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50 किमी यात्रा कर भी राशन नहीं मिलता, बस कहने को संरक्षण प्राप्त हैं बैगा आदिवासी

Mon, 20 Nov 2017 06:32 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला
टीम डिजिटल, अमर उजाला Updated Mon, 20 Nov 2017 06:32 PM IST
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baiga adivasi walks 50 kms for ration but pds systems fails to give ration in Bilaspur chhattisgarh
बैगा आदिवासी - फोटो : Alok Putul/BBC
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर क्षेत्र में पीडीएस व्यवस्था का बुरा हाल है। राशन की दुकानों में अनेक तरह के कारणों का हवाला देकर राशन नहीं दिया जाता है। राशन सूची में नाम कटना वजह बताकर राशन देने से मना कर दिया जाता है तो कुछ इलाकों में केरोसिन तेल भी नहीं उपल्बध कराया जा रहा है। ताजा मामला लोरमी विकासखंड के बोईरहा, राजक, पटपरहा, औरापानी गांवों में सामने आया है। 
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गांववालों खुड़िया में राशन दुकान वाले ने एक महीने का राशन नहीं दिया। राशन लेने के लिए बैगा आदिवासी समुदाय के लोग 25 किलोमीटर पैदल चलकर खुड़िया पहुंचते हैं। लेकिन इन कठनि परिस्थियों में बैगा आदिवासियों की इस समस्या का ध्यान न तो चुने हुए जनप्रतिनिधि ले रहे हैं और न ही अधिकारियों की कान में जूं रेंग रही हैं। 
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बोईरहा, राजक, पटपरहा, औरापानी गांव के निवासियों को 25 किलोमीटर की दूरी तय कर राशन की दुकान पहुंचते हैं और राशन विक्रेताओं की उपेक्षा की वजह से खाली हाथ 25 किलोमीटर की दूरी तय कर घर लौटते हैं। यानि बैगा आदिवासी समुदाय को राशन लेने के लिए 50 किलोमीटर की यात्रा तय करनी पड़ती है। 
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इतवारी पिता गोंडु तथा अमरसिंह पिता इतवारी, मिखू राम बैगा, जनहू राम सिंद्राम ने बताया कि, 'पिछले दो महीनों से गांव में राशन नहीं मिल रहा। हमें खुड़िया से राशन लेने की बात कही गई है। खुड़िया में पूछा गया कि राशन यहीं से मिलेगा तो संचालक ने हमें वहां से यह कहकर भगा दिया कि आप लोगों का इस महीने का राशन लेप्स हो गया है। रविवार को भी गांव के लोग 25 किलोमीटर की दूरी तय कर राशन लेने गए थे, और राशन लेने की प्रक्रिया में शाम हो गई।' 

राशन कार्ड से नाम काटने की धमकी

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बैगा आदिवासी - फोटो : Alok Putul/BBC
खुड़िया गांव में महिला स्वयं सहायता समूह को वनविभाग में तैनात एक वनकर्मी चलाते हैं। गांववालों का आरोप है कि वे राशन कार्डधारियों से बुरा बर्ताव करते हैं। इसकी शिकायत करने पर राशन कार्ड से नाम काटने की धमकी दी जाती है। बैगा आदिवासी राशन नहीं मिलने की बात सोचकर डर जाते हैं और जितना भी राशन दिया जाता है चुपचाप रखकर चले आते हैं। उन्हें मिट्टी का तेल, नमक और चीनी भी नहीं दी जा रही है, और मिलती भी है तो कभी-कभार ही मिलती है। 

राशन वितरण में हो रही समस्याओं और धमकी के खिलाफ कुछ लोगों ने खाद्य निरीक्षक से शिकायत की लेकिन कभी कोई कार्यवाही नहीं की गई। खबरों को मुताबिक इस मामले में प्रतिक्रिया देने के लिए खाद्य निरीक्षक उपलब्ध नहीं हुए। 
 
यूं तो बैगा आदिवासी राज्य सरकार की विशेष संरक्षण प्राप्त जनजातियों सूची में शामिल है। लेकिन बैगा आदिवासियों को राशन मुहैया कराने के मामले में राज्य सरकार बुरी तरह से नाकाम नजर आती है। लोगों ने औरापानी, पटपरहा, बोईरहा, राजक गांवों में तुरंत राशन दुकान खोलने की मांग की है। 
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