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GPM News: झोलाछाप डॉक्टर के इलाज से गई 12 साल की बच्ची की जान, परिजनों ने कहा- सुबह से बिगड़ती रही हालत
Thu, 09 Oct 2025 10:34 AM IST
Lalit Kumar Singh
अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही
अमर उजाला नेटवर्क, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही
Published by: Lalit Kumar Singh
Updated Thu, 09 Oct 2025 10:34 AM IST
सार
गांव में झोलाछाप डॉक्टर के इलाज के चलते 12 वर्षीय मासूम बच्ची की मौत हो गई। उल्टी-दस्त की शिकायत पर परिजन इलाज कराने पहुंचे थे, लेकिन झोलाछाप डॉक्टर के उपचार से बच्ची की तबीयत बिगड़ती चली गई। जिला अस्पताल पहुंचने तक बच्ची ने दम तोड़ दिया।
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मृतक के परिजनों की तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के पेंड्रा के सिलपहरी गांव में झोलाछाप डॉक्टर के इलाज के चलते 12 वर्षीय मासूम बच्ची की मौत हो गई। उल्टी-दस्त की शिकायत पर परिजन इलाज कराने पहुंचे थे, लेकिन झोलाछाप डॉक्टर के उपचार से बच्ची की तबीयत बिगड़ती चली गई। जिला अस्पताल पहुंचने तक बच्ची ने दम तोड़ दिया।
मिली जानकारी के अनुसार, सिलपहरी गांव के जोरान टोला निवासी दीनदयाल वाकरे की बेटी खुशबू वाकरे (12) को मंगलवार सुबह से उल्टी-दस्त की शिकायत थी। इलाज के लिए परिजन उसे पास के गांव पीपलामार निवासी झोलाछाप डॉक्टर भगवानदास के पास ले गए। सुबह से डॉक्टर दवाइयाँ देता रहा, इंजेक्शन लगाया और बॉटल भी चढ़ाई, लेकिन हालत सुधरने के बजाय बिगड़ती चली गई। शाम होते-होते जब बच्ची गंभीर हो गई, तो डॉक्टर ने ही उसे जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी।
परिजन बच्ची को लेकर जिला अस्पताल पहुँचे, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। जिला अस्पताल की डॉक्टर नीलिमा कंवर ने बताया कि बच्ची को अत्यधिक उल्टी-दस्त हुआ था, जिससे उसके शरीर में पानी की मात्रा बहुत कम हो गई थी। डिहाइड्रेशन ही मौत का कारण बना है। घटना की सूचना पर जिला अस्पताल प्रबंधन ने मर्ग मेमो पेंड्रा पुलिस को भेजा। पुलिस ने शव को मरचुरी में सुरक्षित रखवाकर पंचनामा व पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा।
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फिलहाल पुलिस झोलाछाप डॉक्टर के इलाज की पूरी जांच कर रही है। यह मामला एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टरों के अवैध इलाज और लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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मिली जानकारी के अनुसार, सिलपहरी गांव के जोरान टोला निवासी दीनदयाल वाकरे की बेटी खुशबू वाकरे (12) को मंगलवार सुबह से उल्टी-दस्त की शिकायत थी। इलाज के लिए परिजन उसे पास के गांव पीपलामार निवासी झोलाछाप डॉक्टर भगवानदास के पास ले गए। सुबह से डॉक्टर दवाइयाँ देता रहा, इंजेक्शन लगाया और बॉटल भी चढ़ाई, लेकिन हालत सुधरने के बजाय बिगड़ती चली गई। शाम होते-होते जब बच्ची गंभीर हो गई, तो डॉक्टर ने ही उसे जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी।
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परिजन बच्ची को लेकर जिला अस्पताल पहुँचे, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। जिला अस्पताल की डॉक्टर नीलिमा कंवर ने बताया कि बच्ची को अत्यधिक उल्टी-दस्त हुआ था, जिससे उसके शरीर में पानी की मात्रा बहुत कम हो गई थी। डिहाइड्रेशन ही मौत का कारण बना है। घटना की सूचना पर जिला अस्पताल प्रबंधन ने मर्ग मेमो पेंड्रा पुलिस को भेजा। पुलिस ने शव को मरचुरी में सुरक्षित रखवाकर पंचनामा व पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा।
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फिलहाल पुलिस झोलाछाप डॉक्टर के इलाज की पूरी जांच कर रही है। यह मामला एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टरों के अवैध इलाज और लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।