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पेट्रोल-डीजल पर चार साल में दोगुनी हुई कर वसूली, सरकार के दोनों हाथों में 'लड्डू'

Thu, 18 Jul 2019 07:54 AM IST
Nilesh Kumar शिशिर चौरसिया, नई दिल्ली
शिशिर चौरसिया, नई दिल्ली Published by: Nilesh Kumar Updated Thu, 18 Jul 2019 07:54 AM IST
सार

  • कच्चे तेल के दाम में कमी का जनता को लाभ नहीं मिला 
  • पिछले 20 दिनों में पेट्रोल 3.22 रुपये महंगा हो चुका
  • जबकि डीजल 2.33 रुपये प्रति लीटर हो गया है महंगा

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Tax revenue doubled in four years on petrol and diesel
पेट्रोल-डीजल

विस्तार

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में हो रही उठापटक के बीच जनता की जेब पर भले ही बोझ बढ़ रहा हो, लेकिन इससे केंद्र सरकार के दोनों हाथों में लड्डू हैं। एक तरफ पेट्रोलियम पदार्थों पर अप्रत्यक्ष कर वसूली पिछले चार साल में ही 135.60 फीसदी बढ़ गई है तो पेट्रोल और डीजल बेचने वाली सरकारी कंपनियों का मुनाफा भी खूब बढ़ा है। जाहिर है कि जब सरकारी कंपनियों का मुनाफा बढ़ेगा तो उसका अधिकतर लाभांश भी सरकार की झोली में ही जाएगा।

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पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा तैयार आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2014-15 में सरकार को पेट्रोलियम पदार्थों की बिक्री से केंद्र सरकार को 126025 करोड़ रुपये मिले थे जो कि वर्ष 2018-19 में 135.60 फीसदी बढ़ कर 296918 करोड़ रुपये हो गया।
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यदि पेट्रोलियम पदार्थों का विपणन करने वाली कंपनियों द्वारा सरकार को चुकाये गए आयकर या कारपोरेट कर, लाभ पर लाभांश, लाभ वितरण पर देय कर -डीडीटी- आदि को जोड़ दिया जाये तो यह राशि और भी बढ़ जाती है। वर्ष 2014-15 में सरकार को इन सब मद में केंद्र सरकार को 172065 करोड़ रुपये मिले थे जो कि वर्ष 2018-19 में बढ़ कर 365113 करोड़ रुपये हो गया है। यह 112.20 फीसदी की बढ़ोतरी है।
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पिछले 20 दिनों में पेट्रोल 3.22 रुपये महंगा

कच्चे तेल के दाम में फिर से बढ़ोतरी होने की वजह बीते 20 दिनों में ही पेट्रोल 3.22 रुपये और डीजल 2.33 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है। दिल्ली में बीते 26 जून को पेट्रोल का दाम प्रति लीटर 70.05 रुपये था जो 17 जुलाई को बढ़ कर 73.27 रुपये हो चुका है। इसी तरह डीजल भी बीते 26 जून को 63.90 रुपये प्रति लीटर था जो कि 17 जुलाई को बढ़ कर 66.24 रुपये हो गया है। 

नवंबर 2014 से 10 बार बढ़ा है केंद्रीय उत्पाद शुल्क

पेट्रोल डीजल पर केंद्रीय उतपाद शुल्क को देखा जाए तो 12 नवंबर 2014 से अभी तक दस बार केंद्रीय उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी हो चुकी है। हालिया बढ़ोतरी बीते 21 जून को बजट के जरिये की गई है जबकि दोनों ईंधनों पर प्रति लीटर एक रुपया केंद्रीय उत्पाद शुल्क मद में जबकि एक रुपया सेस के मद में बढ़ाया गया है। सबसे पहले 12 नवंबर 2014 को दोनों ईंधनों पर डेढ़-डेढ़ रुपये केंद्रीय उत्पाद शुल्क बढ़ा था। 

इसके बाद दो दिसंबर 2014 को पेट्रोल पर सवा दो रुपये जबकि डीजल पर एक रुपया, एक जनवरी 2015 को दोनों ईंधनों पर दो दो रुपये, 16 जनवरी 2015 को दोनों ईंधनों पर दो दो रुपये, सात नवंबर 2015 को पेट्रोल पर 1.60 रुपये जबकि डीजल पर 40 पैसे, सात दिसंबर 2015 को पेट्रोल पर 30 पैसे जबकि डीजल पर 1.17 रुपये शुल्क बढ़ाया गया था।

दो जनवरी 2016 को पेट्रोल पर 37 पैसे जबकि डीजल पर दो रुपये, 16 जनवरी 2016 को पेट्रोल पर 75 पैसे जबकि डीजल पर दो रुपये, 30 जनवरी 2016 को पेट्रोल पर एक रुपया जबकि डीजल पर 1.50 रुपये और 21 जून 2019 को दोनों ईंधनों पर एक-एक रुपया उत्पाद शुल्क बढ़ाया गया था। इसी दिन सेस के मद में भी एक-एक रुपया की बढ़ोतरी की गई थी।

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