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खुफिया रिपोर्ट ने दी अजीत जोगी को 'संजीवनी'

Sat, 31 Aug 2013 09:43 AM IST
नई दिल्ली/विनोद अग्निहोत्री
नई दिल्ली/विनोद अग्निहोत्री Updated Sat, 31 Aug 2013 09:43 AM IST
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ajit jogi will not be sacked from congress

खुफिया रिपोर्टों की वजह से कांग्रेस नेतृत्व ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के खिलाफ कार्रवाई टाल दी है।

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इस रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य में कांग्रेस की वापसी तभी हो सकती है जब कांग्रेस के सभी नेता एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरें।

साथ ही अजीत जोगी को लेकर खुफिया एजेंसियों की राय है कि तमाम विवादों के बावजूद राज्य के कुछ वर्गों में उनका आधार है और अगर जोगी को पार्टी से निकाला गया तो वह कांग्रेस के जनाधार को नुकसान पहुंचा सकते हैं। बेहतर हो कि जोगी को अनुशासित तरीके से पार्टी में बने रहने दिया जाए।

यह जानकारी देने वाले सूत्रों का कहना है कि नक्सली हमले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल और वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल की मौत के बाद जोगी को उम्मीद थी कि राज्य कांग्रेस की पूरी कमान उनके हाथों में आ जाएगी, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व ने केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री चरण दास महंत को कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बनाकर जोगी के मंसूबों पर पानी फेर दिया।
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महंत और जोगी के बीच में जबर्दस्त तनातनी है। दबाव बनाने केलिए जोगी ने राज्य में अपने प्रभाव वाले इलाकों में प्रदेश कांग्रेस को चुनौती देते हुए समानांतर जनसभाएं करते हुए उम्मीदवारों के नाम घोषित करने शुरु कर दिए।
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इन जनसभाओं में प्रदेश सोनिया गांधी और राहुल गांधी तक के फोटो नहीं लगाए गए। प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने इसकी शिकायत प्रभारी महासचिव बीके हरिप्रसाद और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से की।

बताया जाता है कि राहुल ने इस बारे में वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा और चरण दास महंत से भी विचार-विमर्श किया। साथ ही उन्होंने विभिन्न सूत्रों से राज्य की जमीनी स्थिति की मिल रही जानकारियों का भी विश्लेषण किया।
इसमें केंद्रीय खुफिया एजेंसी आईबी की राजनीतिक शाखा की वह रिपोर्ट भी शामिल है जो नियमित रूप से केंद्र को भेजी जाती है।

इसके मुताबिक अजीत जोगी को अगर चुनाव से पहले पार्टी से निकाला गया तो वह अपने समर्थकों समेत या तो बसपा में शामिल हो सकते हैं या अलग दल बना सकते हैं। इससे कांग्रेस उन इलाकों में कमजोर हो सकती है जहां जोगी का जनाधार है।

इनमें विशेषकर बिलासपुर-महासमुंद क्षेत्र की आदिवासी और सतनामी समुदाय के प्रभाव वाली सीटें शामिल हैं। बस्तर के आदिवासी बहुल नक्सल प्रभावित इलाकों में इसका कोई असर नहीं है।


सूत्रों के मुताबिक इसके बाद राहुल गांधी ने बी.के हरिप्रसाद और कांग्रेस महासचिव सीपी जोशी को जिम्मेदारी सौंपी कि छत्तीसगढ़ में जोगी और उनके विरोधी नेताओं के बीच झगड़ा खत्म कराया जाए। प्रसाद और जोशी ने महंत को जोगी से मिलकर विवाद शांत करने की पहल करने के लिए कहा।

इसके बाद दिल्ली में अजीत जोगी के घर पर महंत उनसे मिलने गए। इस मुलाकात का कोई खास नतीजा नहीं निकला, लेकिन जोगी के अहम की जरूर तुष्टि हो गई।

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