बस्तर में माओवादियों के खिलाफ वायुसेना का 'युद्ध'?
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छत्तीसगढ़ पुलिस ने दावा किया है कि शुक्रवार को भारतीय वायुसेना के एमआई-17 हेलिकॉप्टरों ने राज्य के माओवाद प्रभावित बस्तर के सुकमा ज़िले में उड़ान के साथ-साथ फायरिंग का अभ्यास किया है।
पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी एक बयान में बताया गया है कि 1 अप्रैल को वायुसेना के तीन हेलिकॉप्टरों ने सुकमा क्षेत्र में उड़ान भरी और एक एमआई-17 हेलिकॉप्टर ने हवाई फायरिंग का अभ्यास किया।
छत्तीसगढ़ में विशेष पुलिस महानिदेशक (नक्सल ऑपरेशन) डीएम अवस्थी ने पत्रकारों को बताया कि यह पूरी कार्रवाई वायुसेना के विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कमांडो दस्ते ‘गरुड़’ ने की। अभ्यास में वायुसेना और सुकमा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
ऐसा नहीं कि वायुसेना का अभ्यास पहली बार हुआ हो, इससे पहले पिछले साल अक्तूबर में भी बीजापुर ज़िले में वायुसेना ने हेलिकॉप्टरों से फायरिंग का अभ्यास किया था।
अभी तक रसद पहुंचाने के लिए होता था हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल
हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बस्तर में अभी तक सेना के हेलिकॉप्टर का उपयोग सुरक्षाबलों को ज़रूरी रसद और दूसरे सामान पहुंचाने या घायलों को लाने-ले जाने के लिये होता रहा है।
कई बार माओवादियों द्वारा इन हेलिकॉप्टरों को भी निशाना बनाया गया, इसके बाद जवाबी कार्रवाई और ‘आत्मरक्षार्थ’ सेना की फायरिंग पर सहमति बनी।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक़ सेना अपने हेलिकॉप्टरों से केवल ‘आत्मरक्षार्थ’ ही हमला करेगी, लेकिन मानवाधिकार संगठन पुलिस की इस सफाई से संतुष्ट नहीं हैं।
मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल की छत्तीसगढ़ इकाई के अध्यक्ष डॉक्टर लाखन सिंह का कहना है कि पहले इंद्रावती टाइगर रिज़र्व के भीतर एयरस्ट्रिप को मंज़ूरी और फिर वायुसेना के अभ्यास के बाद यह अनुमान लगाना मुश्किल नहीं कि सरकार वहां क्या कुछ करने जा रही है।
सामाजिक संगठनों ने उठाई विरोध में आवाज
वे कहते हैं, ''हम देश और दुनिया के तमाम अमनपसंद लोगों से अपील करते हैं कि आदिवासियों को इस तरह युद्ध में झोंके जाने के खिलाफ वे सामने आएं। हम राज्य और केंद्र सरकार से भी अपील करते हैं कि वह अपने ही नागरिकों के खिलाफ युद्ध न थोपें।''
राज्य में सामाजिक संगठनों के सामूहिक मंच 'छत्तीसगढ़ बचाओ' आंदोलन के संयोजक आलोक शुक्ला भी भारतीय वायुसेना के फायरिंग अभ्यास को ख़तरनाक मानते हैं।
आलोक कहते हैं, ''जहां कहीं भी हवाई हमले हुए हैं, वहां हज़ारों की संख्या में निर्दोष आदिवासी मारे गए हैं। सरकार माओवादियों के ख़िलाफ़ राजनीतिक के बजाय सिर्फ सैन्य अभियान के नाम पर हल खोजने की कोशिश कर रही है, सरकार को इससे बचना चाहिए।''