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डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में बड़ी कंपनियों का दबदबा नहीं चाहते: रिजर्व बैंक

Thu, 07 Jun 2018 03:14 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Updated Thu, 07 Jun 2018 03:14 PM IST
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RBI Said, Do not want big companies to dominate the field of digital payments

भारत में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल भुगतान को देखते हुए रिजर्व बैंक चौकन्ना हो गया है। उसे आशंका है कि यह क्षेत्र कुछ दिग्गज कंपनियों तक सीमित हो सकता है। लिहाजा, केंद्रीय बैंक ने बुधवार को इस पर अपना रुख साफ कर दिया। 

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बैंक के अनुसार, वह नहीं चाहता कि डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में कुछ बड़ी कंपनियों का ही दबदबा रहे। इसमें कई नए खिलाड़ियों को भी आगे बढ़ाना होगा। आरबीआई की ओर से विकास एवं नियामक नीतियों पर जारी बयान के मुताबिक, खुदरा भुगतान का बाजार परिपक्व हो रहा है, ऐसे में वित्तीय स्थिरता के लिए जरूरी है कि इस क्षेत्र में केंद्रीकरण के जोखिम को कम किया जाए। 
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यानी डिजिटल भुगतान बाजार को कुछ बड़ी कंपनियों तक ही सीमित नहीं होना चाहिए। रिजर्व बैंक कुछ अन्य कंपनियों को इसमें शामिल होने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। वह अखिल भारतीय स्तर पर भुगतान प्लेटफार्म को बढ़ावा दे रहा है ताकि इस क्षेत्र में इनोवेशन और प्रतिस्पर्धा को गति प्रदान की जा सके। 
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रिजर्व बैंक इस संबंध में 30 सितंबर तक एक पॉलिसी पेपर लाएगा। रिजर्व बैंक के रुख को डिजिटल भुगतान करने वाली दिग्गज कंपनियों पेटीएम, फ्लिपकार्ट की कंपनी फोनपे, एमेजान पे के लिए सीधा संदेश माना जा रहा है। जल्द ही फेसबुक भी भारत में ‘व्हाट्सएप पेमेंट सर्विस’ शुरू करने की तैयारी में है। पेटीएम भारत में सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट एप सर्विस है। 

बैंक भी जल्द बढ़ाएंगे ब्याज दरें
रेपो और रिवर्स रेपो दरों में बढ़ोतरी के बाद बैंकों ने भी अपनी ब्याज दरों में जल्द इजाफे की बात कही है। बैंक ऑफ महाराष्ट्र के एमडी और सीईओ आरपी मराठे ने कहा कि आरबीआई की नीति का बैंकों के ऋण दरों में वृद्धि के तौर असर दिखेगा। 

एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार के अनुसार, एफएएलएलसीआर में बढ़ोतरी से बैंकों को अधिक तरलता मिलेगी। इससे किफायती आवासों के लिए प्रारंभिक सीमा को बढ़ाने में मदद मिलेगी। हालांकि बैंकों ने कहा कि तरलता कवरेज अनुपात में बदलाव की वजह से अर्थव्यवस्था में नकदी की उपलब्धता बढ़ने से रेपो दर में हुई वृद्धि का असर जाता रहेगा। 


एचडीएफसी बैंक ने ट्वीट कर कहा कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी का जो दौर शुरू हुआ है, आने वाले समय में इस तरह की और वृद्धि हो सकती है। फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को लागत का डेढ़ गुणा किए जाने, वैश्विक बाजार में विभिन्न उपभोक्ता जिंस के दाम बढ़ने का मुद्रास्फीति पर असर होगा। इसके चलते मौद्रिक नीति में आगे और कदम उठाये जा सकते हैं। 

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