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सड़क मंत्रालय और निगमों पर सात लाख करोड़ की देनदारी
Thu, 03 Sep 2020 06:19 AM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Thu, 03 Sep 2020 06:19 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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देश में हाइवे और एक्सप्रेस वे बनाने के लिए धन की कमी के कारण सड़क परिवहन मंत्रालय और उससे जुड़ी संस्थाओं पर सात लाख करोड़ रुपये की देनदारी हो गई है। हालत ये है कि पिछले पांच वर्षों में 67 फीसदी बढ़ोतरी के बाद भी इन सभी का कुल बजट एक लाख करोड़ रुपये भी नहीं पहुंचा है।
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भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का चालू वित्त वर्ष में स्वीकृत बजट 36,691 करोड़ है, जबकि अनुमानित खर्च 1.4 लाख करोड़ है। सबसे ज्यादा 3.5 की देनदारी भी एनएचएआई पर है। इसके बाद राष्ट्रीय राजमार्ग बुनियादी ढांचा विकास निगम लिमिटेड पर 2.1लाख करोड़ और सड़क परिवहन मंत्रालय पर1.5 करोड़ करोड़ की देनदारी है।
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एनएचएआई ने अप्रैल से अगस्त तक 31 हजार करोड़ की परियोजनाएं शुरू की हैं,लेकिन बढ़ते घाटे से सड़क निर्माण कंपनियां अब पैसा लगाने से हिचक रही हैं। इसी वजह से अधिकतर परियोजनाओं में पूरा पैसा मंत्रालय या सहयोगी संस्थाओं को लगाना पड़ रहा है।
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जमीन संबंधी राज्यों के कानून की वजह से एनएचआई हाईवे किनारे की भूमि का व्यवसायिक इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है। एनएच एक्ट के तहत वह इसका इस्तेमाल सार्वजनिक कार्य में कर सकता है।
धन जुटाने के लिए बढ़ सकता है टोल
सड़क निर्माण की बढ़ती लागत को देखते हुए पिछले दिनों सड़क मंत्रालय से जुड़ी संसदीय समिति ने पैसे जुटाने के लिए टोल की दरे बढ़ाने का प्रस्ताव दिया था।
हालांकि, इस पर अभी फैसला नहीं हो सका है लेकिन सड़क निर्माण के लिए पेट्रोल और डीजलल पर लगने वाले कर से सरकार को एक लाख करोड़ रुपये प्रति वर्ष मिल रहे हैं।
पहले यह पैसा सीधे सड़क परिवहन मंत्रालय के पास जाता था, लेकिन पिछले तीन वर्षों से यह धनराशि देश के समेकित फंड में जातीहै। पिछले वित्तीय वर्ष में सरकार को इस मद में 1.27 लाख करोड़ रुपये मिले।