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नोएल टाटा को बड़ी राहत: 37 साल पुराने सौदे में क्लीन चिट, 833 शेयरों के ट्रांसफर पर क्यों उठे थे सवाल?

Fri, 04 Sep 2026 06:34 AM IST
निर्मल कांत बोनस डेस्क, मुंबई।
बोनस डेस्क, मुंबई। Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 04 Sep 2026 06:34 AM IST
सार

नोएल टाटा को 37 साल पुराने 833 शेयरों के ट्रांसफर मामले में बड़ी राहत मिली है। महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर ने शिकायत खारिज कर दी और सौदे को उस समय के नियमों के मुताबिक सही माना। आखिर इस पुराने सौदे पर सवाल क्यों उठे थे और अब जांच की जरूरत क्यों नहीं मानी गई? पढ़िए रिपोर्ट

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नोएल टाटा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

टाटा संस और टाटा ट्रस्ट में चल रही खींचतान के बीच नोएल टाटा को कानूनी राहत मिली है। महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर ने उन्हें 1989 के शेयर ट्रांसफर मामले में क्लीन चिट दी है। मामला नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट (एनआरटीटी) द्वारा 833 शेयरों के ट्रांसफर से जुड़ा था।
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चैरिटी कमिश्नर ने ट्रस्टी विजय सिंह की शिकायत खारिज कर दी। सिंह ने सौदे की स्वतंत्र जांच की मांग की थी। कमिश्नर ने आदेश में कहा कि शेयर ट्रांसफर तत्कालीन कानूनी प्रावधानों के तहत किया गया था। इसलिए इसमें आगे की जांच की जरूरत नहीं है। क्लीन चिट मिलने पर ट्रस्ट ने आरोपों को निराधार बताया। ट्रस्ट ने कहा, यह संस्थान की साख को नुकसान पहुंचाने का अभियान था।
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विजय का आचरण अशोभनीय : कमिश्नर ने विजय  के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए। सिंह 8 जून को बोर्ड बैठक में शामिल हुए थे। इसमें ट्रस्ट का पक्ष रखने का प्रस्ताव पारित हुआ, पर 10 जून को उन्होंने गुपचुप अपनी अलग शिकायत दर्ज करा दी। चैरिटी कमिश्नर ने उनके इस आचरण को एनआरटीटी के ट्रस्टी के रूप में अशोभनीय बताया। 
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इन आधार पर मिली क्लीन चिट 
कमिश्नर ने दस्तावेज की पड़ताल कर 37 साल पुराना सौदा नियमों के तहत पाया। शेयरों की बिक्री उस समय के वैधानिक कर नियमों की बाध्यताओं के तहत जरूरी थी। नवल नोएल टाटा ने 1 जनवरी 1988 को ट्रस्टी पद से इस्तीफा दिया था। नानी ए. पालकीवाला ने इस्तीफे के एक साल बाद शेयर खरीदने पर रोक न होने की बात कही थी। शेयरों का मूल्यांकन वेल्थ टैक्स कमिश्नर की सहमति से हुआ और एनआरटीटी को शुद्ध वित्तीय लाभ मिला।
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