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भारतीय रिजर्व बैंक ने 68 हजार करोड़ रुपये बट्टे खाते में डाले, यह है वजह

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Wed, 29 Apr 2020 05:27 AM IST
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बैंकों से कर्ज लेकर हजम करने वाले देश के 50 सबसे बड़े बकायेदारों से पैसा वसूली की आस छोड़ दी गई है। बैंकों ने इन लोगों के पास कर्ज के रूप में फंसे 68,607 करोड़ रुपये को तकनीकी तौर पर राइट ऑफ (बट्टे खाते में डालना) कर दिया है। इस सूची में भगोड़ा हीरा कारोबारी मेहुल चौकसी पहले नंबर पर है, जबकि भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या का नाम भी इसमें शामिल है।
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दरअसल, यह खुलासा भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की तरफ से आरटीआई कार्यकर्ता साकेत गोखले की एक रिट पर दिए जवाब से हुआ है। गोखले ने आरबीआई से सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) के जरिये देश के 50 शीर्ष विलफुल डिफॉल्टर (जानबूझकर कर्ज न चुकाने  वालों) की जानकारी मांगी थी।


साथ ही इनके कर्ज की 16 फरवरी तक की मौजूदा स्थिति पूछी गई थी। गोखले का कहना है कि उन्होंने आरटीआई इस कारण दाखिल की थी, क्योंकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने बजट सत्र के दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की तरफ से 16 फरवरी को तारांकित प्रश्न के तहत मांगने पर यह जानकारी देने से इनकार कर दिया था।

गोखले ने कहा, जो जानकारी सरकार ने नहीं दी, वह आरबीआई के केंद्रीय जन सूचना आधिकारी अभय कुमार ने 24 अप्रैल को दी। आरबीआई ने बताया कि 30 सितंबर, 2019 तक इन विलफुल डिफॉल्टरों पर 68,607 करोड़ रुपये बकाया था। इस रकम को तकनीकी तौर पर राइटऑफ कर दिया गया। हालांकि आरबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के 16 दिसंबर, 2015 के एक निर्णय का हवाला देकर विदेशी बकायेदारों का नाम बताने से इनकार कर दिया।

क्या होता है विलफुल डिफॉल्टर
कोई भी व्यक्ति या कंपनी, जिसके पास लोन चुकाने लायक रकम हो, लेकिन किस्त अदा नहीं करे और बैंक उसके खिलाफ अदालत जाए, तो ऐसा व्यक्ति या कंपनी विलफुल डिफॉल्टर कहलाता है।
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