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कैबिनेट का फैसला: एसी और एलईडी लाइट के लिए पीएलआई योजना को अनुमति
Wed, 07 Apr 2021 08:38 PM IST
गौरव पाण्डेय
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Wed, 07 Apr 2021 08:38 PM IST
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केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
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केंद्र सरकार ने बुधवार को एयर कंडीशनर और एलईडी लाइट क्षेत्रों के लिए 6,238 करोड़ रुपये के व्यय से उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना को मंजूरी दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
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वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि एसी और एलईडी के लिए पीएलआई योजना की मंजूरी से इन क्षेत्रों में घरेलू विनिर्माण को मजबूती मिलेगी। केंद्र की इस उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना का मकसद देश में विनिर्माण को बढ़ावा देना है।
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पूर्ण रूप से अनुकूल परिवेश तैयार करने तथा भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का अभिन्न हिस्सा बनाने के मकसद से योजना तैयार की गई है। योजना से वैश्विक निवेश आकर्षित होने, बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर सृजित होने और सतत रूप से निर्यात बढ़ने की उम्मीद है।
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आधिकारिक बयान के अनुसार, ‘पीएलआई योजना के तहत एयर कंडीशनर और एलईडी लाइट के निर्माण से जुड़ी कंपनियों को अगले पांच वर्षों के दौरान भारत में निर्मित वस्तुओं की बढ़ी हुई बिक्री पर चार फीसदी से छह फीसदी की दर से प्रोत्साहन दिया जाएगा।’
योजना के लिए कंपनियों का चयन उन कल-पुर्जों या उपकरण के हिस्से के विनिर्माण (सब असेंबलिंग) को प्रोत्साहन देने के आधार पर किया जाएगा, जिन्हें फिलहाल भारत में पूरी क्षमता के साथ नहीं बनाया जा रहा है। बयान के अनुसार तैयार वस्तुओं को सिर्फ जोड़ने (असेंबल) के लिए प्रोत्साहन नहीं दिया जाएगा।
इसमें कहा गया है, ‘विभिन्न लक्षित क्षेत्रों के लिए पूर्व-पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाली कंपनियां योजना में भाग लेने के योग्य मानी जाएंगी। पुरानी परियोजना और नई परियोजना में निवेश करने वाली कंपनियां भी प्रोत्साहन योजना के योग्य मानी जाएंगी। प्रोत्साहन का दावा करने के लिए आधार वर्ष पर निर्मित वस्तुओं के संदर्भ में निवेश और बिक्री में वृद्धि की शर्त को पूरा करना होगा।'
बयान के अनुसार उम्मीद है कि यह योजना, एसी और एलईडी लाइट उद्योग में उच्च विकास दर हासिल करने, भारत में सहायक कल-पुर्जों के संपूर्ण परिवेश को विकसित करने और भारत में विनिर्माण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर की कंपनियों को तैयार करने में प्रमुख भूमिका निभाएगी।