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पंजाब यूनिवर्सिटी की सिंडिकेट का कार्यकाल बढ़ाने का मुद्दा फिर जाएगा हाईकोर्ट की शरण में

Fri, 25 Dec 2020 02:08 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Fri, 25 Dec 2020 02:08 AM IST
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Second case soon to be filed in High Court to extend tenure of Syndicate of PU
पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ - फोटो : फाइल फोटो
चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी की सिंडिकेट का कार्यकाल बढ़ाने को लेकर हाईकोर्ट में दूसरा केस दायर होने जा रहा है। सिंडिकेट के कुछ सदस्यों और पूर्व सीनेटरों ने इसके लिए ताकत लगा दी है। वह चाहते हैं कि पीयू का ढांचा बना रहे। कम से कम पीयू का संचालन सिंडिकेट के जरिए होता रहे। उम्मीद भी की जा रही है कि कार्यकाल बढ़ सकता है।
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पीयू के कुछ पूर्व सीनेटरों और सिंडिकेट के सदस्यों की ओर से कुछ दिनों पहले हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। इस याचिका में मुद्दा रखा गया था कि सीनेट के चुनाव करवाए जाएं और सिंडिकेट की बैठक आयोजित की जाए। इसके अलावा कई अन्य मुद्दों को भी उठाया गया था। हाईकोर्ट ने इसकी सुनवाई के लिए तिथि दे दी, लेकिन वह डेट अभी दूर है। इसी को ध्यान में रखकर सिंडिकेट के कुछ सदस्य हाईकोर्ट में दूसरी याचिका दायर करने की तैयारी कर रहे हैं। उनका तर्क है कि सिंडिकेट का कार्यकाल बढ़ना चाहिए ताकि पीयू का संचालन होता रहे। 
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अगली सिंडिकेट के गठन से पहले सीनेट का चुनाव करवाया जाना बाकी है। इस पर पीयू प्रशासन को कदम उठाने होंगे। हालांकि पहली याचिका पर अंतिम निर्णय आने के बाद ही सीनेट के चुनाव को लेकर मामला आगे बढ़ेगा। सिंडिकेट के कुछ सदस्यों का कहना है कि दूसरी याचिका दायर करने को लेकर तैयारी चल रही है।



पीयू के कई शिक्षक भी कार्यकाल बढ़ाने के पक्ष में 
पंजाब विश्वविद्यालय के कई शिक्षकों ने भी दूसरी दायर होने वाली याचिका का स्वागत किया है। उनका कहना है कि सीनेट का कार्यकाल तो अब वापस नहीं हो सकता, लेकिन सिंडिकेट का कार्यकाल बढ़ना चाहिए। जब तक पहली याचिका पर निर्णय फाइनल नहीं होता तब तक सिंडिकेट को कार्य करने देना चाहिए। 

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शिक्षकों का कहना है कि सिंडिकेट के जरिए शिक्षकों से लेकर कर्मचारियों के हितों की रक्षा की जाती रही है। अधिकारी मनमाने फैसले नहीं ले पाएं, इसलिए सिंडिकेट जरूरी है। उन्होंने यह भी उदाहरण दिया कि शिक्षकों की पदोन्नति के लिए निर्णय नहीं लिया जा रहा है जबकि पुटा का प्रदर्शन चल रहा है। अभी ये हाल है तो सिंडिकेट के जाने के बाद शिक्षकों की आवाज और दब जाएगी। ऐसे में सिंडिकेट का होना जरूरी है।
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