह आंदोलन अब केवल रोजगार की मांग नहीं, बल्कि न्याय, अधिकार और संवैधानिक सम्मान की लड़ाई बन चुकी है। आमरण अनशन के दौरान 300 से अधिक अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ चुकी है। सूचना देने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंचती है।
रक्षाबंधन पर भी जारी रहा आमरण अनशन
2316 रिक्त सहायक शिक्षक पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर डीएड अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन आमरण अनशन 248वें दिन रक्षाबंधन पर भी जारी रहा। रक्षाबंधन पर आंदोलनरत महिला डीएड अभ्यर्थियों ने कैबिनेट मंत्रियों को राखी बांधकर अपने भविष्य को संवारने की अपील की। जहां पूरे प्रदेश में लोग रक्षाबंधन मना रहे थे। वहीं इस दिन भी डीएड अभ्यर्थी भाई-बहन न्याय की आस में आमरण अनशन करते रहे। इस दौरान महिला अभ्यर्थियों ने कहा कि हमने राखी बांधी है, अब सरकार हमारे भविष्य की रक्षा करें। 2300 पदों पर नियुक्ति देकर उनके संघर्ष को न्यायपूर्ण अंत दिया जाए।
जानें क्या है मामला
साल 2023 में छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा हुई थी। इसमें 2611 पदों पर बीएड अभ्यर्थियों की भर्ती कर ली गई थी। जब विरोध हुआ तो उन्हें पदमुक्त कर दिया गया। इन पदों पर डीएड अभ्यर्थियों की नियुक्ति होनी थी। इसके लिए काउंसिलिंग की गई। चयन सूची भी जारी हुई थी। इसमें करीब 1300 पदों पर भर्ती की गई पर 1316 पदों पर अभी तक भर्ती नहीं हुई है। वहीं नये सेटअप में छह हजार शिक्षकों के पदों में से भी पांच हजार पदों पर भर्ती हुई है। इसमें भी 984 पदों पर भर्ती नहीं हुई है। इस तरह कुल 2316 पदों पर भर्ती की जानी है। इन्हीं पदों पर भर्ती को लेकर डीएड अभ्यर्थी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
डीएड अभ्यर्थियों की मांगें
- 2300 रिक्त पदों पर पात्र डीएड अभ्यर्थियों की नियुक्ति दी जाये
- मामले में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों का पालन हो
- डीएड अभ्यर्थियों की वैध नियुक्ति दी जाये
अब तक इन तरीकों से किया प्रदर्शन
- मौन धरना - “चुप्पी नहीं, न्याय की पुकार
- कैंडल मार्च - “अंधेरे में भी न्याय की उम्मीद”
- “एक कप चाय न्याय के नाम” अभियान
- सांकेतिक भीख मांगकर प्रदर्शन
- दंडवत प्रणाम यात्रा
- घुटनों के बल लेटकर चले
- रामनवमी पर कलश यात्रा
- 14 मंत्रियों के नाम से 108 दीप जलाये
- हनुमान चालीसा पाठ
- नौ कन्या पूजा
- जल सत्याग्रह
- अंगारों पर चले
- शिक्षा मंत्री को दिया ज्ञापन
- हथकड़ी लगाकर सांकेतिक फांसी पर चढ़े
फैक्ट फाइल
- विरोध के दौरान अभ्यर्थियों की बिगड़ी तबीयत
- आमरण अनशन के दौरान 300 से अधिक अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ी
- कई अभ्यर्थियों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा
- भीषण गर्मी और लू के कारण लगातार अभ्यर्थियों की तबीयत खराब हुई
- कई लोग बेहोशी और कमजोरी का शिकार हुए
- आत्मघाती कदम भी उठाये गये