आज का साक्षात्कार : जीएसटी के दायरे में लाए जाएं पेट्रोलियम पदार्थ
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नई सरकार अपना पहला पूर्ण बजट पेश करने वाली है। इससे एचपीसीएल की क्या अपेक्षा है?
नई सरकार से हम चाहेंगे कि पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के दायरे में लाया जाए। हमारी बड़ी परियोजनाएं जीएसटी के तहत आती ही नहीं हैं। ऐसे में हमें एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) चुकाना पड़ता है, लेकिन हमें इसका इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) मिलता ही नहीं है। यह स्थिति पूरे पेट्रोलियम क्षेत्र की है। एक तरह से देखें तो यह हमारा घाटा है। अन्य क्षेत्र की कंपनियों को आईटीसी का लाभ मिलता है, लेकिन हम इससे वंचित हैं।हम तो चाहेंगे कि जल्द-से-जल्द एयर टारबाइन फ्यूल(एटीएफ) को भी जीएसटी के दायरे में लाया जाए। विमानन कंपनियां लंबे अरसे से इसकी मांग कर रही हैं। पेट्रोलियम क्षेत्र के जीएसटी के दायरे में नहीं होने के कारण कंपनी ने पिछले साल 400 करोड़ रुपये गंवाए। गंवाना शब्द का उपयोग हम इसलिए कर रहे हैं क्योंकि यदि हम जीएसटी के दायरे में आते तो यह रकम हमें आईटीसी के रूप में वापस मिल जाती।
पिछले साल कंपनी का पूंजीगत निवेश क्या था और इस साल क्या संभावना है?
उत्तर- पिछले साल कंपनी ने इस मद में 11,689 करोड़ रुपये खर्च किए थे, जो अब तक का सर्वाधिक स्तर है। इस दौरान कंपनी ने रमनमंडी से बहादुरगढ़ पाइपलाइन का विस्तार किया और यह परियोजना पूर्व निर्धारित समय एवं खर्च की सीमा में पूरी हुई। चालू वित्त वर्ष के दौरान हमने पिछले साल से भी ज्यादा 14,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत निवेश (कैपेक्स) की योजना बनाई है।इस राशि से विशाखापत्तन और मुंबई रिफाइनरी की विस्तार परियोजना पूरी की जाएगी। साथ ही पाइपलाइन परियोजना और विपणन ढांचागत संरचना के विस्तार की परियोजना में भी निवेश किया जाएगा। अच्छी बात यह है कि ये परियोजनाएं पहले से ही चल रही हैं। साथ ही कंपनी के प्लांट में यूरो-4 से यूरो-6 ईंधन उत्पादन का काम भी तेजी से चल रहा है। इसमें भी निवेश होगा। यह काम पहले से ही चल रहा है।
इन कार्यों की वजह से आपको प्लांट शटडाउन भी करना पड़ेगा। इससे उत्पादन प्रभावित नहीं होगा?
एचपीसीएल ने इंडियन ऑयल के कांडला-गोरखपुर पाइपलाइन में हिस्सेदारी लेने का फैसला किया है। इस पर कितना निवेश होगा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय अर्थव्यवस्था को गैस आधारित अर्थव्यवस्था बनाने का संकल्प लिया है। इसके तहत इंडियन ऑयल ने 2016 में गुजरात के कांडला से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर तक 2,757 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाने का फैसला लिया। यह करीब 9,000 करोड़ रुपये की परियोजना है। इसमें एचपीसीएल और बीपीसीएल ने 25-25 फीसदी हिस्सदेारी लेने का फैसला किया है। शेष 50 फीसदी हिस्सेदारी इंडियन ऑयल के पास ही रहेगी। इस पाइपलाइन के जरिए 60 लाख टन सालाना एलपीजी का परिवहन किया जाएगा। यह देश की सबसे बड़ी एलपीजी पाइपलाइन होगी।पिछला वित्त वर्ष पेट्रोलियम कंपनियों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। एचपीसीएल की क्या स्थिति थी?
वित्त वर्ष 2018-19 पेट्रोलियम कंपनियों के लिए कुल मिलाकर चुनौतीपूर्ण ही रहा। उस दौरान कच्चे तेल की कीमतों में काफी उचार-चढ़ाव रहा। रुपया और डॉलर के विनिमय दर ने भी खूब आंख मिचौली की। इस कारण एचपीसीएल की ग्रॉस रिफाइनरी मार्जिन (जीआरएम) घटकर 5.01 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई, जबकि एक साल पहले यह 7.40 डॉलर प्रति बैरल था। इसके बावजूद कंपनी ने बेहतर काम किया है।बीते साल कंपनी ने 6,029 करोड़ रुपये का शुद्घ मुनाफा अर्जित किया, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 6,357 करोड़ रुपये था। पिछले साल बिक्री बढ़ाने की रणनीति पर काफी काम हुआ। इस वजह से कंपनी की कुल बिक्री 2.95 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जबकि इससे एक साल पहले यह आंकड़ा 2.43 लाख करोड़ रुपये था। उस दौरान कंपनी के मुंबई और विशाखपत्तनम रिफाइनरी में क्षमता उपयोग 117 फीसदी रहा था।
पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के दायरे में नहीं लाने से काफी नुकसान हो रहा है। इससे कंपनी को पिछले साल 400 करोड़ का नुकसान हुआ।
-मुकेश कुमार सुराणा सीएमडी, एचपीसीएल