Virtual ID से रिप्लेस होगा 12 अंकों का Aadhaar नंबर, पहचान हो जाएगी सेफ

एजेंसी, नई दिल्ली Updated Thu, 11 Jan 2018 11:55 AM IST
Verification Starts on 1st june for Aadhaar secrecy
आधार की गोपनीयता से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए भारतीय पहचान पत्र प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने बुधवार को 1 जून, 2018 से ‘वर्चुअल आईडी’ की अवधारणा को लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत आधार कार्डधारक को अब सिम वेरीफिकेशन या अन्य कार्यों के लिए अपनी 12 अंकों की बायोमीट्रिक आईडी देने की जरूरत नहीं होगी बल्कि इसकी जगह 16 अंकों के एक नंबर से काम चल जाएगा। यह नंबर हर आधार कार्डधारक को यूआईडीएआई की वेबसाइट के जरिए हासिल होगा।

आधार कार्डधारक को एक से ज्यादा वर्चुअल आईडी जनरेट करने की छूट होगी। नया वर्चुअल आईडी जनरेट होते ही पुराना नंबर स्वत: खारिज हो जाएगा। इस वर्चुअल आईडी और कार्डधारक के बायोमीट्रिक्स (नाम, पता और फोटो) के आधार पर मोबाइल कंपनी जैसी कोई भी अधिकृत एजेंसी उसका वेरीफिकेशन कर सकती है। यूआईडीएआई ने गोपनीयता को सुरक्षित रखने के लिए ‘सीमित केवाईसी’ की अवधारणा को भी लागू करने जा रही है। इसके तहत दूरसंचार कंपनियों या ऐसी किसी अधिकृत एजेंसी को आधार कार्डधारक के बारे में सिर्फ सीमित जानकारी मुहैया कराई जाएगी। 

1 मार्च तक जारी होगा सॉफ्टवेयर

यूआईडीएआई 1 मार्च, 2018 तक इसके लिए जरूरी सॉफ्टवेयर जारी कर देगा। पहचान प्रामाणिकरण से जुड़ी सभी एजेंसियों को 28 मार्च तक नए सिस्टम को अपना लेना होगा। इस समयसीमा में नए सिस्टम को नहीं अपनाने वाली एजेंसियों का पंजीकरण समाप्त किया जा सकता है। उन पर अर्थदंड भी लगाया जा सकता है। इन एजेंसियों को कार्डधारक की ओर से वर्चुअल आईडी जनरेट करने की अनुमति नहीं होगी यानी यह काम कार्डधारक को खुद करना होगा।

कैसे मिलेगी वर्चुअल आईडी?

नए सॉफ्टवेयर के काम शुरू करते ही आधार कार्डधारक यूआईडीएआई या आधार एनरोलमेंट सेंटर की वेबसाइट और मोबाइल के आधार एप्लीकेशन पर जाकर वर्चुअल आईडी जनरेट कर सकते हैं। अब आधार कार्डधारक को किसी सेवा प्रदाता कंपनी को अपने फिंगरप्रिंट के साथ सिर्फ यह वर्चुअल नंबर देना होगा। इस नंबर की अवधि सीमित होगी। अगर आप अपना वर्चुअल आईडी भूल जाते हैं तो उसे दोबारा हासिल किया जा सकता है।

समाचार पत्र ने किया था आधार लीक का खुलासा

एक अंग्रेजी समाचार पत्र की पत्रकार ने अपनी रिपोर्ट में 100 करोड़ आधार नंबर खरीदने का दावा किया। पत्रकार ने बताया था कि उन्होंने एक एजेंट को 500 रुपये दिए। इसके बदले में उसने एक यूजरनेम और पासवर्ड दिया। इस आईडी व पासवर्ड की मदद से वह यूआईडीएआई की वेबसाइट में किसी भी आधार नंबर को डालकर उससे जुड़ी सारी जानकारी निकाल सकती थीं। इन जानकारियों में नाम, पता, फोटो, फोन नंबर और ईमेल एड्रेस शामिल हैं। साथ ही उन्होंने लिखा कि 300 रुपये और देने पर एजेंट ने एक सॉफ्टवेयर भी दिया। इससे आधार नंबर देकर आधार कार्ड प्रिंट किया जा सकता है।

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