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13 महीनों में 66 कस्टोडियल डेथ: विधानसभा में तीखी बहस, जांच और जवाबदेही पर सरकार-विपक्ष आमने-सामने

Thu, 26 Feb 2026 07:32 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Thu, 26 Feb 2026 07:32 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ की केंद्रीय और जिला जेलों में जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 के बीच 66 बंदियों की कस्टोडियल डेथ होने का मामला विधानसभा में जोरदार बहस का कारण बना।

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66 custodial deaths in 13 months: Heated debate in Assembly chhattisgarh
भूपेश बघेल और विजय शर्मा की तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ की केंद्रीय और जिला जेलों में जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 के बीच 66 बंदियों की कस्टोडियल डेथ होने का मामला विधानसभा में जोरदार बहस का कारण बना। प्रश्नकाल के दौरान उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने सदन को यह जानकारी दी, जिसके बाद विपक्ष ने पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर तीखे सवाल उठाए।
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गृहमंत्री ने बताया कि 66 मामलों में से 18 प्रकरणों में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप न्यायिक मजिस्ट्रेट जांच पूरी हो चुकी है, जबकि 48 मामलों में जांच प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कस्टोडियल डेथ के मामले में अनिवार्य रूप से मजिस्ट्रेट जांच, पोस्टमार्टम और आवश्यक विधिक प्रक्रिया अपनाई जाती है।
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भूपेश बघेल ने उठाए गंभीर सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मृतकों की सूची और संबंधित जेलों का विवरण सार्वजनिक न करने पर आपत्ति जताई। उन्होंने पूछा कि क्या कवर्धा जेल में बंद पंकज साहू की मौत इन 66 मामलों में शामिल है? साथ ही जीवन ठाकुर के मामले को उठाते हुए कहा कि वे कांकेर जेल में बंद थे, लेकिन उनकी मृत्यु रायपुर में हुई क्या यह भी उक्त आंकड़ों में जोड़ा गया है?
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इस पर गृहमंत्री ने स्पष्ट किया कि पंकज साहू की मृत्यु मांगी गई अवधि से पहले की है, इसलिए वह इस सूची में शामिल नहीं है। जीवन ठाकुर को न्यायालय की अनुमति से कांकेर से रायपुर स्थानांतरित किया गया था और उनकी मृत्यु संबंधित अवधि के भीतर दर्ज की गई है।

भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि जीवन ठाकुर, जो आदिवासी समाज के प्रमुख नेता थे, गंभीर बीमारियों से पीड़ित होने के बावजूद उन्हें समुचित उपचार नहीं मिला। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी गिरफ्तारी के विरोध में आदिवासी समाज ने प्रदर्शन किया था और परिजनों व कांग्रेस विधायकों को मुलाकात की अनुमति नहीं दी गई।

गृहमंत्री ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जीवन ठाकुर के खिलाफ फर्जी प्रमाण पत्र बनाने के साक्ष्य मिलने पर वैधानिक कार्रवाई की गई थी। 12 अक्टूबर 2025 को उन्हें जेल लाया गया। वे मधुमेह (शुगर) के मरीज थे और तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल भेजा गया, जहां परिजन मिलते रहे। जेल प्रशासन ने न्यायालय को यह भी सूचित किया था कि वे उपचार में अपेक्षित सहयोग नहीं कर रहे थे। जेल अस्पताल की रिपोर्ट में उल्लेख था कि वे आवश्यक परहेज का पालन नहीं कर रहे थे। बाद में न्यायालय के निर्देश पर उन्हें रायपुर स्थानांतरित किया गया।

भूपेश बघेल ने मामले की जांच विधानसभा समिति से कराने की मांग की। उनका तर्क था कि यदि मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है तो स्वतंत्र और व्यापक जांच आवश्यक है। इस पर गृहमंत्री ने कहा कि जब किसी प्रकरण में पहले से मजिस्ट्रेट जांच चल रही हो, तब समानांतर जांच का औचित्य नहीं बनता। उन्होंने कहा कि कानून की प्रक्रिया व्यक्ति की सामाजिक पृष्ठभूमि से प्रभावित नहीं हो सकती।

बहस के दौरान भूपेश बघेल ने कथित ड्रग रैकेट से जुड़ी नव्या मलिक का नाम भी उठाया और पूछा कि क्या उसका मामला भी इन कस्टोडियल डेथ में शामिल है। गृहमंत्री ने कहा कि वे इस संबंध में पृथक जानकारी प्राप्त कर सदन को अवगत कराएंगे।


पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य में हत्या, लूट और फिरौती जैसे जघन्य अपराधों में 35 प्रतिशत वृद्धि का मुद्दा भी उठाया। जवाब में विजय शर्मा ने दावा किया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अपराध दर में कमी आई है और कानून-व्यवस्था सुदृढ़ हुई है।

सदन में हंगामा और वाकआउट
कस्टोडियल डेथ के मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। नारेबाजी के बीच विपक्षी सदस्यों ने सदन की कार्यवाही से वाकआउट कर दिया।
 
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