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ऋण बढ़ाना SBI के अगले चेयरमैन की पहली प्राथमिकता

Sat, 07 Oct 2017 01:14 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 07 Oct 2017 01:14 PM IST
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SBI New chairman Rajnish Kumar looking for Reviving credit growth

देश के सबसे बड़े बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के नव नियुक्त अध्यक्ष रजनीश कुमार की पहली प्राथमिकता बैंक के ऋण (क्रेडिट) को बढ़ाना होगा। इसके साथ ही स्टेट बैंक के फंसे कर्जों का समाधान खोजना भी उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता में होगा। उल्लेखनीय है कि आगामी शनिवार को वह एसबीआई के अध्यक्ष का पदभार अरुंधति भट्टाचार्य से ग्रहण करेंगे।

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इस समय स्टेट बैंक के प्रबंध निदेशक (नेशनल बैंकिंग समूह) का जिम्मा संभाल रहे रजनीश कुमार ने संवाददाताओं से टेलीकॉन में बताया कि बैंक के क्रेडिट को बढ़ाना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। इसके अलावा फंसे कर्जों (एनपीए) का समाधान खोज कर पैसे वापस पाना और बैंक को डिजिटल मार्ग पर आगे बढ़ाते हुए भविष्य के बैंक को मूर्त रूप देना भी उनकी उच्च प्राथमिकता में है।
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ऐसा कब तक हो पाएगा, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि स्टेट बैंक कोई छोटा मोटा संगठन नहीं है, यहां सब कुछ प्रक्रियागत ढंग से होता है। उन्होंने कहा कि मैं अगले 30 दिनों में सभी अल्पवधि एवं दीर्घावधि की कार्य योजनाओं की समीक्षा करूंगा। मैं देखूंगा कि क्या हो रहा है, क्या नहीं हो रहा है। उसके बाद जो जरूरी होगा, उसके बारे में कार्य योजना बनाई जाएगी।
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कर्मचारी भी महत्वपूर्ण
रजनीश कुमार का कहना है कि उनके लिए ग्राहक जितने महत्वपूर्ण हैं, उतने ही महत्वपूर्ण कर्मचारी भी हैं। इसलिए वह मानव संसाधान पर भी विशेष ध्यान देंगे। वह देखेंगे कि किस कर्मचारी को प्रशक्षिण की जरूरत है और किसे मध्यावधि प्रशिक्षण की जरूरत है। उसके हिसाब से उनके कौशल में विस्तार किया जाएगा। ऐसा इसलिए ताकि स्टेट बैंक नौकरी के लिए सबसे अच्छा बैंक बन सके।

सहयोगी बैंकों से आए कर्मचारियों-अधिकारियों से भेदभाव नहीं

SBI New chairman Rajnish Kumar looking for Reviving credit growth

रजनीश कुमार ने बताया कि स्टेट बैंक में उसके सहायक बैंकों और भारतीय महिला बैंक के विलय की प्रक्रिया पूरी हो गई है। इस बीच करीब एक हजार शाखाओं का भी विलय हुआ है और आने वाले दिनों में कुछ और शाखाओं का विलय होगा।

हालांकि उन्होंने कहा कि जो भी कर्मचारी या अधिकारी दूसरे बैंकों से आए हैं, उनके साथ यहां कोई भेदभाव नहीं होगा। सबको कार्य करने के लिए, विकास करने के लिए समान अवसर उपलब्ध कराया जाएगा।

कर्मचारी के मोर्चे पर है चुनौती
मानव संसाधन के मोर्चे पर उनकी सबसे बड़ी चुनौती क्या है, यह पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि अब बैंकों को बेहतर प्रतिभा मिलने में दिक्कत हो रही है। यदि कोई प्रतिभा मिल भी जाती है तो उसे बहुत समय तक बैंक से जोड़े रखना संभव नहीं हो पाता है। वे बीच में ही बैंक को अलविदा कह देते हैं। इसलिए इस तरह की नीति बनाई जाएगी कि बैंक अधिक से अधिक प्रतिभा को आकर्षित कर सके, इसके साथ ही उन्हें बैंक से जोड़ कर भी रखा जा सके।

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