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सेवा क्षेत्र में एक साल की सबसे तेज रफ्तार, मई की गिरावट के बाद जून में तेजी से उबरा उद्योग

Thu, 05 Jul 2018 05:25 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 05 Jul 2018 05:25 AM IST
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The fastest pace of one year in the service sector, growing industries in June after the May fall

सेवा क्षेत्र में मई में हल्की गिरावट दर्ज करने के बाद जून में वापस तेजी दर्ज की गई। यही नहीं, नए कारोबारी ठेकों में भारी तेजी की बदौलत सेवा क्षेत्र में गत एक साल का सबसे तेज विस्तार देखा गया। यह बात एक मासिक सर्वेक्षण में कही गई। मौसमी रूप से समायोजित निक्केई इंडिया सर्विसेज बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स मई के 49.6 से बढ़कर जून में 52.6 पर पहुंच गया। यह जून 2017 के बाद सबसे तेज विस्तार को दर्शाता है।

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पीएमआई की शब्दावली में यदि इंडेक्स 50 से ऊपर हो तो संबंधित क्षेत्र में विस्तार होने का पता चलता है और यदि इंडेक्स 50 से नीचे हो, तो संबंधित क्षेत्र में संकुचन होने का पता चलता है। आईएचएस मार्किट की अर्थशास्त्री और रिपोर्ट की लेखिका आशना डोढिया ने कहा कि सेवा क्षेत्र में जून में वापस विस्तार दर्ज किया गया। रोमांच की बात यह है कि सेवा क्षेत्र का ताजा प्रदर्शन गत एक साल में सर्वाधिक तेज है, जिसमें मांग की परिस्थितियों में हो रहे सुधार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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कार्मिक बहाली हुई तेज
मांग की बेहतर परिस्थितियों को परिलक्षित करते हुए रोजगार वृद्धि की दर में माह-दर-माह आधार पर वृद्धि दर्ज की गई, जो मई में पांच महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई थी। आशना डोढिया ने कहा कि मांग की परिस्थितियों में सुधार की परिणामस्वरूप सेवा प्रदाता कंपनियों ने अपने कर्मचारियों की संख्या में पिछली सर्वेक्षण अवधि के मुकाबले अधिक तेजी से वृद्धि की।

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लागत महंगाई जुलाई 2014 के बाद सबसे तेज

The fastest pace of one year in the service sector, growing industries in June after the May fall

लागत महंगाई जुलाई 2014 के बाद सबसे तेज
कीमत के मोर्चे पर लागत की महंगाई समग्र तौर पर तेजी से बढ़ी, हालांकि सेवा प्रदाता कंपनियां कीमत के मामले में संवेदनशील उपभोक्ताओं तक उच्च लागत खर्च को पूरी तरह से पहुंचा पाने में नाकाम रहे। डोढिया ने कहा कि समग्र लागत खर्च जुलाई 2014 के बाद सबसे तेजी से बढ़ा और कमजोर रुपया तथा तेल की ऊंची कीमतों के बीच महंगाई उच्च स्तर पर बनी रह सकती है।

उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों को देखते हुए मौद्रिक नीति को और सख्त किए जाने की संभावना बढ़ गई है। जून में रिजर्व बैंक ने खुदरा महंगाई के अपने अनुमान को 0.30 फीसदी बढ़ा दिया था और नीतिगत रुख को निरपेक्ष रखते हुए भी मुख्य ब्याज दर (रेपा दर) को 0.25 फीसदी बढ़ाकर 6.25 फीसदी कर दिया था।

समग्र अर्थव्यवस्था में भी तेजी
इस बीच मौसमी रूप से समायोजित निक्केई इंडिया कंपोजिट पीएमआई आउटपुट इंडेक्स मई के 50.4 से बढ़कर जून में 53.3 पर पहुंच गया। यह इंडेक्स उत्पादन तथा सेवा दोनों ही क्षेत्रों की पूरी तस्वीर प्रस्तुत करता है। इस इंडेक्स की रीडिंग में अक्तूबर 2016 के बाद सबसे तेज छलांग दर्ज की गई है, जिससे समग्र अर्थव्यवस्था में तेजी से विस्तार होने का पता चलता है।

डोढिया ने कहा कि पीएमआई आंकड़े से अक्तूबर 2016 के बाद समग्र अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य में सर्वोत्तम सुधार का पता चलता है, जिसमें उत्पादन और सेवा उद्योग दोनों में बेहतरीन विकास का मुख्य योगदान रहा है। एजेेंसी

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