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रियल एस्टेट में मंदी दूर होने की उम्मीद, रेरा से बढ़ा खरीदारों का भरोसा

Sun, 03 Feb 2019 02:26 AM IST
गौरव द्विवेदी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव द्विवेदी Updated Sun, 03 Feb 2019 02:26 AM IST
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Real estate hopes for a downturn, more buyers relying on law
RERA ACT

रियल एस्टेट नियामक कानून (रेरा) से इस क्षेत्र में छायी सुस्ती अब दूर हो सकती है। दरअसल, रेरा के सख्त प्रावधान की वजह से बिल्डर नई परियोजनाएं लांच करने केबदले पुरानी परियोजनाओं को पूरा करने पर जोर दे रहे थे। लेकिन बजट में रियल एस्टेट से जुड़ी सकारात्मक घोषणा होने की वजह से अब इस क्षेत्र में छायी मंदी दूर हो सकती है।

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रेरा के अमल में आने केबाद इस क्षेत्र में काम करने वालों को अनिवार्य रूप से पंजीकरण करवाना पड़ा और सारी जानकारी एक क्लिक पर देनी पड़ी। जब पारदर्शिता बढ़ी तो लोगों को पता चलने लगा कि कहां क्या गड़बड़ी चल रही है। इसी वजह से रियल एस्टेट क्षेत्र में एक तरह से मंदी की स्थिति आ गई। ऊपर से नोटबंदी केबाद आयकर विभाग की सख्ती बढ़ी और इसी बीच वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू हो गई। इससे सीमेंट जैसी अनिवार्य वस्तु पर 28 फीसदी का जीएसटी लागू हो गया। 
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इसलिए इसमें नई परियोजनाएं आनी लगभग बंद हो गई। विशेषज्ञ कहते हैं कि रेरा के सख्त प्रावधान की वजह से बिल्डर पुरानी परियोजनाओं को पूरा करने पर जोर देने लगे। दूसरी तरफ मांग घटी, इसलिए नई परियोजनाएं तो गायब ही हो गईं। सिर्फगिने-चुने बिल्डरों ने ही सीमित संख्या में परियोजना शुरू की।

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आएंगे नए खरीदार, शुरू होगी नई परियोजनाएं

कफेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (क्रेडाई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जक्षय शाह का कहना है कि रियल एस्टेट केक्षेत्र में चल रही अनियमितताओं को दूर करने के लिए केन्द्र सरकार की पहल रियल एस्टेट नियामक कानून के लागू होने से परियोजनाओं में खरीदारों का तो भरोसा बढ़ा था, लेकिन तब भी नई परियोजनाएं दूर की कौड़ी थीं। लेकिन अब इस क्षेत्र में न सिर्फनए खरीदार आएंगे बल्कि नई परियेाजनाएं भी लांच होंगी। 

उनका कहना है कि रेरा के आने के बाद स्थिति तो बदली थी, लेकिन इसके कुछ प्रावधानों की वजह से बिल्डर नई परियेाजनाओं को शुरू करने केबदले पुरानी परियोजनाओं को पूरा करने पर जोर दे रहे थे। इसी समय बाजार में लिक्विडिटी क्रंच भी हुआ। लेकिन अब भरोसा बढ़ने से स्थिति बदलेगी। उनका कहना है कि किसी भी बाजार के पनपने और फैलने के लिए ग्राहक और बिल्डर के बीच भरोसा सबसे बड़ा कारक होता है। 

रियल एस्टेट बाजार में रेरा ने ग्राहकों में एक ऐसा भरोसा जगा दिया है कि ग्राहक यह सोचने लगे हैं कि संपत्ति कैसी भी हो, यदि रेरा का पंजीकरण है तो मेरा आशियाना सुरक्षित है। इससे ग्राहकों और बिल्डरों के बीच बेहतर रिश्ते बन रहे हैं।

रेरा केबाद भी है दिक्कतें

शाह का कहना है रेरा के आने के बाद भी कुछ दिक्कतें हैं। मसलन, एक तरफ तो रेरा के जरिये बिडरों पर तमाम अंकुश लगा दिये गए हैं, लेकिन बिल्डर को जिन सरकारी विभागों के साथ तालमेल बिठा कर चलना है, वहां अभी भी स्थिति जस की तस है। वहां यदि स्थिति नहीं सुधरेगी तो बिल्डर चाहें लाख घोड़े खोल लें, परियोजनाएं समय से पूरी नहीं होंगी। 

गाजियाबाद में काम करने वाले एक बिल्डर ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया कि प्राधिकरण वाले हर टेबल के बाबू बिल्डर की फाइल आगे बढ़ाने के लिए नजराना चाहते हैं। उनके सामने बिल्डर की हालत वैसी ही होती है, जैसी कि ट्रेफिक हवलदार के सामने मोटर केड्राइवर की। आप जितना कागज दुरूस्त रखें, वह कुछ न कुछ कमी निकाल ही देगा।

जीएसटी की दिक्कतें भी हो रही हें दूर

नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमंट काउंसिल (नरेडको) के अध्यक्ष निरंजन हीरानंदानी का कहना है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) आने के बाद मकान खरीदने वालों केलिए इसका बोझ बढ़ा है। अब इनके  बोझ को कम करने का एक प्रयास चल रहा है। सरकार ने मंत्रियों के एक समूह का गठन कर दिया है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद इसे लागू किया जाएगा।
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