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विधानसभा में बड़ा खुलासा: छत्तीसगढ़ की जेलों में 5 साल में 375 कैदियों की मौत, 62 मामलों की जांच अब भी अधूरी

Wed, 15 Jul 2026 04:20 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Wed, 15 Jul 2026 04:20 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ की जेलों में बंद कैदियों की मौत के मामलों को लेकर विधानसभा में चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में जेल अभिरक्षा के दौरान 375 कैदियों की मौत हुई है।

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375 prisoners died in Chhattisgarh jails in 5 years, investigations in 62 cases still pending
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ की जेलों में बंद कैदियों की मौत के मामलों को लेकर विधानसभा में चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में जेल अभिरक्षा के दौरान 375 कैदियों की मौत हुई है। इनमें अधिकांश मामलों में जांच कराई गई है, लेकिन कई मामलों की रिपोर्ट अब तक लंबित है।
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कांग्रेस विधायक उमेश पटेल के सवाल के लिखित जवाब में गृह मंत्री विजय शर्मा ने बताया कि 1 जनवरी 2021 से 25 जून 2026 तक कुल 375 कैदियों की मौत दर्ज की गई। इनमें से 373 मामलों में दंडाधिकारी या न्यायिक जांच के आदेश जारी किए गए। अब तक 311 मामलों की जांच रिपोर्ट संबंधित विभाग को मिल चुकी है, जबकि 62 मामलों की रिपोर्ट का इंतजार है।
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सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2022 जेलों में मौत के मामलों के लिहाज से सबसे गंभीर वर्ष रहा। इस दौरान 90 कैदियों की मौत दर्ज की गई। वहीं, 2026 में 25 जून तक 35 मौतें दर्ज हो चुकी हैं, जिनमें से केवल तीन मामलों की जांच पूरी हुई है और 32 मामलों की रिपोर्ट अभी लंबित है।
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इसी तरह 2025 में 55 मौतों में से केवल 28 मामलों की जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई, जबकि 27 मामलों की जांच पूरी नहीं हो सकी। वर्ष 2024 में 67 मौतों में से तीन मामलों की रिपोर्ट अब तक नहीं मिली है। दूसरी ओर, वर्ष 2021 और 2023 के सभी जांच प्रतिवेदन संबंधित विभाग को प्राप्त हो चुके हैं।


विधानसभा में पेश इन आंकड़ों ने जेलों में स्वास्थ्य सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था और जांच प्रक्रिया की गति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष ने लंबित जांच रिपोर्टों को जल्द पूरा करने और जेलों में कैदियों की सुरक्षा एवं चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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