10 क्षेत्रों को दो लाख करोड़ की पीएलआई योजना में मिलेगी सब्सिडी
- कैबिनेट की मंजूरी... घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा, निर्यात पर घटेगी निर्भरता
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केंद्रीय कैबिनेट ने घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए बुधवार को 10 क्षेत्रों में उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना लागू करने की मंजूरी दे दी है। योजना के तहत पांच वर्षों में करीब 2 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया जाएगा। इसमें वाहन एवं उपकरण क्षेत्र को सर्वाधिक 57,042 करोड़ रुपये की अधिकतम प्रोत्साहन राशि दी गई है। इसके अलावा, एडवांस केमिस्ट्री सेल बैटरी, फार्मा एवं दवाएं, दूरसंचार एवं नेटवर्किंग उत्पाद, खाद्य उत्पाद, टेक्सटाइल उत्पाद, स्पेशियलिटी स्टील, व्हाइट गुड्स, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं टेक्नोलॉजी उत्पाद क्षेत्रों को भी इसका फायदा होगा।
केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि जीडीपी में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी 16 फीसदी है। हमें अभी तक निर्यात बढ़ाने के उपायों में ज्यादा कामयाबी नहीं मिली है। ऐसे में उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने 2 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन आधारित प्रोत्साहन देने का फैसला किया है। यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अहम फैसला है।
आवेदन की तिथि बढ़ाकर 30 नवंबर
जावड़ेकर ने कहा कि फार्मा, मेडिकल उपकरण, मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग जैसे कुछ क्षेत्रों में यह योजना पहले से लागू कर दी गई है। अब सरकार की योजना इसे अन्य क्षेत्रों में भी लागू करने की है। इसके अलावा, योजना के तहत आवेदन करने की आखिरी तारीख को बढ़ाकर 30 नवंबर कर दिया गया है।
कंपनियों को निर्यात की भी अनुमति
इस योजना के अनुसार, सरकार अतिरिक्त उत्पादन पर कंपनियों को प्रोत्साहन देगी। इसके अलावा, उन्हें भारत में बने उत्पादों को निर्यात की अनुमति होगी। पिछले महीने नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा था कि पीएलआई योजना का लक्ष्य प्रतिस्पर्धात्मक माहौल बनाने के लिए निवेशकों को प्रोत्साहित करना है।
इन 10 क्षेत्रों के लिए सब्सिडी
ऑटोमोबाइल एवं ऑटो कंपोनेंट - 57,042 करोड़
एडवांस केमिस्ट्री सेल बैटरी - 18,100 करोड़
फार्मा एवं दवाएं - 15,000 करोड़
दूरसंचार एवं नेटवर्किंग उत्पाद - 12,195 करोड़
खाद्य उत्पाद - 10,900 करोड़
टेक्सटाइल उत्पाद - 10,683 करोड़
स्पेशियलिटी स्टील - 6,322 करोड़
व्हाइट गुड्स - 6,238 करोड़
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं टेक्नोलॉजी उत्पाद - 5,000 करोड़
हाई एफिशियंसी सोलर पीवी मॉड्यूल - 4,500 करोड़