पंजाब विश्वविद्यालय में एसटी-एससी छात्रों के लिए मंजूर हुए थे तीन छात्रावास, धरातल पर एक भी नहीं
- दो यूजीसी से हुए थे मंजूर...120-120 बेड के अलग-अलग लड़के और लड़कियों के लिए बनने थे छात्रावास
- एक हॉस्टल एआईसीटीई ने किया था मंजूर, दिए थे दो करोड़ रुपये, पैसे का प्रयोग दूसरी जगह कर लिया
- कुछ जानकार बोले- एससी-एसटी के विद्यार्थियों के लिए अन्य छात्रावासों में बढ़ा दी गई थीं सीटें
- विद्यार्थियों का जवाब- ऐसा नहीं हुआ, 22 फीसदी आरक्षित सीटों के अलावा यह लाभ दिया जाना चाहिए था
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पंजाब विश्वविद्यालय में एससी-एसटी विद्यार्थियों को सुविधाएं देने के नाम पर बड़ा घोटाला होने की आशंका है। पीयू को एक नहीं तीन-तीन छात्रावास एससी-एसटी के विद्यार्थियों के लिए मिले लेकिन धरातल पर एक भी नहीं है।
दो छात्रावास यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) से मंजूर हुए तो एक छात्रावास एआईसीटीई (अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद) के जरिए तकनीकी विद्यार्थियों के लिए मंजूर हुआ। इस प्रकरण की परत-दर-परत अब खुलती जा रही हैं।
पीयू के कुछ जानकार लोगों का कहना है कि एससी-एसटी के विद्यार्थियों के लिए अन्य छात्रावासों में सीटें बढ़ा दी गई थीं। वहीं विद्यार्थियों का कहना है कि ऐसा नहीं हुआ। 22 फीसदी आरक्षित सीटों के अलावा यह लाभ दिया जाना चाहिए था। विद्यार्थी इस प्रकरण को केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार के हर जिम्मेदार विभागों को अवगत कराने को कह रहे हैं। मामला सार्वजनिक होने के बाद भी पीयू के अधिकारी इस प्रकरण को गंभीरता से नहीं ले रहे।
सूत्रों के मुताबिक यूजीसी से लड़कों व लड़कियों के लिए अलग-अलग छात्रावास मंजूर थे। एक छात्रावास की क्षमता 120 सीटों की थी। इन हॉस्टलों के लिए मिले पैसों का क्या किया गया, यह किसी को पता नहीं है। इसी तरह एआईसीटीई की ओर से 120 सीटों का एक और हॉस्टल तकनीकी विद्यार्थियों के लिए मंजूर हुआ। यह हॉस्टल भी नहीं बना। बाकायदा इसके लिए दो करोड़ रुपये मंजूर हुए।
पीयू ने अपने बजट में भी इस रकम को दिखाया है। यह हॉस्टल बनना चाहिए था लेकिन नहीं बनाया गया। बताते हैं कि इस रकम को दूसरे हॉस्टल पर खर्च किया गया है। एससी-एसटी की सुविधाओं के लिए आए पैसे को दूसरी जगह प्रयोग नहीं किया जा सकता या फिर उसके लिए जहां से पैसे मंजूर होते हैं उस अथॉरिटी से अनुमति लेनी होती है।
यूजीसी के पूर्व चेयरमैन सुखदेव थरोट जब पीयू आए थे तो यह प्रकरण उनके संज्ञान में लाया भी गया था लेकिन इस पर कार्रवाई क्या हुई यह पता नहीं। जानकारों का कहना है कि तीन हॉस्टल मंजूर हुए और तीनों ही नहीं बने, यह पीयू की बड़ी लापरवाही है। हालांकि यह पूरा प्रकरण जांच का विषय है।
यह प्रकरण पुराना है। कितना पैसा हॉस्टलों के लिए मिला है, वह रिकॉर्ड देखकर ही बता सकेंगे। - विक्रम नैयर, कार्यकारी रजिस्ट्रार एवं एफडीओ, पीयू।
पीयू को एससी-एसटी विद्यार्थियों के लिए तीन हॉस्टलों की मंजूरी मिली लेकिन एक भी नहीं बना। एआईसीटीई की ओर से मिले दो करोड़ रुपये को दूसरे हॉस्टलों पर लगा दिया गया विद्यार्थियों को अन्य हॉस्टलों में बढ़ाई गई सीटों का लाभ देना था, जो नहीं दिया गया। इस प्रकरण को ऊपर तक पहुंचाएंगे। - गुरदीप सिंह, चेयरमैन, अंबेडकर स्टूडेंट एसोसिएशन पीयू।
पीयू में एससी-एसटी के लोगों के अधिकार नहीं दिए जा रहे हैं। रोस्टर आज तक लागू नहीं हुआ। छात्रावास मंजूर हुए लेकिन कहीं नहीं बनाए गए। यह गलत है। इस प्रकरण को केंद्र सरकार से लेकर प्रदेश सरकार तक अवगत कराएंगे। - हरप्रीत सिंह, अध्यक्ष, एससी, एसटी, बीसी इंप्लाइज एसोसिएशन।
एससी-एसटी के लिए जो छात्रावास मंजूर हुए थे, उनको अलग न बनाकर उसका लाभ अन्य हॉस्टलों में विद्यार्थियों को देने के लिए कहा गया था। यदि संचालित हॉस्टलों में विद्यार्थियों को लाभ नहीं मिल रहा है तो उसकी जांच होनी चाहिए। - डॉ. अजय रंगा, पूर्व सीनेटर पीयू।
पेक में जल्द बनेंगे दो छात्रावास
पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) में जल्द ही दो छात्रावास बनेंगे। यूटी प्रशासन की ओर से इसके लिए हामी भरी गई है। साथ ही पेक को आश्वासन दिया है जो निर्माण कार्य अधूरे हैं वह भी पूरे हो सकेंगे। इसी के साथ अगले शैक्षिक सत्र तक विद्यार्थियों को छात्रावास मुहैया हो जाएंगे। यह प्रोजेक्ट काफी समय पहले ही मंजूर हो गया था। इनके बन जाने पर करीब 600 विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा।
पेक में विद्यार्थियों की संख्या 3400 से अधिक है। यहां छह छात्रावास हैं। इनमें लगभग 1200 विद्यार्थियों के ही रुकने की व्यवस्था है। इस हॉस्टल पर भी चंडीगढ़ कोटे के तहत आने वाले विद्यार्थियों को पहले अधिक लाभ मिलता रहा है। ऐसे में दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों को पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। हालांकि व्यवस्था में दो साल से कुछ सुधार जरूर हुआ है लेकिन छात्रों की संख्या को देखते हुए हॉस्टलों की संख्या कम है।
सूत्रों का कहना है कि इसी को देखते हुए पेक ने यूटी प्रशासन से छात्रावास की मांग की थी। सूत्रों का कहना है कि मंजूर हुए 100 करोड़ के प्रोजेक्ट में से हॉस्टलों का निर्माण भी होना है। अन्य भवन निर्माण भी होंगे। हालांकि इसकी प्राथमिकता पेक प्रशासन तय करेगा।